प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 18 जून 2020 को शुरू की गई पहली वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी के क्रम को आगे बढ़ाते हुए, कोयला मंत्रालय 27 मार्च 2025 को वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी के 12वें चरण की शुरुआत करने जा रहा है। यह पहल देश में घरेलू कोयला उत्पादन को बढ़ाने, आयात पर निर्भरता कम करने और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। इस अवसर पर केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी. किशन रेड्डी मुख्य अतिथि होंगे, जबकि केंद्रीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।
इस नीलामी के तहत कुल 25 कोयला खदानों की पेशकश की जाएगी, जिनमें से 7 खदानें कोयला सीएमएसपी [कोयला खान (विशेष प्रावधान)अधिनियम, 2015 के अंतर्गत और 18 खदानें खनिज और खदान (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 (एमएमडीआर) के अंतर्गत आती हैं। इनमें से 2 लिग्नाइट खदानें भी शामिल हैं, जो विभिन्न ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक होंगी। इसके अलावा, 13 कोयला खदानें पूरी तरह से खोजी जा चुकी हैं, जबकि 12 आंशिक रूप से खोजी गई हैं, जिससे तत्काल और भविष्य के विकास दोनों के लिए अवसर मिलेंगे।
इसके अतिरिक्त, नीलामी के 11वें दौर के दूसरे प्रयास के तहत, कोयला मंत्रालय एमएमडीआर अधिनियम के अंतर्गत तीन आंशिक रूप से खोजी गई कोयला खदानों की पेशकश कर रहा है, जिससे निवेशकों को महत्वपूर्ण अवसर मिलेंगे और घरेलू कोयला उत्पादन एवं ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा।
सरकार का उद्देश्य पारदर्शी और बाजार-आधारित कोयला अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है। वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी ने कोयले के विशाल भंडार को अनलॉक (खोलने) करना एक गेम-चेंजर रही है, जिससे प्रतिस्पर्धा, दक्षता और सतत खनन प्रथाओं को बढ़ावा मिला है।
वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी के 12वें चरण से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की बड़ी भागीदारी की उम्मीद है। यह पहल भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता और औद्योगिक विकास के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करेगी। इसके साथ ही, यह देश में एक मजबूत और लचीला कोयला क्षेत्र विकसित करने में योगदान देगा, जिससे उद्योगों, विद्युत संयंत्रों और बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं को सहायता मिलेगी।
कोयला मंत्रालय लगातार सुधारों को लागू करने, व्यापार करने की सुगमता बढ़ाने और कोयला खनन के लिए एक समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत को विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ाने में ये पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी और देश की आर्थिक नींव को और मजबूत करेंगी।
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