रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और फ्रांस की सशस्त्र सेना और वयोवृद्ध मामलों की मंत्री कैथरीन वाउटरिन ने 17 फरवरी 2026 को कर्नाटक के बेंगलुरू में आयोजित छठे भारत-फ्रांस वार्षिक रक्षा वार्ता की सह-अध्यक्षता की। दोनों मंत्रियों ने द्विपक्षीय सुरक्षा और रक्षा से जुड़े अनेक मुद्दों पर चर्चा की, जिनमें उपकरणों के सह-विकास एवं सह-उत्पादन के प्राथमिक क्षेत्र शामिल थे। उन्होंने विशेषकर बेहतरीन प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में रक्षा साझेदारी को और सुदृढ़ करने तथा दोनों देशों के उद्योगों को आपस में जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
दोनों मंत्रियों ने रणनीतिक साझेदारी के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में सेना-से-सेना सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उल्लेख किया कि हालिया भारत-यूरोपीय संघ सुरक्षा और रक्षा साझेदारी सामूहिक सहभागिता को और अधिक गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। दोनों मंत्रियों ने इस ढांचे का उपयोग द्विपक्षीय स्तर पर तथा व्यापक यूरोपीय संदर्भ में करने पर भी सहमति व्यक्त की, ताकि ठोस परिणाम हासिल किए जा सके, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता सुदृढ़ हो, संयुक्त क्षमताओं में वृद्धि हो और भारत-फ्रांस के स्थायी रणनीतिक समन्वय को और अधिक मजबूती मिले।
दोनों देशों ने भारतीय सेना और फ्रांसीसी थल सेना प्रतिष्ठान में अधिकारियों की पारस्परिक तैनाती की घोषणा की। इसके साथ ही 10 वर्षों के रक्षा सहयोग समझौते के नवीनीकरण पर भारतीय पक्ष की ओर से रक्षा सचिव तथा फ्रांसीसी पक्ष की ओर से अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं रणनीति के उप महानिदेशक ने हस्ताक्षर किए गए।
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) के प्रबंध निदेशक और सैफरान इलेक्ट्रॉनिक्स एंड डिफेंस के कार्यकारी उपाध्यक्ष के बीच भारत में हैमर मिसाइलों के निर्माण के लिए संयुक्त उद्यम स्थापित करने हेतु समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
कैथरीन वाउटरिन को फ्रांस की रक्षा मंत्री का पदभार संभालने पर बधाई देते हुए और भारत की उनकी पहली यात्रा पर उनका स्वागत करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि वॉट्रिन का कार्यकाल यूरोप और वैश्विक सुरक्षा के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण समय में शुरू हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत, रणनीतिक स्वायत्तता तथा सुदृढ़ यूरोपीय रक्षा दृष्टिकोण के प्रति फ्रांस की अटल प्रतिबद्धता की गहराई से सराहना करता है। फ्रांसीसी रक्षा मंत्री ने सेना के साथ होने वाले ‘अभ्यास शक्ति’ को द्वि-वार्षिक से वार्षिक आयोजन में बदले जाने की सराहना की।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बात पर बल दिया कि भारत हिंद-महासागर क्षेत्र के देशों के लिए ‘प्रथम प्रत्युत्तरदाता (First Responder)’ और ‘मूल सुरक्षा प्रदाता (Net Security Provider)’ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत इन देशों की क्षमताओं को सुदृढ़ करने तथा किसी भी प्रतिकूल चुनौती से निपटने में सहायता प्रदान के लिए रक्षा, सुरक्षा और समुद्री क्षेत्रों में सदैव सहयोग प्रदान करता रहा है।
आतंकवाद के मुद्दे पर, राजनाथ सिंह ने कहा कि पाकिस्तान का सीमा-पार आतंकवाद को बढ़ावा देने, संरक्षण देने और प्रोत्साहित करने का एक लंबा इतिहास रहा है, जिसका उद्देश्य भारत में अशांति और हिंसा फैलाना है।, इससे क्षेत्र में शांति के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
वार्षिक रक्षा संवाद एक मंत्री-स्तरीय द्विपक्षीय बैठक है जिसका उद्देश्य रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग की समीक्षा करने और उसे दिशा देना है। बैठक से पूर्व, भारत आगमन पर फ्रांस की रक्षा मंत्री कैथरीन वाउटरिन को एचएएल एयरपोर्ट पर गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया।
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