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सरकार ने ‘स्माइल’ योजना के माध्यम से व्यापक पुनर्वास और सामाजिक समावेशन को मजबूत किया

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, वंचित और हाशिये पर के लोगों के लिए व्यापक पुनर्वास तथा सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के उद्देश्य से एक प्रमुख केंद्रीय क्षेत्र की योजना के रूप में ‘स्माइल’ (हाशिये पर के लोगों के लिए आजीविका और उद्यम के लिए सहायता) योजना को लागू कर रहा है। इस योजना के अंतर्गत “भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों के व्यापक पुनर्वास” की उप-योजना भी शामिल है। इसमें प्रभावी तालमेल के जरिये पुनर्वास, चिकित्सा सुविधाएं, काउंसलिंग, शिक्षा, कौशल विकास और आजीविका के अवसरों पर ध्यान दिया जाता है। यह योजना राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की सरकारों, ज़िला प्रशासन, शहरी स्थानीय निकायों, नगर निगमों और इस क्षेत्र में काम करने वाले अन्य संगठनों और एजेंसियों के सहयोग से लागू की जाती है।

‘स्माइल’ योजना का उद्देश्य एक समावेशी समाज को बढ़ावा देना है। इसके तहत हाशिए पर के लोगों को कल्याणकारी सेवाओं तक पहुँचने, कौशल और आजीविका की क्षमताएँ विकसित करने और सम्मान व आत्मविश्वास के साथ मुख्यधारा के समाज में फिर से शामिल होने में मदद की जाती है। सरकार का दृष्टिकोण अलग-अलग हितधारकों के बीच तालमेल और सहयोग पर ज़ोर देता है, ताकि पुनर्वास का काम सिर्फ़ तुरंत मदद देने तक ही सीमित न रहे, बल्कि लंबे समय तक चलने वाले सामाजिक और आर्थिक एकीकरण में भी योगदान दे सके।

भिखारियों के व्यापक पुनर्वास की उप-योजना के तहत, मंत्रालय ने देश भर में पहचान, लामबंदी और पुनर्वास से जुड़े कदम उठाए हैं। आधिकारिक ‘स्माइल-बेगरी’ पोर्टल पर उपलब्ध नवीनतम जानकारी के अनुसार, इस पहल के तहत अब तक 42,589 व्यक्तियों की पहचान/सर्वेक्षण किया गया है और 12,710 व्यक्तियों का पुनर्वास किया जा चुका है।

पुनर्वास के इस फ्रेमवर्क में कई तरह की सहायता शामिल है, जैसे मेडिकल सुविधाएं, काउंसलिंग, शिक्षा और कौशल विकास। इन उपायों का मकसद लाभार्थियों को ऐसी क्षमताएं और अवसर दिलाना है, जिनसे वे स्थायी आजीविका और सम्मानजनक जीवन की ओर बढ़ सकें। इसके साथ ही, यह फ्रेमवर्क अलग-अलग सरकारी विभागों, एजेंसियों और स्थानीय निकायों के साथ मिलकर काम करने को भी बढ़ावा देता है, जो भिखारियों के कल्याण और पुनर्वास के लिए काम कर रहे हैं।

आधिकारिक ‘स्माइल-बेगरी’ पोर्टल के अनुसार, यह उप-योजना 12 फरवरी 2022 को शुरू की गई थी और इसे व्यापक पुनर्वास एवं समन्वित प्रयासों के माध्यम से भारत को “भिक्षावृत्ति मुक्त भारत” बनाने के मकसद से लागू किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य भिक्षावृत्ति में शामिल लोगों का मुख्यधारा के समाज में फिर से एकीकरण करना है, साथ ही उनके आत्मविश्वास और अवसरों तक उनकी पहुँच को मज़बूत बनाना है।

