भारतीय रेलवे ने वित्त वर्ष 2025-26 में व्यापक और महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है, जिसमें माल ढुलाई, यात्री सेवाओं, अवसंरचना विकास, सुरक्षा प्रणालियों, डिजिटल कार्यक्रमों तथा प्रौद्योगिकी एवं विनिर्माण में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां शामिल हैं। ये उपलब्धियां आर्थिक गतिविधियों को गति देने, देशव्यापी संपर्क को सशक्त बनाने और सुगम एवं कुशल आवागमन सुनिश्चित करने में रेलवे की केंद्रीय भूमिका को उजागर करती हैं।
रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय रेलवे की अभूतपूर्व प्रगति की जानकारी दी है। उन्होंने माल ढुलाई और यात्री परिवहन में रिकॉर्ड प्रदर्शन, नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों सहित वंदे भारत सेवाओं के विस्तार, दुर्घटनाओं में कमी के साथ उन्नत प्रणालियों के माध्यम से सुरक्षा में ऐतिहासिक सुधार तथा स्टेशन और टर्मिनल अवसंरचना को सुदृढ़ बनाने जैसे प्रमुख पहलुओं का जिक्र किया है। इन प्रयासों से देशभर में रेल संपर्क व्यवस्था उन्नत हुई है और यात्रियों के समग्र अनुभव में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
वर्ष भर रेल परिचालन सुचारू रूप से चलता रहा, प्रतिदिन लगभग 25,000 ट्रेनें संचालित हुईं, जिससे व्यापक संपर्क सुनिश्चित हुआ। यात्रियों की मांग बढ़ने पर अतिरिक्त विशेष रेल सेवाएं शुरू की गईं, जिससे यात्रा में सुविधा और सुगमता में सुधार हुआ।
माल ढुलाई ने ऐतिहासिक ऊंचाई हासिल करते हुए इस वर्ष 1,670 मिलियन टन की रिकॉर्ड लोडिंग दर्ज की। यह उल्लेखनीय बढ़ोतरी भारतीय रेलवे की कोयला, सीमेंट, उर्वरक और खाद्यान्न जैसी प्रमुख वस्तुओं को कुशलतापूर्वक परिवहन करने की क्षमता को दर्शाती है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं की निरंतरता एवं मजबूती सुनिश्चित होती है।
भारतीय रेलवे ने विनिर्माण क्षेत्र में 1,674 लोकोमोटिव का उत्पादन करके अपने ‘मेक इन इंडिया’ प्रयासों को और बढ़ाया है। यात्री के लिए रोलिंग स्टॉक का आधुनिकीकरण भी जारी है, जिसके तहत 6,677 एलएचबी कोचों का निर्माण किया गया, जिससे यात्रा अधिक सुरक्षित व आरामदायक हो गई।
वंदे भारत स्लीपर रेलगाड़ियों की शुरुआत से यात्री सेवाओं में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, जिससे वंदे भारत और अमृत भारत ट्रेनों के मौजूदा बेड़े का विस्तार हुआ है। ये सेवाएं विशेष रूप से लंबी दूरी की यात्राओं के लिए तेज, आधुनिक और अधिक यात्री-अनुकूल विकल्प प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
स्वदेशी कवच स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली के विस्तार के साथ सुरक्षा पहलों को उल्लेखनीय गति मिली है। इसे अब 3,100 किलोमीटर से अधिक मार्गों पर चालू किया जा चुका है, जबकि अतिरिक्त 24,400 किलोमीटर मार्गों पर इसका कार्यान्वयन प्रगति पर है। यह प्रौद्योगिकी-आधारित प्रणाली दुर्घटनाओं की रोकथाम और समग्र परिचालन सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
डिजिटल परिवर्तन भारतीय रेलवे के लिए एक प्रमुख फोकस क्षेत्र बना रहा। जुलाई 2025 में रेलवन ऐप के शुरू होने से यात्रियों को टिकट बुकिंग, ट्रेन संबंधी जानकारी और शिकायत निवारण के लिए एक एकीकृत एवं सुविधाजनक मंच प्रदान हुआ है। इसके साथ ही, टिकटिंग प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए किए गए निरंतर प्रयासों के तहत 3.04 करोड़ से अधिक संदिग्ध उपयोगकर्ता खातों को हटाया गया, जिससे रेलवे सेवाओं तक निष्पक्ष और समान पहुंच को बढ़ावा मिला है।
35 गति शक्ति कार्गो टर्मिनलों के संचालन के साथ अवसंरचना विकास को नई गति मिली है, जिससे लॉजिस्टिक्स दक्षता और मल्टी-मोडल एकीकरण में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इसके अतिरिक्त, अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 119 स्टेशनों का पुनर्विकास किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप आधुनिक सुविधाएं विकसित हुई हैं और यात्रियों के समग्र अनुभव में उल्लेखनीय सुधार आया है।
रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। बैराबी–सैरांग रेल लाइन के माध्यम से आइजोल तक रेल संपर्क का विस्तार हुआ है, जिससे पूर्वोत्तर क्षेत्र में रेलवे नेटवर्क और अधिक सुदृढ़ हुआ है। साथ ही, प्रमुख पुल निर्माण परियोजनाओं ने जम्मू-कश्मीर के लिए हर मौसम में निर्बाध रेल संपर्क सुविधा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
ये उपलब्धियां क्षमता विस्तार, आधुनिकीकरण, सुरक्षा संवर्धन और समावेशी विकास पर भारतीय रेलवे के निरंतर फोकस को स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं। इस तरह से आगे बढ़ते हुए रेलवे एक विकसित भारत की परिकल्पना के अनुरूप अधिक कुशल, प्रौद्योगिकी-आधारित और यात्री-केंद्रित रेल नेटवर्क के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है।
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