संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) के तत्वावधान में दक्षिण-दक्षिण सहयोग के लिए अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार केंद्र (इंटरनेशनल साइंस टेक्नोलॉजी इनिशिएटिव सेंटर- आईएसटी आईसी), वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआई, नई दिल्ली ) के घटकों, पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी एकक (सी एसआईआर –टीकेडीएल यूनिट) तथा सीएसआईआर-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी (सीएसआईआर-आईआईसीटी), हैदराबाद के साथ मिलकर भारत 29-31 जुलाई 2024 से नई दिल्ली, में “स्थायी आजीविका के लिए पारंपरिक ज्ञान” पर पहला विज्ञान प्रौद्योगिकी पहल सम्मेलन (एसटीआई कॉन्क्लेव) का आयोजन किया जा रहा है।
अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) की सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी ने पहले एसटीआई कॉन्क्लेव का उद्घाटन किया। सम्माननीय अतिथि सीएसआईआर-आईआईसीटी, हैदराबाद के निदेशक डॉ. डी. श्रीनिवास रेड्डी और नई दिल्ली में यूनेस्को प्राकृतिक विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. बेन्नो बोअर थे। पूर्ण व्याख्यान ट्रांस-डिसिप्लिनरी यूनिवर्सिटी (टीडीयू), बेंगलुरु के संस्थापक और कुलपति प्रोफेसर अनंत दर्शन शंकर द्वारा दिया गया था।
तीन दिवसीय इस सम्मेलन (कॉन्क्लेव) में दक्षिण-दक्षिण सहयोग के अलावा जैव विविधता, पारंपरिक सांस्कृतिक अभिव्यक्ति, एकीकृत स्वास्थ्य और अनुसंधान, परम्परागत ज्ञान (ट्रेडिशनल नॉलेज –टीके), आईपीआर और संबंधित मामलों पर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय नीतियों जैसे विभिन्न विषयों पर भारत के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित वक्ता शामिल हुए हैं। आईएसटीआईसी -यूनेस्को टीम का नेतृत्व प्रशासनिक परिषद (गवर्निंग काउंसिल) के अध्यक्ष प्रो. मोहम्मद बसयारुद्दीन अब्दुल रहमान और संगठन के निदेशक डॉ. शारिज़ाद दहलान ने किया। सीएसआईआर की ओर से, सीएसआईआर-टीकेडीएल यूनिट के प्रमुख डॉ. विश्वजननी जे सत्तीगेरी और सीएसआईआर-आईआईसीटी के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. डी. शैलजा ने भारत में कॉन्क्लेव के आयोजन के प्रयासों का नेतृत्व किया।
इस अवसर पर अपने संबोधन डॉ. कलैसेल्वी ने कहा कि एसटीआई कॉन्क्लेव एक ऐसे विषय को लक्षित करता है जो यह देखते हुए समय की मांग है कि जीवन की स्थिरता दुनिया भर में बढ़ती चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि कॉन्क्लेव हमारे पूर्वजों से विरासत में मिले ज्ञान और प्रथाओं के महत्व और मूल्य के बारे में अगली पीढ़ी के युवाओं के बीच जागरूकता लाने के लिए एक मंच प्रदान करता है। यह कहते हुए कि आधुनिकता हमेशा हमारे पारंपरिक ज्ञान के बुनियादी सिद्धांतों से जुड़ी होती है, उन्होंने स्वीकार किया कि यह कॉन्क्लेव परंपराओं और आधुनिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को एक साथ लाने के महत्व को सही ढंग से फैलाता है।
सीएसआईआर-आईआईसीटी के निदेशक डॉ. श्रीनिवास रेड्डी ने सभी के लिए स्वास्थ्य देखभाल को संबोधित करने के लिए प्रभावी उपकरण के रूप में पारंपरिक दवाओं और आधुनिक एस एंड टी हस्तक्षेपों के सत्यापन, नवाचार और एकीकरण से संबंधित सीएसआईआर की गतिविधियों पर प्रकाश डाला।
