दिल्ली उच्च न्यायालय ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। अदालत ने उन्हें विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष सुनवाई के नतीजे का इंतजार करने और शिकायतें कायम रहने पर अपीलीय अदालत जाने को कहा। न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए स्पष्ट किया कि अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
न्यायमूर्ति प्रसाद ने कहा कि शांति बनाए रखने के बंधपत्र के कथित उल्लंघन के बार-बार सामने आने के मामले में संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत दायर रिट याचिका उचित उपाय नहीं है। विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष सुनवाई में नए जमानत-पत्र पेश करने का मामला विचाराधीन है।
सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर में कथित तौर पर प्रवेश करने के बाद हिरासत में लिया गया था। जंतर-मंतर को निर्धारित विरोध प्रदर्शन स्थल की अधिसूचित सूची से हटाया जा चुका था। इसके बाद दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।