व्यापक ‘स्माइल’ फ़्रेमवर्क में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के कल्याण के लिए व्यापक पुनर्वास” का घटक भी शामिल है। इस घटक के तहत, सरकार ने बेसहारा और आश्रयहीन ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को आश्रय और सहायता प्रदान करने के लिए 17 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 23 ‘गरिमा गृह’ स्थापित किए हैं। पिछले तीन वर्षों के दौरान, गरिमा गृहों के माध्यम से 1,041 ट्रांसजेंडर व्यक्तियों का पुनर्वास किया गया है। इसके अलावा, सरकार ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए स्वास्थ्य सेवा, पहचान संबंधी दस्तावेज़, कौशल विकास, उद्यमिता और रोजगार के अवसरों से जुड़े उपाय भी किए हैं।

ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए पात्र लोगों को ट्रांसजेंडर प्रमाण पत्र और पहचान पत्र जारी करने की प्रक्रिया को सुगम बनाने के उद्देश्य से ‘राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर पोर्टल’ स्थापित किया गया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस पोर्टल के माध्यम से अब तक 33,303 पहचान पत्र जारी किए जा चुके हैं। सरकार ने ‘आयुष्मान भारत’ योजना के साथ तालमेल बिठाने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के साथ एक समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत आधिकारिक दस्तावेज़ में दी गई जानकारी के अनुसार 147 ‘एबी पीएम-जेएवाई’ ट्रांसजेंडर कार्ड जारी किए गए हैं।

मंत्रालय ने कौशल विकास और आर्थिक सशक्तिकरण के अवसरों को और अधिक मजबूत किया है। इसके तहत 725 ट्रांसजेंडर व्यक्तियों ने कौशल विकास प्रशिक्षण प्राप्त किया है, जबकि 150 ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को उद्यमिता विकास कार्यक्रम के माध्यम से प्रशिक्षित किया गया है। इसके अलावा, तीन राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर रोजगार मेलों का भी आयोजन किया गया है, जिससे 223 ट्रांसजेंडर व्यक्ति लाभान्वित हुए हैं।

सरकारी योजनाओं तक पहुँच, सुरक्षा और कल्याण को बढ़ावा देने के लिए संस्थागत व्यवस्थाओं को भी मज़बूत किया गया है। 27 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में ‘ट्रांसजेंडर संरक्षण सेल’ बनाए गए हैं, जबकि ट्रांसजेंडर लोगों के अधिकारों और हितों की रक्षा करने और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उन तक पहुँचाने के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा 30 ‘ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड’ स्थापित किए गए हैं।

सरकार ने ‘स्माइल’ योजना के कार्यान्वयन का एक स्वतंत्र आकलन भी कराया है। राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (एनआईआरडीपीआर), हैदराबाद द्वारा सितंबर-अक्टूबर 2025 के दौरान एक थर्ड-पार्टी मूल्यांकन किया गया था। इस मूल्यांकन के मुख्य निष्कर्षों और सिफारिशों पर विचार किया गया है तथा उन्हें 16वें वित्त आयोग के चक्र (2026-27 से 2030-31) के दौरान योजना को जारी रखने के लिए संशोधित योजना दिशा-निर्देशों में शामिल किया गया है।

‘स्माइल’ योजना के माध्यम से, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय वंचित व्यक्तियों के लिए पुनर्वास, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा, कौशल विकास और आजीविका सहायता के एक तंत्र को मजबूत करने की दिशा में कार्य कर रहा है। इस योजना का तालमेल-आधारित तरीका केंद्र और राज्य सरकारों, स्थानीय प्रशासन, स्वयंसेवी संस्थाओं, समुदाय-आधारित संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों को एक साथ लाता है, ताकि सामाजिक समावेश और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में संवहनीय रास्ते बनाए जा सकें। इसका मुख्य मकसद यह पक्का करना है कि हाशिए पर रहने वाले लोग सम्मान, आत्मविश्वास और मुख्यधारा के समाज में भागीदारी के बेहतर मौकों के साथ जी सकें।

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