प्रधानमंत्री के स्वच्छ, हरित भविष्य और “आत्मनिर्भर भारत” के दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए ऐतिहासिक समझौते के रूप में, स्वास्थ्य सेवा और अनुसंधान क्षेत्र में अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने एनटीपीसी विद्युत व्यापार निगम (एनवीवीएन) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस साझेदारी का उद्देश्य देश भर में आईसीएमआर संस्थानों के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग करना है, जो नवीकरणीय और सतत ऊर्जा की दिशा में भारत के प्रयासों का समर्थन करता है।
इस समझौते के तहत एनवीवीएन, 15 आईसीएमआर संस्थानों में 4,559 किलोवाट की संयुक्त क्षमता वाले रूफटॉप सोलर पैनल की आपूर्ति, स्थापना, परीक्षण, उन्हें काम में लेने और रखरखाव का काम करेगा। इस परियोजना में ग्रिड से जुड़ी सौर परियोजनाओं के लिए एक उर्जा खरीद समझौता (पीपीए) भी शामिल है। यह समझौता अगले 25 वर्षों तक एक निश्चित सौर शुल्क तय करता है जो आईसीएमआर के संचालन के लिए दीर्घकालिक लागत दक्षता और स्थिरता सुनिश्चित करता है।
सात संस्थान पहले से ही लागू परियोजनाओं के तहत सौर ऊर्जा से लाभान्वित हो रहे हैं और अब एनवीवीएन के साथ समझौता ज्ञापन से अतिरिक्त संस्थानो में भी सौर उर्जाकरण के प्रयास किए जाएंगे, जिससे आईसीएमआर के कार्बन उत्सर्जन और ऊर्जा व्यय में काफी कमी आएगी।
यह साझेदारी, भारत के राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाती है, स्वास्थ्य सेवा अनुसंधान में सतत बढ़ावा देती है और साथ ही आईसीएमआर को जैव चिकित्सा क्षेत्र के लिए हरित ऊर्जा उपयोग में अग्रणी बनाती है।
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