शिक्षा

सरकार ने विभिन्न कोचिंग संस्थानों के अभ्यर्थियों/छात्रों को एक करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि वापस दिलाई

उपभोक्ता मामले विभाग ने उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा एवं शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता में राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (एनसीएच) के माध्यम से यूपीएससी सिविल सेवा, आईआईटी और अन्य प्रवेश परीक्षाओं के लिए नामांकित छात्रों और उम्मीदवारों के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए मुकदमेबाजी से पहले के चरण में सफलतापूर्वक हस्तक्षेप किया है।

विभिन्न कोचिंग सेंटरों द्वारा अनुचित व्यवहार, विशेष रूप से छात्रों/अभ्यर्थियों की नामांकन फीस वापस न करने के संबंध में राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (एनसीएच) में दर्ज की गई कई शिकायतों के बाद, एनसीएच ने इन शिकायतों को मिशन-मोड पर हल करने के लिए एक अभियान शुरू किया, ताकि प्रभावित छात्रों को अब तक मांगे गए कुल 2.39 करोड़ रुपये में से कुल एक करोड़ रुपये की वापसी की सुविधा मिल सके।

यह निर्णायक कार्रवाई राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन को उन छात्रों से कई शिकायतें मिलने के बाद की गई है, जिन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा, आईआईटी और अन्य कोचिंग प्रोग्रामों में दाखिला लिया था, लेकिन छात्रों ने कोचिंग संस्थानों द्वारा किए गए वादों को पूरा नहीं करने, अपर्याप्त शिक्षण गुणवत्ता और पाठ्यक्रमों को अचानक रद्द करने जैसी समस्याओं का सामना किया। डेटा से पता चलता है कि 12 महीने की छोटी सी अवधि यानी 2023-2024 के दौरान 16,276 छात्र एनसीएच तक पहुंचे, जब कोचिंग सेंटरों द्वारा उनके अनुरोधों को अस्वीकार कर दिया गया/टाल दिया गया/उनकी संतुष्टि के अनुसार उनका समाधान नहीं किया गया। डेटा रिपॉजिटरी के विश्लेषण से एनसीएच में शिकायत दर्ज कराने वाले असंतुष्ट छात्रों/उपभोक्ताओं की संख्या में वृद्धि की प्रवृत्ति का भी पता चला।

वर्ष 2021-2022 में छात्रों की ओर से दर्ज की गई शिकायतों की कुल संख्या 4,815, जबकि वर्ष 2022-2023 में 5,351 और 2023-2024 में 16,276 शिकायतें दर्ज की गई हैं। यह वृद्धि उपभोक्ता आयोगों का दरवाजा खटखटाने से पहले एक प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र के रूप में एनसीएच में छात्रों के बढ़ते विश्वास और भरोसे को दर्शाती है। 2024 में, मुकदमेबाजी से पहले के चरण में अपनी शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए पहले से ही 6980 छात्र एनसीएच से संपर्क कर चुके हैं।

देश के कोने-कोने से प्रभावित छात्रों ने “यूपीएससी सिविल सेवा”, “जेईई एडवांस”, मेडिकल प्रवेश, सीए परीक्षा और अन्य पाठ्यक्रमों के लिए कक्षाएं प्रदान करने वाले कोचिंग सेंटरों के खिलाफ अपनी शिकायतें दर्ज कराईं, जिसके बाद विभाग के हस्तक्षेप से इन सभी रिफंड को मुकदमे से पहले के चरण में तुरंत संभव कराया गया।

ऐसी ही सफलता की एक कहानी बेंगलुरु के एक छात्र से जुड़ी है, जिसने लखनऊ के एक संस्थान में प्रबंधन पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने के लिए 3.5 लाख रुपये का शिक्षा ऋण लिया था। पाठ्यक्रम शुरू होने में अत्यधिक देरी के कारण उसे पाठ्यक्रम छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। कई बार की कोशिश के बाद भी, रिफंड नहीं दिया गया। ऋण की ईएमआई और धन की कमी के कारण कहीं और दाखिला लेने में असमर्थता से परेशान होकर, उसने एनसीएच से संपर्क किया और विभाग के हस्तक्षेप पर उसे रिफंड मिला।

इसी तरह, एक और सफलता की कहानी गुजरात के भरूच के एक छात्र की है, जिसे एनसीएच के हस्तक्षेप के बाद नामांकन के लिए भुगतान की गई 8.36 लाख की राशि वापस कर दी गई।

