रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह 14-15 अप्रैल, 2025 को आधिकारिक यात्रा पर इटली में रोम पहुंचे। रक्षा सचिव ने इस यात्रा की शुरुआत इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो से भेंट करके की। बैठक के दौरान, दोनों पक्षों ने भारत व इटली के बीच रणनीतिक साझेदारी के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में रक्षा सहयोग को और विस्तार देने के उद्देश्य से उपयोगी चर्चा की।
अपनी यात्रा के दौरान, राजेश कुमार सिंह ने इटली की रक्षा महासचिव लुइसा रिकार्डी के साथ 11वीं भारत-इटली वार्षिक द्विपक्षीय संयुक्त रक्षा समिति की बैठक की सह-अध्यक्षता की। उन्होंने रक्षा, सुरक्षा और औद्योगिक सहयोग के मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की, जिसमें भारत व इटली के बीच समुद्री सहयोग तथा सूचना साझा करने की प्रक्रिया शामिल थी। इस सन्दर्भ में ट्रांस रीजनल मैरीटाइम नेटवर्क पर काफी जोर दिया गया। चर्चा के दौरान लाल सागर और पश्चिमी हिंद महासागर क्षेत्र की स्थिति पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया गया।
रक्षा सचिव ने विशेष रूप से प्रौद्योगिकी और शस्त्र उत्पादन में घनिष्ठ रक्षा सहयोग पर बल दिया, जो भारत के लिए प्राथमिकता वाला क्षेत्र है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार सचेत नीतिगत कार्यक्रमों के माध्यम से देश के भीतर रक्षा उत्पादन एवं नवाचार के लिए सक्रिय रूप से एक इकोसिस्टम का निर्माण कर रही है। इसके लिए भारत ने एक जीवंत नवाचार और औद्योगिक इकोसिस्टम विकसित किया है।
राजेश कुमार सिंह ने भारत-इटली रक्षा उद्योग गोलमेज सम्मेलन के दौरान अपने मुख्य भाषण में कई महत्वपूर्ण विचार साझा किए। उन्होंने यह भी बताया कि किस प्रकार से भारतीय रक्षा उद्योग में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं, विशेष रूप से उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में प्रगतिशील सुधारों के माध्यम से हुए बदलावों का उल्लेख किया। राजेश कुमार सिंह ने कहा कि इन सुधारों से पारदर्शिता, पूर्वानुमेयता और कारोबार में आसानी के माध्यम से भारतीय उद्योग के विकास के लिए अनुकूल वातावरण का सृजन हुआ है।
इस अवसर पाए सोसायटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (एसआईडीएम) और फेडरेशन ऑफ इटालियन कंपनीज फॉर एयरोस्पेस, डिफेंस एंड सिक्योरिटी (एआईएडी) के बीच एक समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए गए, जो दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच घनिष्ठ सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
रक्षा सचिव के साथ रक्षा मंत्रालय का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी इटली आया था, जिसमें सेवा मुख्यालय, रक्षा विभाग और रक्षा उत्पादन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। भारतीय और इतालवी रक्षा उद्योगों के बीच घनिष्ठ बी2बी संबंधों को बढ़ावा देने के लिए एसआईडीएम का एक बड़ा उद्योग प्रतिनिधिमंडल भी रक्षा सचिव के साथ पहुंचा था।
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