भारत

कैबिनेट ने पश्चिम बंगाल और झारखंड के 5 जिलों को शामिल करने वाली दो मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को स्वीकृति दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक कार्य समिति ने आज रेल मंत्रालय की लगभग 4,474 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली दो परियोजनाओं को स्वीकृति दी है। इन परियोजनाओं में शामिल हैं:

  1. सैंथिया-पाकुड़ चौथी लाइन
  2. संतरागाछी-खड़गपुर चौथी लाइन

बढ़ी हुई रेल लाइन क्षमता से आवागमन में उल्लेखनीय सुधार होगा, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में वृद्धि होगी। ये मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना से परिचालन को सुव्यवस्थित करने और भीड़भाड़ को कम करने में सहायता मिलेगी। ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नए भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं। इसका उद्देश्य क्षेत्र के लोगों को व्यापक विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना है, जिससे उनके रोजगार/स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

ये परियोजनाएं पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत बनाई गई हैं, जिसमें एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श के माध्यम से मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। ये परियोजनाएं लोगों, वस्तुओं और सेवाओं के निर्बाध आवागमन के लिए कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी।

पश्चिम बंगाल और झारखंड राज्यों के 5 जिलों को शामिल करने वाली 2 परियोजनाएं भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क को लगभग 192 किलोमीटर तक बढ़ाएंगी।

स्वीकृत मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना लगभग 5,652 गांवों को कनेक्टिविटी प्रदान करेगी, जिनकी आबादी लगभग 147 लाख है।

प्रस्तावित क्षमता वृद्धि से देश भर के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों, जैसे बोलपुर-शांतिनिकेतन, नंदिकेश्वरी मंदिर (शक्तिपीठ), तारापीठ (शक्तिपीठ), पटाचित्र ग्राम, धडिका वन, भीमबंध वन्यजीव अभ्यारण्य, रामेश्वर कुंड आदि के लिए रेल संपर्क में सुधार होगा।

स्वीकृत परियोजनाएं कोयला, पत्थर, डोलोमाइट, सीमेंट, स्लैग, जिप्सम, लोहा और इस्पात, खाद्यान्न, पीओएल, कंटेनर आदि जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए आवश्यक मार्ग हैं। क्षमता वृद्धि कार्यों के परिणामस्वरूप प्रति वर्ष 31 मिलियन टन माल ढुलाई की अतिरिक्त क्षमता प्राप्त होगी। रेलवे पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा दक्ष परिवहन माध्यम होने के नाते, जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश की रसद लागत को कम करने में सहायता करेगा, तेल आयात (6 करोड़ लीटर) को कम करेगा और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन (28 करोड़ किलोग्राम) को कम करेगा, जो 1 करोड़ पौधारोपण के बराबर है।

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