भारत

कैबिनेट ने राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष (NIIF) में ₹30,000 करोड़ के अतिरिक्त निवेश की प्रतिबद्धता को मंजूरी दी

इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य राष्ट्रीय महत्व के क्षेत्रों में भारत की निवेश प्रतिबद्धता को और मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले सप्ताह राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष (एनआईआईएफ) के नए और आगामी कोषों के लिए भारत सरकार की ओर से ₹30,000 करोड़ की अतिरिक्त निवेश प्रतिबद्धता को मंजूरी दी। इससे एनआईआईएफ के लिए भारत सरकार की कुल प्रतिबद्धता ₹60,000 करोड़ हो गई।

राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष (एनआईआईएफ) भारत का संप्रभु-आधारित कोष है, जिसका संचालन और प्रबंधन नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड लिमिटेड (एनआईआईएफएल) की ओर से पेशेवर तरीके से किया जाता है। भारत सरकार एनआईआईएफ में 49% शेयरधारक है और वर्तमान में यह अपने कोषों और निवेश रणनीतियों में लगभग ₹40,000 करोड़ की पूंजी प्रतिबद्धता का प्रबंधन करती है। एनआईआईएफ ने पूंजी के इस्तेमाल और प्राप्ति में एक मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड दिखाया है, और बड़े पोर्टफोलियो से बाहर निकलने के माध्यम से निवेशकों को लगभग ₹12,000 करोड़ लौटाए हैं।

एनआईआईएफ ने प्रमुख संस्थागत निवेशकों से पूंजी जुटाई है, जिनमें सॉवरेन वेल्थ फंड, पेंशन फंड, बहुपक्षीय विकास और अग्रणी घरेलू वित्तीय संस्थान शामिल हैं। इनमें अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी, ऑस्ट्रेलियनसुपर, सीपीपी इन्वेस्टमेंट्स, ओंटारियो टीचर्स पेंशन प्लान, पीएसपी इन्वेस्टमेंट्स, टेमासेक, एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक, न्यू डेवलपमेंट बैंक, एशियन डेवलपमेंट बैंक, जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन, यूएस इंटरनेशनल डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन, एक्सिस बैंक, एचडीएफसी ग्रुप, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा लाइफ इंश्योरेंस और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया शामिल हैं।

ये निवेशक ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जापान, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और संयुक्त राज्य अमेरिका सहित कई भौगोलिक क्षेत्रों से आते हैं, जो भारत की विकास यात्रा और एनआईआईएफ के शासन और वाणिज्यिक ट्रैक रिकॉर्ड में मजबूत अंतरराष्ट्रीय विश्वास को प्रतिबिंबित करता है।

भारत-जापान व्यापार गलियारे में एनआईआईएफ की चार परिचालन निवेश रणनीतियों – इंफ्रास्ट्रक्चर, निजी बाजार, विकास इक्विटी और जलवायु निवेश – ने निवेश में विशेष गति हासिल की है।

एनआईआईएफ का पहला इंफ्रास्ट्रक्चर कोष, ₹16000 करोड़ के कोष के साथ, भारत का सबसे बड़ा घरेलू इंफ्रास्ट्रक्चर कोष है और इसने परिवहन (सड़कें, बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स, और हवाई अड्डे), ऊर्जा (नवीकरणीय ऊर्जा, स्मार्ट मीटर और विद्युत पारेषण) और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में प्लेटफॉर्म स्थापित किए हैं। इसके निजी बाजार कोष ने स्वदेशी प्रबंधकों की ओर से प्रबंधित कई सहायक इंफ्रास्ट्रक्चर कोषों में निवेश किया है, जिन्होंने जलवायु, किफायती आवास, किफायती स्वास्थ्य सेवा और वेंचर कैपिटल (वीसी)/ प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में निवेश किया है। एनआईआईएफ के रणनीतिक अवसर कोष ने वित्तीय सेवाओं, स्वास्थ्य सेवा और विनिर्माण जैसे विकास क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया है। एनआईआईएफ का भारत-जापान कोष इसका पहला द्विपक्षीय कोष है और यह जलवायु और चक्रीय अर्थव्यवस्था तथा ऊर्जा परिवर्तन पर, साथ ही भारत-जापान व्यापार गलियारे को बढ़ावा देने वाले निवेशों पर भी, ध्यान केंद्रित करता है।

एनआईआईएफ की ओर से प्रबंधित निधियों ने सामूहिक आधार पर परिवहन, ऊर्जा परिवर्तन, स्वास्थ्य सेवा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, इलेक्ट्रिक गाड़ियों से आवागमन, किफायती आवास, विनिर्माण और प्रौद्योगिकी सहित प्रमुख क्षेत्रों में कई भारतीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पूंजी का निवेश किया है। ये निवेश गति शक्ति, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, सीओपी प्रतिबद्धताओं और एफएएमई और पीएम ई-ड्राइव जैसी प्रमुख योजनाओं जैसी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप हैं।

एनआईआईएफ एक रणनीतिक सलाहकार की भूमिका भी निभाता है, जो केंद्र सरकार के विभागों और राज्य संस्थाओं को नई पीपीपी पहलों और निवेश विचारों पर सहायता प्रदान करता है जो निजी क्षेत्र के निवेश को बढ़ावा दे सकते हैं। इसमें समुद्री विकास कोष और अनुसंधान विकास एवं नवाचार कोष की संरचना जैसी पहलों पर सलाहकार और नीतिगत सहायता, मुद्रीकरण और पीपीपी संरचनाओं पर सरकारी अधिकारियों के साथ सहयोग, और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप अन्य क्षेत्र-विशिष्ट निवेश ढांचों पर सलाह शामिल है।

भारत में अतिरिक्त निजी पूंजी लाने और भारत की विकास यात्रा में योगदान देने में एनआईआईएफ की ओर से वर्षों से निभाई गई भूमिका को मान्यता देते हुए, भारत सरकार की इस अतिरिक्त प्रतिबद्धता से परिवहन, ऊर्जा, डिजिटल अवसंरचना, शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर, ई-मोबिलिटी और अन्य राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहन की उम्मीद है।

भारत सरकार की ओर से एनआईआईएफ में किए गए ₹30,000 करोड़ के इस अतिरिक्त निवेश का इस्तेमाल एनआईआईएफ के दूसरे अवसंरचना केंद्रित कोष की स्थापना के लिए किया जाएगा, जो इस उद्देश्य के साथ स्थापित इसके पहले प्रमुख कोष का उत्तराधिकारी होगा। एनआईआईएफ अवसंरचना कोष द्वितीय का लक्ष्य कोष लगभग ₹30,000 करोड़ प्रस्तावित है और इससे परिवहन, ऊर्जा, डिजिटल अवसंरचना और शहरी अवसंरचना तथा ई-गतिशीलता जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश किए जाने की उम्मीद है। यह आवंटन एनआईआईएफ की नई कोष रणनीतियों और इसके उत्तराधिकारी द्विपक्षीय एवं अन्य रणनीतिक कोषों को भी सहयोग देगा।

वर्तमान सरकारी आवंटन से अंतर्निहित परिसंपत्तियों और पोर्टफोलियो कंपनियों में निवेश के माध्यम से अर्थव्यवस्था पर उत्प्रेरक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है, जिससे उच्च गुणवत्ता वाले इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण, रोजगार निर्माण (प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों) और राष्ट्रीय महत्व के प्रमुख क्षेत्रों के विकास को बढ़ावा मिलेगा, इस प्रकार आत्मनिर्भरता और 2047 तक विकसित भारत बनने की दिशा में देश की यात्रा को सहयोग मिलेगा।

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