रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जोधपुर में ‘अभ्यास तरंग शक्ति 2026’ के दूसरे संस्करण के प्रतिभागियों को संबोधित किया
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वायुसेना केन्द्र जोधपुर में ‘अभ्यास तरंग शक्ति 2026’ के दूसरे संस्करण के प्रतिभागियों को संबोधित किया। भारतीय वायु सेना (आईएएफ) द्वारा 26 सितंबर से 12 अक्टूबर 2026 के दौरान आयोजित इस बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास में सात मित्र देशों (एफएफसी) – ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, फ्रांस, जर्मनी, श्रीलंका, संयुक्त अरब अमीरात और संयुक्त राज्य अमेरिका – की वायु सेनाओं के साथ-साथ 32 प्रेक्षक देश भी शामिल हुए।
रक्षा मंत्री ने इस अभ्यास के सफल आयोजन में शामिल आईएएफ और सभी संगठनों व कर्मियों को बधाई दी। साथ ही, उन्होंने इसमें भाग लेने वाले देशों का स्वागत किया और पेशेवर समझ व परिचालन संबंधी सहयोग को मजबूत करने में उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रतिभागी वायु सेनाओं की मौजूदगी से इस अभ्यास का महत्व और बढ़ गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी दल यहां से बहुमूल्य पेशेवर जानकारी और भारत की क्षमताओं व दृष्टिकोण की गहरी समझ साथ लेकर लौटेंगे। उन्होंने आधुनिक युद्ध की बदलती चुनौतियों से निपटने हेतु रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, तकनीकी नवाचार और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के महत्व पर जोर दिया।
सभा को संबोधित करते हुए, राजनाथ सिंह ने कहा कि आधुनिक युद्ध-कला में बहुत बड़ा बदलाव आ रहा है। यह अब जमीन, समुद्र और हवा जैसे पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़कर अंतरिक्ष, साइबर, विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम और सूचना के क्षेत्र तक फैल गया है। उन्होंने समकालीन सैन्य अभियानों को आकार देने में मानवरहित प्रणालियों, ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध-कला और लंबी दूरी तक सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों के बढ़ते प्रभावों को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा, “भविष्य की सैन्य शक्ति का निर्धारण इस बात से कम होगा कि हमारे पास कितने प्लेटफॉर्म हैं। इसका निर्धारण चीजों को भांपने, समझने, फ़ैसला लेने और कार्रवाई करने की गति से होगा।” उन्होंने इस तथ्य को रेखांकित किया कि गति, सटीकता, जानकारी और तालमेल सैन्य क्षमता की अहम पहचान बन गए हैं। उन्होंने तेजी से बदलते भू-राजनैतिक माहौल और रक्षा क्षेत्र में तकनीकी प्रगति से जुड़ी अनिश्चितताओं को देखते हुए लगातार सतर्क रहने की जरूरत पर भी जोर दिया।
रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने सुरक्षा से जुड़ी नई चुनौतियों का सामना करने के उद्देश्य से देश की मजबूती बढ़ाने के महत्व को समझा है और रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भरता’ को एक राष्ट्रीय नीति के रूप में अपनाया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लंबे समय तक चलने वाले संघर्षों और अनिश्चितता के दौर में खुद को बनाए रखने के लिए किसी भी देश के पास अपने हथियार एवं जरूरी तकनीकों के निर्माण की क्षमता होनी चाहिए।
भारतीय रक्षा बलों में आए बदलावों को रेखांकित करते हुए, रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय वायु सेना आजादी के समय सीमित संसाधनों के साथ काम करने वाली सेना से बदलकर एक आधुनिक हवाई शक्ति बन गई है, जो उन्नत विमानों, सटीक हमले करने वाले हथियारों, बेहतरीन सेंसर, इंटीग्रेटेड नेटवर्क और निरंतर उन्नत होती स्वदेशी तकनीकों से लैस है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ का आशय दुनिया से अलग-थलग पड़ना नहीं, बल्कि अहम रक्षा तकनीकों को डिजाइन करने, विकसित करने, उनका उत्पादन व रखरखाव करने और उन्हें उन्नत करने की घरेलू क्षमताएं विकसित करना है।
भारत के बढ़ते एयरोस्पेस एवं रक्षा उत्पादन इकोसिस्टम का उल्लेख करते हुए, रक्षा मंत्री ने तेजस लड़ाकू विमान, ध्रुव, रुद्र, प्रचंड और लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर (एलयूएच) जैसे हेलीकॉप्टर, आकाश वायु रक्षा प्रणाली, एईएसए रडार, इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली और उभरती मानवरहित एवं एयरोस्पेस तकनीक सहित विभिन्न स्वदेशी कार्यक्रमों और प्रणालियों पर प्रकाश डाला। रक्षा मंत्री ने उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (एएमसीए) कार्यक्रम को पांचवीं पीढ़ी की स्टील्थ फाइटर टेक्नोलॉजी में महारत हासिल करने की दिशा में एक अहम कदम बताया और उन्नत एयरो-इंजन के विकास और सह-उत्पादन के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत अनुसंधान, सह-विकास, सह-उत्पादन, रखरखाव, प्रशिक्षण और नवाचार के क्षेत्रों में समान विचार वाले देशों के साथ सहयोग करने का इच्छुक है। भरोसेमंद साझेदारी और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला के बढ़ते महत्व पर जोर देते हुए, उन्होंने कहा, “भविष्य के रक्षा संबंध तकनीक और भरोसे पर आधारित होंगे, न कि सिर्फ प्लेटफॉर्म पर।”
