केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष विभाग राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन से हैदराबाद में कॉसमोसर्व स्पेस की बेस-1 सुविधा के उद्घाटन समारोह को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि भारत अंतरिक्ष से मलबा हटाने के क्षेत्र में विश्व के अग्रणी देशों में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि एक भारतीय स्टार्टअप बाह्य अंतरिक्ष को अधिक सुरक्षित और संधारणीय बनाने के लिए प्रौद्योगिकी विकसित करने की दिशा में कार्यरत है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने वर्ष 2030 तक अंतरिक्ष को मलबा-मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित करते हुए कहा कि सक्रिय अंतरिक्ष मलबा हटाने के क्षेत्र में भारत की उभरती क्षमताएं अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में देश के बढ़ते वैश्विक नेतृत्व और संपूर्ण मानवता के लिए सुरक्षित अंतरिक्ष वातावरण सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दर्शाती है।
हैदराबाद के गाचीबावली स्थित वीएसडी टेक पार्क में आयोजित उद्घाटन समारोह में तेलंगाना के सूचना प्रौद्योगिकी एवं उद्योग मंत्री डी. श्रीधर बाबू विशिष्ट अतिथि के रुप में और कॉसमोसर्व स्पेस के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. चिरंजीवी फणींद्र मौजूद थे। डॉ. जितेंद्र सिंह कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस सुविधा के उद्घाटन पर कॉसमोसर्व स्पेस को बधाई देते हुए कहा कि बेस-1 लगभग 14,800 वर्ग फुट में फैली व्यापक और अत्याधुनिक सुविधा है। यहां अंतरिक्ष रोबोट का डिजाइन और निर्माण, अंतरिक्ष जैसी परिस्थितियों में उनका परीक्षण और मिशन नियंत्रण केंद्र के माध्यम से उनका संचालन किया जाता है। इस सुविधा में अंतरिक्ष में दो अंतरिक्ष यानों या उपग्रहों को एक दूसरे के करीब लाने और फिर उन्हें आपस में जोड़ने या थामने की जटिल प्रक्रियाओं का अनुकरण और परीक्षण किया जाता है। इस केंद्र में अंतरिक्ष रोबोटिक्स नवाचार प्रयोगशालाएं, सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण अनुकरण प्लेटफॉर्म और उपग्रह एकीकरण के लिए क्लीन रूम जैसी विशिष्ट सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह भारत की निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की क्षमताओं में महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतीक है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने सक्रिय अंतरिक्ष मलबा निष्कासन और कक्षा में ही अंतरिक्ष सेवाएं प्रदान करने के क्षेत्र में अग्रणी कार्य के लिए डॉ. चिरंजीवी फणींद्र और उनकी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि मिशन एम्ब्रेस ने कंपनी की स्थापना के एक वर्ष के भीतर जुलाई 2026 में अंतरिक्ष में सॉफ्ट रोबोटिक पंखुड़ियों का परीक्षण किया, जो भारत के निजी अंतरिक्ष स्टार्टअप की तीव्र प्रगति और बढ़ती तकनीकी परिपक्वता को दर्शाता है। अंतरिक्ष में निष्क्रिय हो चुके पुराने उपग्रह और रॉकेट के टुकड़े बहुत तेज गति से चक्कर काटते हैं। ये सभी सक्रिय उपग्रह और अंतरिक्ष स्टेशनों के लिए बड़ा खतरा होते हैं। मिशन एम्ब्रेस के तहत इस्तेमाल होने वाली रोबोटिक आर्म जैसी तकनीकें इन मलबों को पकड़कर नष्ट करने या सुरक्षित कक्षा में भेजने में मदद करेंगी। डॉ. सिंह इस बात की सराहना की कि इस टीम ने इसरो और गगनयान कार्यक्रम में प्राप्त अपने अनुभव को निजी क्षेत्र में सहयोगात्मक मॉडल के रूप में आगे बढ़ाया है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि कॉसमोसर्व स्पेस की उपग्रह