केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेन्द्र सिंह ने आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों के दौरान, विशेष रूप से पिछले पांच वर्षों में, उधमपुर-कठुआ-डोडा संसदीय क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इसके परिणामस्वरूप क्षेत्र के कुछ दूरदराज और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में सड़क संपर्क का लगातार विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा कि पीएमजीएसवाई की सड़क परियोजनाओं के मामले में उधमपुर लगातार देश के शीर्ष तीन जिलों में शामिल रहा है, जो इस निर्वाचन क्षेत्र में ग्रामीण संपर्क को लगातार दी जा रही प्राथमिकता को दर्शाता है।
डॉ. जितेन्द्र सिंह उधमपुर-कठुआ-डोडा-किश्तवाड़ क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में पीएमजीएसवाई-IV के वर्ष 2026-27 के बैच-I के तहत 110 सड़क परियोजनाओं की आधारशिला रखने के बाद संबोधित कर रहे थे। परियोजना विवरण के अनुसार, इन 110 सड़कों की कुल लंबाई 598.455 किलोमीटर है और इन पर 1,503.53 करोड़ रुपये खर्च की मंजूरी दी गई है। ये परियोजनाएं कठुआ, उधमपुर, रामबन, डोडा और किश्तवाड़ जिलों में फैली हुई हैं और इनसे 46,972 लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि पीएमजीएसवाई के तहत नवीनतम व्यापक पहल सड़क संपर्क को हर मौसम में अंतिम छोर तक तथा दुर्गम और दूरदराज के पहाड़ी इलाकों के गांवों और बस्तियों तक पहुंचाने की सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि नई सड़कों से ग्रामीण आवागमन व्यवस्था में और बदलाव आएगा तथा दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवनयापन और आवागमन को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि पीएमजीएसवाई के तहत सड़क संपर्क के निरंतर विस्तार से पहाड़ी क्षेत्रों में ग्रामीण आवागमन की तस्वीर बदल रही है और उन गांवों तथा बस्तियों तक हर मौसम में सड़क संपर्क खुला रहता है, जहां पहले पहुंचना कठिन था। उन्होंने कहा कि पीएमजीएसवाई के तहत तैयार किया जा रहा सड़क नेटवर्क सीधे तौर पर जीवनयापन और आवागमन को सुगम बनाने में योगदान दे रहा है तथा संसदीय क्षेत्र के सबसे दूरदराज इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए नए अवसरों के द्वार खोल रहा है।
मंत्री ने कहा कि वरिष्ठ नागरिक और स्कूल जाने वाले बच्चे उन वर्गों में शामिल थे, जिन्हें इससे पहले काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। विशेष रूप से बरसात के मौसम में सड़क खराब होने के कारण आवागमन अक्सर मुश्किल हो जाता था और कई बार लोग अपने कार्यस्थलों, स्कूलों तथा अन्य आवश्यक स्थानों तक पहुंच भी नहीं पाते थे। अब सड़क नेटवर्क के विस्तार से इस लंबे समय से चली आ रही कठिनाई को दूर करने में मदद मिल रही है तथा आवश्यक सेवाएं और अवसर ग्रामीण समुदायों के और करीब पहुंच रहे हैं।
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि दूरदराज के गांवों में रहने वाली महिलाएं भी नए सड़क संपर्क के लाभों का अनुभव कर रही हैं। बेहतर सड़कें स्कूलों, स्वास्थ्य सेवाओं, बाजारों, कार्यस्थलों और अन्य आवश्यक सुविधाओं तक आसान पहुंच उपलब्ध करा रही हैं। उन्होंने कहा कि पहले दुर्गम रहे गांवों तक सड़क नेटवर्क के विस्तार से पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं और परिवारों के लिए एक नया आवागमन नेटवर्क तैयार हो रहा है, जिसका उनके दैनिक जीवन पर सीधा सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
मंत्री ने कहा कि इन दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में संपर्क व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण सुरक्षा आयाम भी है। अतीत में कुछ दूरदराज और चुनौतीपूर्ण इलाकों में सुरक्षा की दृष्टि से कठिनाइयां रही हैं और ये क्षेत्र उग्रवादियों तथा आतंकवादियों की आवाजाही के लिहाज से भी संवेदनशील रहे हैं। बेहतर सड़क संपर्क से ऐसे क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की आवाजाही अधिक सुगम और तेज होगी तथा उग्रवाद-रोधी और आतंकवाद-रोधी अभियानों के संचालन को मजबूती मिलेगी। साथ ही, इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक विकास के लाभ भी अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेंगे।
परियोजनाओं का जिलावार विवरण देते हुए डॉ. जितेन्द्र सिंह ने बताया कि कठुआ में 24 सड़क परियोजनाएं हैं, जिनकी कुल लंबाई 128.925 किलोमीटर है और जिनकी स्वीकृत लागत लगभग 307.12 करोड़ रुपये है। उधमपुर में 44 परियोजनाएं हैं, जिनकी कुल लंबाई 235.040 किलोमीटर है और इनकी स्वीकृत लागत लगभग 554.90 करोड़ रुपये है। रामबन में 13 परियोजनाएं 60.360 किलोमीटर लंबी हैं, जिनकी स्वीकृत लागत लगभग 154.97 करोड़ रुपये है। वहीं, डोडा में 13 परियोजनाएं 90.180 किलोमीटर लंबी हैं, जिनकी स्वीकृत लागत लगभग 260.66 करोड़ रुपये है। किश्तवाड़ में 16 परियोजनाएं 83.950 किलोमीटर लंबी हैं और इनकी स्वीकृत लागत लगभग 224.88 करोड़ रुपये है।
