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गृह मंत्री अमित शाह ने अहमदाबाद में गुजरात राज्य सहकारी संघ द्वारा “विकसित भारत के निर्माण में सहकारिता की भूमिका” पर आयोजित महासम्मेलन को संबोधित किया

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज अहमदाबाद में गुजरात राज्य सहकारी संघ द्वारा “विकसित भारत के निर्माण में सहकारिता की भूमिका” पर आयोजित महासम्मेलन को संबोधित किया। इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

महासम्मेलन को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने 2025 को अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के तौर पर मनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि सहकारिता शब्द पूरे विश्व में आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना वर्ष 1900 में था। अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत में 2021 से सहकारिता आंदोलन को पुनर्जीवित करने का एक बहुत बड़ा प्रयास शुरू हुआ और इसीलिए सहकारिता वर्ष की शुरुआत भारत में करने का निर्णय लिया गया।

अमित शाह ने कहा कि 2021 में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हुई शुरूआत के तहत सहकार से समृद्धि और विकसित भारत में सहकारिता की भूमिका के दो सूत्रों को देश के सामने रखा गया। उसी शुरूआत के अंतर्गत आज गुजरात में इस सहकारिता सम्मेलन का आयोजन किया गया है। उन्होंने कहा कि सहकारिता क्षेत्र में हुए परिवर्तन के लाभ जब तक निचले स्तर पर प्राथमिक कृषि ऋण समिति (PACS) और किसानों तक नहीं पहुंचेंगे तब तक सहकारिता क्षेत्र मजबूत नहीं हो सकता। अमित शाह ने कहा कि इसीलिए यह बहुत जरूरी है कि हम सहकारी संस्थाओं को आगे बढ़ाएं। हमें सभी प्रकार की सहकारी संस्थाओं में जागरूकता, प्रशिक्षण और पारदर्शिता लाने का प्रयास करना होगा।

केन्द्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के दौरान साइंस ऑफ कोऑपरेशन और साइंस इन कोऑपरेशन पर भारत सरकार ने बल दिया है। उन्होंने कहा कि आजादी के आंदोलन के समय देश में शुरू हुआ सहकारिता आंदोलन धीरे-धीरे देश के एक बड़े भाग में लगभग समाप्त हो चुका था। उन्होंने कहा कि यह हम सबकी जिम्मेदारी है कि इस आंदोलन के तहत हर राज्य और जिले तक सहकारिता का विस्तार हो। साथ ही हर राज्य में प्राथमिक सहकारी समितियों की स्थिति सुधरे, जिलास्तरीय संस्थाएं मजबूत हो और उनके माध्यम से राज्य तथा राष्ट्रीय स्तर का सहकारी ढांचा भी मजबूत बने। अमित शाह ने कहा कि कई वर्षों से चली आ रही वैश्विक त्रि-स्तरीय सहकारिता ढांचे की कल्पना में हमने चौथे स्तर को जोड़ा है। उन्होंने कहा कि सहकारिता के ढांचे की हर सहकारी गतिविधि से जुड़े राष्ट्रीय संस्थानों, राज्यस्तरीय सहकारी संस्थाओं, जिलास्तरीय संस्थाओं और हर क्षेत्र की प्राथमिक सहकारी समितियों को मजबूत करते हुए पूरे देश में सहकारिता को पहुंचाना ज़रूरी है। अमित शाह ने कहा कि इसके लिए हमें अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष का उपयोग करना चाहिए।

अमित शाह ने कहा कि यह पूरा अभियान तीन स्तंभों पर आधारित है – सहकारिता को शासन के मुख्य प्रवाह का हिस्सा बनाना, सहकारिता आंदोलन में टेक्नोलॉजी के माध्यम से पारदर्शिता और प्रमाणिकता लाना और अधिक से अधिक नागरिकों को सहकारिता आंदोलन के साथ जोड़ने की प्रक्रिया को गति देना। उन्होंने कहा कि इन तीनों स्तंभों के आधार पर सहकारिता वर्ष के दौरान कार्य करने की आवश्यकता है और इसके लिए अनेक प्रकार के लगभग 57 इनीशिएटिव अब तक भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय द्वारा लिए गए हैं।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि हमें गुजरात सहित पूरे देश में Cooperation Amongst Cooperatives के प्रयोग को प्राथमिक स्तर पर करना चाहिए जिससे सभी सहकारी संस्थाओं का पूरा कामकाज सहकारी संस्थाओं के साथ ही हो। सभी प्राथमिक सहकारी समितियों, डेयरी आदि का बैंक अकाउंट ज़िला सहकारी बैंक में ही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें सभी सहकारी संस्थाओ के बीच सहकारिता को आगे बढ़ाना चाहिए और इस प्रयास को गति देनी चाहिए।

अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने त्रिभुवन कोऑपरेटिव यूनिवर्सिटी की स्थापना की है जो राष्ट्रीय स्तर पर काम करेगी। उन्होंने कहा कि दश के हर राज्य में सहकारिता से जुड़े सभी क्षेत्रों में कोऑपरेटिव के कॉन्सेप्ट के साथ पढ़ने की व्यवस्था बनाई गई है। उन्होंने कहा कि जब तक हम PACS को मजबूत नहीं करते तब तक सहकारी ढांचा मजबूत नहीं हो सकता है, इसीलिए मोदी सरकार ने 2029 तक देश की हर पंचायत में PACS की स्थापना का निर्णय लिया है। इस फ़ैसले के अंतर्गत 2 लाख नई पैक्स और डेयरी रजिस्टर्ड की जाएंगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने विभिन्न प्रकार की लगभग 22 गतिविधियों को पैक्स के साथ जोड़ने का काम किया है। अमित शाह ने कहा कि सरकार जल्द ही लिक्विडेशन में गई पैक्स के निपटारे और नए पैक्स के लिए भी नीति ले कर आने वाली है।

केन्द्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सहकारिता क्षेत्र में अनेक प्रकार की नई शुरुआत होने जा रही है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष में सभी लोगों को जागरूक कर, पारदर्शिता के नए आयाम तय कर और भर्तियां कर हमें सहकारी ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता है।

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