प्रणालियों के लिए पिक्सेल, प्रणोदन प्रणालियों के लिए ध्रुव एयरोस्पेस नीदरलैंड्स और प्रक्षेपण सेवाओं के लिए स्काईरूट एयरोस्पेस के साथ साझेदारियां अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में पूर्ण समाधान के सहयोग की उभरती संस्कृति को दर्शाती हैं। यह पहल दिखाती है कि भारतीय स्टार्टअप स्वदेशी पेलोड, बैटरी प्रौद्योगिकियों, उपग्रह प्रणालियों और निजी प्रक्षेपण क्षमताओं को साथ लाकर एकीकृत अंतरिक्ष मिशन विकसित कर रहे हैं और इसमें वैश्विक मानक स्थापित कर रहे हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के परिवर्तनकारी अंतरिक्ष सुधारों को भारत की अपार क्षमता साकार करने का श्रेय देते हुए कहा कि लगभग पांच से छह वर्ष पहले आरंभ हुई इस यात्रा और उसके बाद न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड तथा भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र की स्थापना ने देश के अंतरिक्ष पारितंत्र को बुनियादी रूप से बदल कर रख दिया है। उन्होंने कहा कि भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था बढ़कर लगभग 9 अरब डॉलर तक पहुंच गई है और आगामी दशक में इसके 40–45 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। देश का अंतरिक्ष स्टार्टअप इकोसिस्टम भी एकल अंक से बढ़कर अब लगभग 450 उद्यमों तक विस्तारित हो गया है।
डॉ. सिंह ने कहा कि भारत में वैज्ञानिक प्रतिभा या तकनीकी क्षमताओं की कभी कमी नहीं रही है। आवश्यकता केवल ऐसे अनुकूल पारितंत्र की थी, जो देश के युवाओं की अपार क्षमता सामने ला सके। उन्होंने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों से अंतरिक्ष क्षेत्र में अधिक सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने नवाचार को गति देने, सहयोग सुदृढ़ बनाने और उभरती प्रौद्योगिकियों को समर्थन देने के लिए विज्ञान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में लोक कल्याणकारी योगदान बढ़ाने का आग्रह किया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत का अंतिम उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय साझेदारियों के साथ ही तकनीकी आत्मनिर्भरता और स्वयं की क्षमता हासिल करना है। उन्होंने कहा कि चंद्रयान और गगनयान कार्यक्रमों में भारत की उपलब्धियां दर्शाती हैं कि देश काफी कम लागत पर जटिल और अत्याधुनिक अंतरिक्ष अभियान सफलतापूर्वक पूरी करने में सक्षम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की अंतरिक्ष क्षमताएं गति शक्ति, स्मार्ट सिटी, आपदा तैयारी और ऐसे कई अन्य क्षेत्रों में अनुप्रयोगों द्वारा पृथ्वी पर जीवन बेहतर बना रही और आम लोगों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है।
केंद्रीय अंतरिक्ष मंत्री ने कहा कि कॉसमोसर्व स्पेस की यह पहल विश्व बंधु भारत की भावना को साकार बनाती है। इसके द्वारा अंतरिक्ष की संधारणीयता एवं दीर्घकालिक सुरक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता राष्ट्रीय सीमाओं से परे संपूर्ण मानवता के हित में विस्तारित हो रही है। उन्होंने स्वच्छ और सुरक्षित अंतरिक्ष वातावरण के निर्माण में योगदान देने के लिए कॉसमोसर्व स्पेस की टीम को बधाई दी और कहा कि इस तरह की पहल अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में भारत के वैश्विक नेतृत्व को और सुदृढ़ बनाने के साथ ही देश की वैश्विक प्रतिष्ठा भी बढ़ाएगी।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने व्यक्तिगत रूप से इस केंद्र का जल्द दौरा करने और कॉसमोसर्व स्पेस की टीम के साथ बातचीत करने की इच्छा व्यक्त की।
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