रक्षा मंत्री ने कहा कि मजबूत घरेलू क्षमताएं विकसित करने के साथ-साथ भरोसेमंद साझेदारों के साथ सार्थक सहयोग भी जरूरी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत को आवश्यकता पड़ने पर स्वतंत्र रूप से काम करने में सक्षम होने के साथ-साथ दूसरे देशों के साथ हित एवं जिम्मेदारियां मेल खाने पर उनके साथ भी प्रभावी ढंग से काम करना चाहिए।
इस संदर्भ में, रक्षा मंत्री ने ‘अभ्यास तरंग शक्ति’ के महत्व पर जोर दिया। यह अभ्यास क्षमता, तकनीक, आपसी समन्वय (इंटरऑपरेबिलिटी) और भरोसे के सिद्धांतों को परिचालन से जुड़े अनुभव में बदलने में सहायक रहा। इस अभ्यास ने प्रतिभागी वायु सेनाओं को एक-दूसरे के साथ काम करने, परिचालन संबंधी जानकारियों का आदान-प्रदान करने, प्रक्रियाओं का आकलन करने और मिशन की योजना बनाने के अलग-अलग प्लेटफॉर्म, सिद्धांतों और तरीकों को समझने का अवसर दिया। रक्षा मंत्री ने कहा कि बहुराष्ट्रीय अभ्यासों से एयरक्रू एवं कमांडरों को एक-दूसरे से सीखने, मौजूदा धारणाओं की जांच करने और अपनी प्रणालियों एवं प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने के अवसरों की पहचान करने में मदद मिली।
इस अभ्यास की भावना के बारे में बताते हुए, राजनाथ सिंह ने कहा, “अलग-अलग देश। अलग-अलग विमान। अलग-अलग अनुभव। लेकिन एक ही आसमान। यही ‘तरंग शक्ति’ का संदेश है।“” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस अभ्यास का महत्व केवल उड़ान भरने या अभ्यास किए गए परिदृश्यों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सहयोगी सेनाओं के साथ बातचीत करने, तालमेल बिठाने और प्रभावी ढंग से काम करने की क्षमता भी शामिल है। रक्षा मंत्री ने भारतीय वायु सेना से कहा कि वे इस अभ्यास से मिली सीख को अपने प्रशिक्षण, रणनीति, तकनीक, कार्य-प्रणाली और भविष्य की क्षमता विकास में शामिल करें। उन्होंने भरोसा जताया कि इसमें शामिल देश अभ्यास के दौरान बने पेशेवर रिश्तों और आपसी समझ को आगे बढ़ाएंगे, ताकि एयरोस्पेस और रक्षा सहयोग के नए रास्ते खोजे जा सकें।
‘अभ्यास तरंग शक्ति’ के दूसरे संस्करण ने 2024 में हुए इसके पहले संस्करण की सफलता को आगे बढ़ाया है और रक्षा क्षेत्र में रचनात्मक जुड़ाव एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत किया है। इस अभ्यास में लड़ाकू, परिवहन, निगरानी और हवा में ईंधन भरने जैसी अलग-अलग क्षमताएं एक साथ आईं, जिससे संयुक्त मिशन की योजना बनाने, परिचालन संबंधी सीख और बेहतर आपसी समन्वय के अवसर मिले। हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) तेजस और हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर (एलसीएच) प्रचंड जैसे स्वदेशी प्लेटफॉर्म की भागीदारी ने भी स्वदेशी एयरोस्पेस डिजाइन, इंजीनियरिंग और मैन्यूफैक्चरिंग में भारत की प्रगति को रेखांकित किया।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ में हवाई शक्ति की निर्णायक भूमिका इस अभ्यास की समकालीन प्रासंगिकता को रेखांकित करती है। इस ऑपरेशन ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लक्ष्यों को पूरा करने हेतु सटीक, सुनियोजित और प्रभावी कार्रवाई करने की भारतीय वायु सेना की क्षमता को प्रदर्शित किया। इस ऑपरेशन ने जटिल सुरक्षा माहौल में परिचालन संबंधी तैयारी, समन्वित योजना, विश्वसनीय प्रतिरोध और हवाई शक्ति के प्रभावी उपयोग के महत्व को रेखांकित किया। परिचालन संबंधी उपयोग से मिले अनुभव ‘तरंग शक्ति’ जैसे बहुराष्ट्रीय अभ्यासों के महत्व को और मजबूत करते हैं, जो पेशेवर समझ को बढ़ाने और आधुनिक युद्ध की बदलती चुनौतियों से निपटने की तैयारी करने में मदद करते हैं।
उड़ान संबंधी गतिविधियों के अलावा, इस अभ्यास में पेशेवर बातचीत, उद्योगों के दौरे और सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी शामिल थे। इनमें योग सत्र, धरोहर स्थलों की यात्रा और प्रतिभागी देशों की परंपराओं का उत्सव मनाने वाली एक ‘इंटरनेशनल नाइट’ शामिल थी। इस कार्यक्रम में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि, चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह, चीफ ऑफ नेवल स्टाफ एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन, अन्य गणमान्य व्यक्ति, रक्षा मंत्रालय के अधिकारी और प्रतिभागी देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए।





