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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में यूरोपियन यूनियन आयोग की उच्च प्रतिनिधि/उपाध्यक्ष से मुलाकात की

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में यूरोपियन यूनियन आयोग की उच्च प्रतिनिधि/उपाध्यक्ष काजा कल्लास से मुलाकात की। इस बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सुरक्षा और रक्षा मुद्दों के विस्‍तृत दायरे पर चर्चा की। राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ लोकतंत्र, बहुलवाद और कानून के शासन के सिद्धांतों को साझा करते हैं, जो उनकी निरंतर गहरी होती साझेदारी का आधार हैं। उन्होंने आगे कहा कि भारत इन्हीं मूल्यों को वैश्विक स्थिरता, सतत विकास और समावेशी समृद्धि के लिए व्यावहारिक सहयोग में बदलना चाहता है।

राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक हित के लिए भारतीय और यूरोपीय संघ के रक्षा उद्योगों को अपने प्रयासों में तालमेल बैठाना चाहिए। यह सहयोग भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन का पूरक है तथा साथ ही यूरोपीय संघ की रणनीतिक स्वायत्तता की आकांक्षा के अनुरूप भी है। यह साझेदारी विश्वसनीय रक्षा इकोसिस्‍टम और भविष्य के लिए तैयार क्षमताओं के निर्माण हेतु आपूर्ति श्रृंखलाओं को एकीकृत करके एक फोर्स ‘मल्‍टीप्‍लॉयर’ साबित होगी। उन्होंने कहा कि भारत का रक्षा उद्योग यूरोपीय संघ की ‘री-आर्म पहल’ में एक सार्थक भूमिका निभा सकता है, विशेषकर ऐसे समय में जब यूरोपीय संघ आपूर्तिकर्ताओं में तेजी से विविधता लाने और निर्भरता से जोखिम कम करने की दिशा में प्रयासरत है। उन्होंने काजा कल्लास की भारत यात्रा को विशेष बताते हुए कहा कि ये भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर हो रही है।

काजा कल्लास ने भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने का अवसर देने के लिए आभार व्‍यक्‍त किया, विशेषकर कर्तव्य पथ पर आयोजित परेड में यूरोपीय संघ की उपस्थिति के लिए पर आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ को हिंद महासागर क्षेत्र में मिलकर काम करना चाहिए और संयुक्त अभ्यासों के माध्यम से एक-दूसरे की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों से सीखना चाहिए। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुग्राम स्थित भारतीय नौसेना के सूचना संलयन केंद्र-हिंद महासागर क्षेत्र (आईएफसी-आईओआर) में एक संपर्क अधिकारी की तैनाती के यूरोपीय संघ के प्रस्ताव का स्वागत किया। आईएफसी-आईओआर में यूरोपीय संघ के संपर्क अधिकारी की तैनाती से समुद्री डकैती रोधी अभियानों तथा हिंद महासागर क्षेत्र में खतरों के आकलन के संदर्भ में भारतीय नौसेना के साथ परिचालन समन्वय को और अधिक सुदृढ़़ किया जा सकेगा।

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