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अब तक 23 राज्यों/संघराज्य क्षेत्रों में जनगणना 2027 के प्रथम चरण का कार्य पूर्ण

जनगणना 2027 के प्रथम चरण के अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का क्षेत्रीय कार्य आज हिमाचल प्रदेश में स्व-गणना (Self-Enumeration) अवधि पूरी होने के बाद सुरू हो गया है। प्रगणकों द्वारा घर-घर जाकर किए जाने वाला कार्य 15 जुलाई, 2026 तक जारी रहेगा।

केरल और नागालैंड में स्व-गणना (SE) सुविधा भी प्रारंभ हो गई है, जो 30 जून, 2026 तक उपलब्ध रहेगी। इन राज्यों में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना के क्षेत्रीय कार्य 1 जुलाई से 30 जुलाई, 2026 तक किए जाएंगे। इन राज्यों के निवासी आधिकारिक स्व-गणना पोर्टल (se.census.gov.in) के माध्यम से अपनी स्व-गणना पूरी कर सकते हैं।

वर्तमान में गुजरात, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, पुडुचेरी तथा उत्तर प्रदेश में घर-घर जाकर किए जाने वाले क्षेत्रीय कार्य जारी हैं। जिन निवासियों ने स्व-गणना पूरी कर ली है, वे अपने द्वारा प्राप्त स्व-गणना पहचान संख्या (SE ID) को सुरक्षित रखें और प्रगणक की विज़िट के दौरान उसे साझा करें, जिससे एचएलओ प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी। जिन परिवारों ने स्व-गणना का विकल्प नहीं चुना है, उन्हें प्रगणकों द्वारा घर-घर जाकर कवर किया जाएगा।

इस बीच, 16 मई से 14 जून, 2026 के दौरान महाराष्ट्र, मेघालय, राजस्थान एवं झारखंड राज्यों तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) क्षेत्र में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। पंजाब में भी यह कार्य 13 जून, 2026 को सम्पन्न हो गया।

अब तक 23 राज्य/संघ राज्य क्षेत्र, जिनमें अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव, दिल्ली, गोवा, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मेघालय, मिजोरम, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, तेलंगाना और उत्तराखंड शामिल हैं, जनगणना 2027 के प्रथम चरण का कार्य पूर्ण कर चुके हैं।

जनगणना 2027 पहली बार डिजिटल टूल्स के उपयोग के साथ की जा रही है। इसके अंतर्गत आंकड़ों को एक डेडीकेटेड मोबाइल ऐप के माध्यम से एकत्रित किया जा रहा है। इसके साथ, व्यापक एवं सटीक कवरेज सुनिश्चित करने के लिए पारंपरिक रूप से घर-घर जाकर की जाने वाली गणना की प्रक्रिया भी की जा रही है। मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना चरण के दौरान आवासीय स्थिति, परिवार संबंधी विवरण, उपलब्ध सुविधाओं तथा परिवारों के स्वामित्व वाली परिसंपत्तियों से संबंधित जानकारी 33 अधिसूचित प्रश्नों वाली प्रश्नावली के माध्यम से एकत्र की जा रही है।

जनगणना अधिनियम, 1948 के अंतर्गत एकत्र की गई सभी जानकारी पूर्णतः गोपनीय रखी जाती है और उसका उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों और विकास योजनाओं के लिए किया जाता है। अधिसूचित राज्यों एवं संघराज्य क्षेत्रों के निवासियों से अनुरोध है कि वे जनगणना प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लें और क्षेत्रीय भ्रमण के दौरान प्रगणकों को अपना पूरा सहयोग दें।

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