डॉ. बेन्नो बोअर ने शिक्षा, विज्ञान और संस्कृति के माध्यम से स्थिरता के तीन महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से बताया और कहा कि कैसे यूनेस्को लोगों और इस ग्रह को सशक्त बनाने के लिए सहयोग और सहभागिता लेकर आता है। उन्होंने कहा कि टिकाऊ जीवन जीने के लिए प्रकृति का सम्मान करना और उसके साथ सामंजस्य बनाकर रहना महत्वपूर्ण है। उन्होंने जैव विविधता क्षेत्रों और लिंक्स (एलआईएनकेएस) कार्यक्रमों से संबंधित यूनेस्को के ऐसे प्लेटफार्मों के बारे में भी बात की, जो प्रकृति और इस प्रकार आजीविका के संरक्षण के लिए स्थानीय ज्ञान प्रणालियों के अर्थ को तलाशने और समझने की आवश्यकता को दोहराते हैं।
कॉन्क्लेव में प्रतिभागियों के बीच “पारंपरिक ज्ञान (टीके) – बौद्धिक संपदा (आईपी) और लोगों के अधिकारों के डिजिटलीकरण, संरक्षण एवं सुरक्षा में दक्षताओं को सुदृढ़ करना (स्ट्रेंथेनिंग कम्पीटेंसीज इन डिजीटाईजेशन, पर्जेर्वेशन एंड प्रोटेक्शन ऑफ़ ट्रेडीशनल नॉलेज [टीके]-इन्टेलेक्चुअल प्रॉपर्टीज [आईपी] एंड पीपुल्स राइट्स [पीआर] ) ” विषय के अंतर्गत शैक्षणिक और व्यावसायिक क्षमताओं को बढ़ावा देने और बढ़ाने की परिकल्पना की गई है। जिससे कि अपने-अपने देशों में पारंपरिक ज्ञान (टीके) से संबंधित चुनौतियों पर जानकारी के आदान-प्रदान के लिए मंच मिले और प्रतिभागी पारम्परिक ज्ञान की सुरक्षा के लिए \ अन्य लोगों द्वारा अपनाई जा रही सर्वोत्तम प्रथाओं को जान सकें । प्रतिभागी इंडोनेशिया, फिलीपींस, नेपाल, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, केन्या, मलेशिया और भारत से हैं। कॉन्क्लेव का उद्देश्य विशेष रूप से स्थानीय ज्ञान प्रणालियों के माध्यम से टिकाऊ जीवन के माध्यम से।सहयोगात्मक शिक्षण मॉडल में संलग्न होने के महत्व पर जोर देना और क्षेत्र की विकास चुनौतियों को संबोधित करने के लिए भागीदारी और सहयोग के माध्यम से साझेदारी और नेटवर्क का विस्तार करना है ।
आईएसटीआईसी -यूनेस्को के बारे में
संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) के तत्वावधान में दक्षिण-दक्षिण सहयोग (साउथ –साउथ कोऑपरेशन) के लिए अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार केंद्र (इंटरनेशनल साइंस टेक्नोलॉजी इनिशिएटिव सेंटर- आईएसटी आईसी) दक्षिण-दक्षिण सहयोग के लिए अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार केंद्र एक यूनेस्को श्रेणी 2 केंद्र है, जिसकी मेजबानी मलेशियाई सरकार 2008 से कर रही है। केंद्र एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में कार्य करता है जो स्थायी कार्यक्रमों और । दक्षिण-दक्षिण सहयोग के लिए सतत विकास सेवाओं को प्रस्तावित करने के साथ ही उनका संवर्द्धन करता है। । केंद्र की मेजबानी विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार मंत्रालय (एमओएसटीआई) और यूनेस्को द्वारा प्रतिनिधित्व मलेशियाई सरकार के बीच छह साल के समझौते पर आधारित है। वर्तमान समझौता फरवरी 2022 से जनवरी 2028 तक लागू है। संगठन का मिशन “संस्थागत उत्कृष्टता की दिशा में समग्र प्रतिभाओं को तैयार करने और दक्षिण-दक्षिण सहयोग के लिए सतत विकास को बढ़ाने में टिकाऊ कार्यक्रमों और सेवाओं का प्रस्तुतीकरण करण करने वाला एक अग्रणी अंतरराष्ट्रीय मंच है।” इसका लक्ष्य “विज्ञान प्रौद्योगिकी नवाचार (एसटीआई) में एक वैश्विक नेता होना और विकासशील देशों के राष्ट्र-निर्माण और सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए प्रेरक शक्ति” होना है।
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