इन परियोजनाओं की एक उल्लेखनीय विशेषता यह है कि बड़ी संख्या में कार्यों में सड़क निर्माण के दौरान प्लास्टिक कचरे का उपयोग किया गया है। परियोजना विवरण में कई सड़क पैकेजों के तहत प्लास्टिक कचरे के उपयोग का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। इससे ग्रामीण सड़क संपर्क को मजबूत करने के उद्देश्य को अधिक टिकाऊ सड़क निर्माण की पद्धतियों के साथ जोड़ा जा रहा है।
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि संसदीय क्षेत्र में पीएमजीएसवाई के तहत सड़क संपर्क के निरंतर विस्तार से यह प्रतिबिंबित होता है कि सरकार विकास के लाभों को अंतिम छोर तक और सबसे दूरदराज की बस्तियों तक पहुंचाने पर लगातार ध्यान केन्द्रित कर रही है। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं के नवीनतम पैकेज से पूरे संसदीय क्षेत्र और आसपास के पहाड़ी इलाकों में सड़क नेटवर्क और अधिक मजबूत होगा।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष मई में भी उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया था कि जम्मू-कश्मीर के लिए पीएमजीएसवाई के कुल आवंटन का लगभग 43 प्रतिशत हिस्सा उधमपुर-कठुआ-डोडा संसदीय क्षेत्र को दिया गया है। केन्द्र शासित प्रदेश के लिए 3,566 करोड़ रुपये के कुल आवंटन में से 1,524 करोड़ रुपये इस संसदीय क्षेत्र के लिए निर्धारित किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण सड़कों पर निरंतर ध्यान ऐसे संसदीय क्षेत्र में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहां बड़ी संख्या में गांव खड़ी ढलानों, दूरदराज और भौगोलिक रूप से दुर्गम क्षेत्रों में स्थित हैं। बेहतर सड़कें न केवल यात्रा के समय और आवागमन की कठिनाइयों को कम कर रही हैं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, बाजारों, रोजगार तथा अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच को भी मजबूत कर रही हैं।
मंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक के दौरान संपर्क व्यवस्था में आए बदलाव ने यह प्रदर्शित किया है कि बुनियादी ढांचा किस प्रकार सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण का माध्यम बन सकता है, विशेष रूप से दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों के लिए। प्रत्येक नई सड़क के किसी अन्य दूरदराज की बस्ती तक पहुंचने के साथ इन समुदायों और विकास की मुख्यधारा के बीच की दूरी कम हो रही है।
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि सरकार का ध्यान अंतिम छोर तक संपर्क व्यवस्था को मजबूत करने पर लगातार केन्द्रित रहेगा, ताकि दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां विकास, आवागमन या अवसरों तक पहुंच में बाधा न बनें। उन्होंने कहा कि पीएमजीएसवाई के विस्तारित सड़क नेटवर्क से क्षेत्र की विकास संबंधी आवश्यकताओं के साथ-साथ सामरिक जरूरतों को भी पूरा करने में निरंतर मदद मिलेगी।
जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि जम्मू-कश्मीर मजबूती से विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है और उन्होंने निरंतर परिवर्तन के इस दौर का हिस्सा बनने को सौभाग्य बताया। उन्होंने कहा कि जनता द्वारा उठाए गए मुद्दों और चिंताओं का पर्याप्त समाधान किया जाएगा तथा आश्वासन दिया कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि विकास का लाभ केन्द्र शासित प्रदेश के प्रत्येक हिस्से तक पहुंचे।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क परियोजनाओं के क्रियान्वयन में लगे ठेकेदारों को निर्धारित मानकों के अनुसार कार्य करना अनिवार्य है और निर्माण की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बोली और निविदा प्रक्रियाएं उच्च मानकों के अनुरूप की जा रही हैं तथा कार्यों के निष्पादन में किसी भी प्रकार की कमी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस अवसर पर उपस्थित विधायकों में राजीव जसरोटिया, बलवंत सिंह मनकोटिया, पवन कुमार गुप्ता, साजिद शाहीन, डॉ. सुनील भारद्वाज, अर्जुन सिंह राजू, प्यारे लाल शर्मा, रणबीर सिंह पठानिया, दर्शन कुमार और सतीश कुमार शर्मा शामिल थे। विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों से संबंधित विभिन्न मुद्दों और चिंताओं को उठाया, विशेष रूप से सड़क संपर्क और विकास से जुड़े विषयों को प्रमुखता से सामने रखा।
डॉ. जितेन्द्र सिंह और उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने विधायकों को आश्वासन दिया कि उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों और चिंताओं पर शीघ्र कार्रवाई की जाएगी तथा संबंधित क्षेत्रों में विकास कार्यों में तेजी लाने और संपर्क व्यवस्था में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
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