सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण के उद्देश्य और पात्रता मानदंडों को स्पष्ट किया
केंद्र सरकार ने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के लिए आरक्षण नीति का उद्देश्य ऐसे आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्तियों को आरक्षण का लाभ प्रदान करना है, जो अनुसूचित जातियों (एससी), अनुसूचित जनजातियों (एसटी) और सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों (एसईबीसी) के लिए मौजूदा आरक्षण योजनाओं के दायरे में नहीं आते हैं।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा ने लोकसभा में विजय बघेल के प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। सदन को बताया गया कि संविधान (103वां संशोधन) अधिनियम, 2019 के तहत संविधान में अनुच्छेद 15(6) और 16(6) जोड़े गए, जिससे शैक्षणिक संस्थानों में एडमिशन और सिविल पदों व सेवाओं में नियुक्तियों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए अधिकतम 10 प्रतिशत तक आरक्षण का प्रावधान किया गया।
लिखित जवाब में यह भी कहा गया है कि जिन व्यक्तियों के परिवार की कुल वार्षिक आय 8.00 लाख रुपये से कम है, उन्हें आरक्षण के उद्देश्य से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग माना जाता है, बशर्ते वे पहले से मौजूदा आरक्षण योजनाओं के दायरे में न आते हों। हालांकि, परिवार की आय कुछ भी हो, जिन व्यक्तियों के परिवार के पास पांच एकड़ या उससे अधिक कृषि भूमि, 1,000 वर्ग फुट या उससे अधिक का आवासीय फ्लैट, अधिसूचित नगर पालिकाओं में 100 वर्ग गज या उससे अधिक का आवासीय भूखंड, या अधिसूचित नगर पालिकाओं के अलावा अन्य क्षेत्रों में 200 वर्ग गज या उससे अधिक का आवासीय भूखंड है, उन्हें ईडब्ल्यूएस के तौर पर नहीं माना जाएगा।
छत्तीसगढ़ में ईडब्ल्यूएस आरक्षण नीति को लागू करने के संबंध में सदन को यह जानकारी दी गई कि राज्य सरकार से प्राप्त सूचना के अनुसार, छत्तीसगढ़ लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए आरक्षण) (संशोधन) विधेयक, 2022, जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण का प्रावधान है, को अभी तक मंजूरी नहीं मिली है। परिणामस्वरूप, राज्य सरकार में ईडब्ल्यूएस आरक्षण नीति लागू नहीं की गई है।
आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण के मौजूदा प्रावधानों की समीक्षा या संशोधन के संबंध में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में, सदन को सूचित किया गया कि मंत्रालय में ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।





