अंतर्राष्ट्रीय

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में दुनिया भर के नेताओं और बड़ी टेक कंपनियों के सीईओ ने जिम्मेदारी युक्‍त एआई नवाचार का समर्थन किया

भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का भव्‍य उद्घाटन समारोह दुनिया भर के नेताओं और बड़ी टेक कंपनियों के सीईओ की वैश्विक बैठक का साक्षी रहा। समारोह का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने किया। इस समारोह ने समिट के दौरान उत्तरदायी नवाचार, वैज्ञानिक प्रगति और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य को आकार देने में अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर ध्यान केंद्रित करने की भूमिका निर्धारित कर दी।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारत की एआई रणनीति को सर्वसुलभ, पैमाने और संप्रभुता पर आधारित बताया। उन्होंने एआई स्टैक की पांच परतों—अनुप्रयोग, मॉडल, कंप्यूट, प्रतिभा और ऊर्जा—में भारत के समग्र दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और सार्वजनिक सेवाओं में उनके वास्‍तविक कार्यान्वयन पर जोर दिया।

टाटा संस के अध्यक्ष एन. चंद्रशेखरन ने एआई को अगली बुनियादी अवसंरचना—“बुद्धिमत्ता की अवसंरचना” करार दिया, जिसकी परिवर्तनकारी क्षमता भाप इंजन, बिजली और इंटरनेट के समान है। उन्होंने भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना की उपलब्धियों को रेखांकित किया और एआई को पूर्ण स्टैक—चिप्स और प्रणालियों से लेकर ऊर्जा और अनुप्रयोग तक—में निर्मित एक रणनीतिक राष्ट्रीय क्षमता के रूप में स्थापित किया। उद्योग के लिए अपार अवसरों पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “एआई अगली बड़ी अवसंरचना है। यह बुद्धिमत्ता की अवसंरचना है। हमारा मिशन यह होना चाहिए कि एआई हर व्यक्ति और देश के हर नागरिक के लिए काम करे। हमें एआई उपकरण देश के अंतिम व्यक्ति के हाथ में और वास्तव में पृथ्वी पर हर व्यक्ति के हाथ में देने चाहिए। हम एक निर्णायक क्षण पर खड़े हैं, यह प्रचुर बुद्धिमत्ता का युग है, जहां विश्वास, संरक्षण और मानव क्षमता दुर्लभ संसाधन हैं।”

एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने 2023 में ब्लेचली पार्क में आयोजित पहले वर्ल्‍ड एआई सेफ्टी समिट के बाद से एआई की असाधारण प्रगति का उल्‍लेख करते हुए पिछले ढाई वर्षों की प्रगति को “चौंकाने वाली” बताया। उन्होंने तर्क दिया कि पिछले लगभग एक दशक से एआई त्‍वरित वृद्धि की राह पर है और तेजी से उस बिंदु के करीब पहुँच रही है, जहाँ प्रणालियाँ अधिकांश क्षेत्रों में मानव संज्ञानात्मक क्षमताओं से आगे निकल सकती हैं। उन्होंने कहा, “पिछले 10 वर्षों से एआई में त्‍वरित वृद्धि की प्रवृत्ति देखी जा रही है, और हम अब उस मोड़ पर काफी आगे बढ़ चुके हैं। हम लगातार उस स्थिति के काफी करीब पहुंच रहे हैं जिसे मैंने ‘डेटा सेंटर में प्रतिभाशाली लोगों का देश’— अतिमानव या सुपरह्यूमन की गति से समन्वय करने वाला अधिकांश इंसानों से अधिक सक्षम एआई एजेंटों का समूह -करार दिया है। उस स्तर की क्षमता रोगों का इलाज करने, अरबों लोगों को गरीबी से बाहर निकालने और एक बेहतर दुनिया बनाने के लिए अद्वितीय अवसर प्रदान करती है, लेकिन इसके साथ गंभीर जोखिम भी आते हैं। यह बेहद तेज़ी से हो रहा है, इसलिए हम कंपनियों और सरकारों को मिलकर काम करना होगा ताकि व्यवधान को प्रबंधित किया जा सके और समृद्धि को सुचारु और उत्तरदायी ढंग से साझा किया जा सके।”

गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने अपने संबोधन में वैज्ञानिक खोजों को गति प्रदान करने की एआई की क्षमता को रेखांकित करते हुए इसे “जीवनकाल का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म शिफ्ट” करार दिया। इसकी उन्होंने कहा, “एआई एक जीवनकाल का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म शिफ्ट है। हम अत्यधिक प्रगति और नई खोजों के मुहाने पर हैं, जो उभरती अर्थव्यवस्थाओं को पुराने अंतराल को पार करने में मदद कर सकती हैं। लेकिन यह परिणाम न तो निश्चित है और न ही स्वचालित। एआई को वास्तव में हर किसी के लिए सहायक बनाने के लिए, हमें इसे साहसपूर्वक अपनाना होगा, जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ना होगा और इस निर्णायक क्षण को साथ में पार करना होगा। हम डिजिटल विभाजन को एआई विभाजन बनने की अनुमति नहीं दे सकते।”

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने ग्‍लोबल साउथ में पहला एआई समिट आयोजित करने में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका का स्वागत किया और इस बात पर जोर दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भविष्य कुछ गिने-चुने देशों या निजी हितों के हाथ में नहीं छोड़ा जा सकता। उन्होंने संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा द्वारा उठाए गए दो महत्वपूर्ण कदमों: 40 वैश्विक विशेषज्ञों को शामिल करते हुए स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल का निर्माण और समावेशी, बहु-हितधारक सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए एआई गवर्नेंस पर वैश्विक संवाद की शुरुआत – को रेखांकित किया । मानव एजेंसी को सुरक्षित रखने वाले सुरक्षा उपायों की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा, “एआई का भविष्य कुछ गिने-चुने देशों द्वारा तय नहीं किया जा सकता और न ही इसे कुछ अरबपतियों की मनमर्जी पर छोड़ा जा सकता है। हमें ऐसे सुरक्षा उपायों की जरूरत है जो मानव एजेंसी, मानव निगरानी और मानव जवाबदेही को संरक्षित करें। एआई हर किसी के लिए सुलभ होनी चाहिए। यही कारण है कि मैं विकासशील देशों में बुनियादी क्षमता का निर्माण करने के लिए एआई पर एक वैश्विक कोष की मांग कर रहा हूं। वास्तविक प्रभाव का मतलब ऐसी तकनीक है जो जीवन को बेहतर बनाती है और पृथ्वी की रक्षा करती है, इसलिए आइए एआई को सभी के लिए बनाएँ, जिसमें गरिमा पूर्वनिर्धारित स्थिति के रूप में हो।”

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मुख्य भाषण देते हुए तेजी से बढ़ती तकनीकी प्रतिस्पर्धा के युग में संप्रभु, स्वतंत्र और सहयोगात्मक एआई विकास के महत्व पर जोर दिया। भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना क्रांति और वर्तमान एआई परिवर्तन के बीच समानताएँ खींचते हुए, उन्होंने एआई को भू-राजनीति, आर्थिक शक्ति और वैश्विक संतुलन को आकार देने वाला एक रणनीतिक क्षेत्र करार दिया। उन्होंने भारत और यूरोप द्वारा अपनाए गए पूरक मार्गों को रेखांकित करते हुए कहा, “सबसे स्‍मार्ट एआई वह नहीं है जो सबसे महंगा हो, बल्कि वह है जिसे सही उद्देश्य के लिए सर्वश्रेष्ठ लोगों द्वारा बनाया गया हो। एआई का भविष्य उन लोगों द्वारा बनाया जाएगा जो नवाचार और जिम्मेदारी, तकनीक और मानवता का समन्‍वय करते हैं। कोई भी देश केवल एक ऐसा बाजार बनने के लिए बाध्य नहीं है जहाँ विदेशी कंपनियाँ मॉडल बेचें और नागरिकों के डेटा को डाउनलोड करें। नवाचार, स्वतंत्रता और रणनीतिक स्वायत्तता के लिए एक मार्ग है तथा भारत और फ्रांस मिलकर इस भविष्य को आकार देने में मदद करेंगे।”

समिट के उद्घाटन सत्र में वैश्विक राजनीतिक नेताओं, बहुपक्षीय संस्थाओं और प्रौद्योगिकी के दिग्‍गजों की भागीदारी ने इस बात को रेखांकित किया कि यह समिट तेजी से बदलती और आपस में जुड़ी दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला एक निर्णायक मंच है।

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