इन सभी छात्रों और उम्मीदवारों ने टोल-फ्री “1915” हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके या “www.consumerhelpline.gov.in” नामक पोर्टल पर अपनी शिकायतें दर्ज करके राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन से मदद मांगी। उपभोक्ता मामले विभाग ने उपभोक्ताओं से संबंधित मुद्दों पर जानकारी का प्रसार करने और उपभोक्ता कल्याण को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (एनसीएच) शुरू की। विभाग ने एकीकृत उपभोक्ता शिकायत निवारण तंत्र (आईएनजीआरएएम) पोर्टल के शुभारंभ के साथ इस सेवा का विस्तार किया। यह पोर्टल उपभोक्ताओं के लिए एनसीएच की देख-रेख में एक प्री-लिटिगेशन प्लेटफ़ॉर्म है, जिसके जरिए उपभोक्ता अपनी शिकायतों से कंपनियों को सीधे रू-ब-रू करा सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि सीसीपीए ने भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार तरीकों की गलत कार्यप्रणालियों के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई की है और कई अवसरों पर कई कोचिंग सेंटरों को दंडित भी किया है। इन पहलों ने छात्रों को उपभोक्ता वर्ग के रूप में समर्थन देकर हमारे समाज को सशक्त बनाने के लिए उपभोक्ता मामले विभाग की प्रतिबद्धता और योगदान को मजबूत किया है।

उपभोक्ता मामले विभाग की सचिव निधि खरे ने कहा, “हम उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित हैं, खासकर छात्रों के जो अपने सपनों को पूरा करने में अपना कीमती समय और संसाधन दोनों लगाते हैं। यह कार्रवाई यह सुनिश्चित करने के लिए हमारी प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है कि कोचिंग संस्थान निष्पक्ष कार्यप्रणालियों का पालन करें और उपभोक्ताओं के अधिकारों का सम्मान करें।” उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कोचिंग संस्थानों को महत्वपूर्ण जानकारी को स्पष्ट और प्रमुखता से प्रकट करके सच्चाई व ईमानदारी से तथ्य प्रस्तुत करने चाहिए ताकि उपभोक्ता न केवल इसे आसानी से देख सकें बल्कि अधिक बेहतर विकल्प भी चुन सकें। उन्होंने उपभोक्ता अधिकारों के महत्व और विज्ञापनदाताओं की जिम्मेदारी को रेखांकित किया कि वे सटीक जानकारी प्रदान करना सुनिश्चित करें।

इसके अलावा, उपभोक्ता मामले विभाग की यह पहल नीति आयोग की अक्टूबर 2021 की रिपोर्ट “विवाद समाधान के भविष्य की रूपरेखा तैयार करना: भारत के लिए ओडीआर नीति योजना” में दी गई सिफारिशों के अक्षरशः और भावना के अनुरूप, सभी क्षेत्रों में शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए मुकदमेबाजी से पहले इस मंच को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें यह कहते हुए पूर्व-मुकदमेबाजी तंत्र के महत्व को स्वीकार किया गया है और दोहराया गया है कि-

“ई-कॉमर्स दावों, छोटे-मोटे दावों और चेक-बाउंसिंग मुद्दों से जुड़े अनिवार्य प्री-लिटिगेशन/ओडीआर मामलों को अदालतों में पहुंचने से पहले ही सुलझाया जा सकता है। यह भारतीय न्यायपालिका के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जहां मामलों का बोझ लगातार बढ़ रहा है।”

यह बताना उचित है कि राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पहले से ही मुकदमे-पूर्व उपायों के माध्यम से उपभोक्ता शिकायतों का समाधान प्रभावशाली और प्रभावी तरीके से कर रही है। इसके अलावा, विभाग ने कोचिंग सेंटरों को अधिक छात्र-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने और पाठ्यक्रम की पेशकश में पारदर्शिता दिखाने एवं क्षेत्र में गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। यह सक्रिय रुख न केवल प्रभावित छात्रों का सहयोग करता है, बल्कि शिक्षा क्षेत्र के भीतर बेहतर कार्यप्रणालियों के लिए एक मिसाल भी स्थापित करता है, यह सुनिश्चित करता है कि कोचिंग संस्थान अपने संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता दें।

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