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भारतीय खाद्य निगम ने वैश्विक भुखमरी से निपटने के लिए विश्व खाद्य कार्यक्रम के साथ चावल आपूर्ति का महत्‍वपूर्ण समझौता किया

भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) ने भूख से लड़ने के उद्देश्य से संचालित वैश्विक मानवीय अभियानों के समर्थन में चावल की आपूर्ति के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया है।

समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर भारत सरकार की ओर से भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक रवींद्र कुमार अग्रवाल तथा विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) के उप-कार्यकारी निदेशक कार्ल स्काउ ने खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए। समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत, एफसीआई डब्ल्यूएफपी को 2,00,000 मीट्रिक टन चावल(अधिकतम 25% टूटा हुआ) की आपूर्ति करेगा। यह एमओयू हस्ताक्षर की तिथि से पांच वर्ष की अवधि तक वैध रहेगा और पारस्परिक सहमति से इसे आगे बढ़ाया जा सकता है। मूल्य का निर्धारण प्रतिवर्ष पारस्परिक सहमति से किया जाएगा, जिसमें वर्तमान मूल्य 31 मार्च 2026 तक 2,800 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग में सचिव संजीव चोपड़ा ने कहा: “डब्ल्यूएफपी के साथ साझेदारी के माध्यम से हम भूख से जूझ रहे लोगों तक आशा, पोषण और सम्मान पहुंचा रहे हैं। यह समझौता यह दर्शाता है कि भारत किसी को भी भूखा न रहने देने के अपने संकल्प पर दृढ़ है। कुपोषण और खाद्य असुरक्षा से निपटने के लिए भारत अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर आगे भी खड़ा रहेगा।”

संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम के उप-कार्यकारी निदेशक कार्ल स्काउ ने कहा: “भारत के साथ यह समझौता वैश्विक भूख से लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। भारत के सहयोग से डब्ल्यूएफपी (WFP) को अगले पांच वर्षों में कमजोर आबादी तक पोषक भोजन अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में मदद मिलेगी। एक प्रमुख कृषि राष्ट्र और वैश्विक एकजुटता के समर्थक के रूप में, भारत हमें ‘शून्य भूख’ के लक्ष्य को ठोस कार्रवाई में बदलने के लिए प्रेरित करता है। इस परिवर्तनकारी साझेदारी के लिए मैं भारत को धन्यवाद देता हूं।”

यह साझेदारी वैश्विक खाद्य सुरक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ करती है, विश्व भर में मानवीय जरूरतों को पूरा करने में डब्ल्यूएफपी के साथ सहयोग को मजबूत करती है तथा वैश्विक खाद्य प्रणालियों में एक विश्वसनीय और जिम्मेदार योगदानकर्ता के रूप में भारत की भूमिका को मज़बूती प्रदान करती है।

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