केंद्र सरकार ने 2019-20 से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम को लागू करने के लिए उत्तर प्रदेश को 747.17 करोड़ रुपये जारी किए
केंद्र सरकार सिविल अधिकार संरक्षण (पीसीआर) अधिनियम, 1955 तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 को लागू करने हेतु तंत्र के सुदृढ़ीकरण के लिए एक केंद्र-प्रायोजित योजना कार्यान्वित कर रही है। इस योजना के तहत, अधिनियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने और अत्याचार पीड़ितों को राहत प्रदान करने के लिए उत्तर प्रदेश सहित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को केंद्रीय सहायता जारी की जाती है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में प्रो. मनोज कुमार झा को यह जानकारी दी। सदन को यह भी बताया गया कि 2019-20 से 2025-26 के बीच उत्तर प्रदेश को कुल 747.17 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता जारी की गई है। इस अवधि के दौरान, योजना के अंतर्गत 1,43,543 अत्याचार पीड़ितों को राहत प्रदान की गई।
लिखित उत्तर में यह भी बताया गया कि 2019-20 के दौरान 141.36 करोड़ रुपये जारी किए गए जिससे 23,866 पीड़ितों को लाभ हुआ। इसके बाद 2020-21 में 23,592 पीड़ितों के लिए 113.03 करोड़ रुपये, 2021-22 में 20,278 पीड़ितों के लिए 126.72 करोड़ रुपये, 2022-23 में 23,828 पीड़ितों को लाभान्वित करने के लिए 91.54 करोड़ रुपये, 2023-24 में 19,240 पीड़ितों के लिए 97.95 करोड़ रुपये, 2024-25 में 20,074 पीड़ितों को लाभान्वित करने के लिए 89.49 करोड़ रुपये, और 2025-26 के दौरान 87.08 करोड़ रुपये जारी किए गए, जिससे 12,665 पीड़ितों को राहत प्रदान की गई है।
सदन को यह भी बताया गया कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार, उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत अनुसूचित जातियों के खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या 2019 के 11,829 से बढ़कर 2024 में 14,642 हो गई। इसी अवधि के दौरान, उत्तर प्रदेश में दोषसिद्धि दर लगातार राष्ट्रीय औसत से अधिक रही; 2019 से 2024 के बीच यह दर 66.1%, 70.3%, 76.3%, 80.2%, 70.0% और 73.3% दर्ज की गई, जबकि इसी अवधि में राष्ट्रीय औसत क्रमशः 32.1%, 42.5%, 36.0%, 34.1%, 32.4% और 33.9% रहा।
उत्तर प्रदेश में इस अधिनियम के तहत अनुसूचित जनजातियों के खिलाफ दर्ज मामलों के संबंध में, लिखित उत्तर में कहा गया कि 2019 में 36 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद 2020 में 3, 2021 में 4, 2022 में 5, 2023 में 6 और 2024 में 8 मामले दर्ज किए गए। 2019 और 2020 में दोषसिद्धि दर शत-प्रतिशत थी, जबकि 2021 से 2024 की अवधि के दौरान कोई दोषसिद्धि दर्ज नहीं की गई।
मुआवज़े से जुड़े प्रश्न का उत्तर देते हुए सदन को बताया गया कि मंत्रालय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को केंद्रीय सहायता जारी करता है, लेकिन योजना के कार्यान्वयन और राहत राशि वितरित करने की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की होती है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि वह जारी की गई केंद्रीय सहायता में से पीड़ितों को दिए गए मुआवज़े की वास्तविक राशि के संबंध में केंद्रीय स्तर पर डेटा नहीं रखता है।




