भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने अरुणाचल प्रदेश सरकार और नई दिल्ली स्थित इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्फेडरेशन (आईबीसी) के सहयोग से तवांग में आयोजित शाक्यमुनि बुद्ध के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी श्रद्धालुओं और आगंतुकों की भारी भीड़ के बीच आज 7 नवंबर 2026 को संपन्न हुई। सात दिनों तक चली इस प्रदर्शनी के दौरान, कुल 31,000 श्रद्धालुओं और आगंतुकों ने गादेन नामग्याल ल्हात्से (तवांग मठ) पहुंचकर इन पवित्र अवशेषों के दर्शन किए।
31 अक्टूबर 2026 को उचित प्रोटोकॉल और औपचारिक व्यवस्थाओं के साथ नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय से पवित्र अवशेष तवांग पहुंचे। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री पेमा खांडू ने केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत की उपस्थिति में इन पवित्र अवशेषों को औपचारिक रूप से प्राप्त किया।
इस पवित्र प्रदर्शनी ने बौद्ध भिक्षुओं, वरिष्ठ नागरिकों और आम जनता को शाक्यमुनि बुद्ध के पवित्र अवशेषों के समक्ष नमन करने, प्रार्थना करने और आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर प्रदान किया। सात दिनों तक तवांग मठ में भारी आस्था देखने को मिली, जहाँ तवांग जिले के सभी ब्लॉकों और आस-पास के क्षेत्रों से श्रद्धालु पहुँचे। लोगों की इतनी बड़ी संख्या में उपस्थिति, इस क्षेत्र के निवासियों के बीच इन पवित्र अवशेषों के गहरे आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाती है।
इस प्रदर्शनी के हिस्से के रूप में, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री पेमा खांडू ने तवांग मठ में दो विशेष प्रदर्शनियों का उद्घाटन किया। इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्फेडरेशन (आईबीसी) द्वारा आयोजित प्रदर्शनी ‘अनअर्थिंग द सेक्रेड पिपरहवा: द स्टोरी ऑफ द होली बुद्ध रेलिक्स एंड देयर डिस्कवरी’ में 1898 में पिपरहवा अवशेषों की ऐतिहासिक खोज को प्रदर्शित किया गया। दूसरी प्रदर्शनी, ‘क्रॉसरोड्स ऑफ धम्म: क्लासिकल लेगेसीज़, लिविंग आर्ट, एंड एंथ्रोपोलॉजिकल पर्सपेक्टिव्स’ , जिसे नई दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय द्वारा तैयार किया गया था, ने आगंतुकों को बौद्ध धर्म की ऐतिहासिक, कलात्मक और सांस्कृतिक विरासत तथा इसके स्थायी प्रभाव को जानने का अवसर प्रदान किया।
2 नवंबर 2026 को, इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्फेडरेशन ने तवांग के कालावांगपो कन्वेंशन सेंटर में ‘बुद्धिज्म: डिसेमिनेशन इन द हिमालयन रीजन एंड बियॉन्ड’ शीर्षक से एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया। इस सम्मेलन में भारत और कई अन्य देशों के बौद्ध विद्वान, धार्मिक नेता और प्रतिनिधि एक साथ आए, ताकि हिमालयी क्षेत्र और उसके बाहर बौद्ध शिक्षाओं और विरासत के प्रसार तथा संरक्षण पर चर्चा की जा सके।
7 नवंबर को तवांग में पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी संपन्न होने के बाद, इन अवशेषों को अपनी यात्रा के अगले पड़ाव, बोमडिला ले जाया जाएगा। 8 नवंबर 2026 को, भारतीय वायु सेना इन पवित्र अवशेषों को बोमडिला पहुंचाएगी। अपर गोम्पा में कुछ देर रुकने के बाद, इन अवशेषों को बोमडिला के टीजीएल मठ (लोअर गोम्पा) में स्थापित किया जाएगा, जहां ये 8 से 13 नवंबर 2026 तक आम जनता के दर्शन के लिए उपलब्ध रहेंगे।
इसके बाद, इन पवित्र अवशेषों को नामसाई स्थित गोल्डन पैगोडा ले जाया जाएगा, जहां ये 14 से 20 नवंबर 2026 तक आम जनता के दर्शन के लिए रखे जाएंगे। अंत में 21 नवंबर 2026 को ये अवशेष वापस नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय लौट आएंगे।
यह प्रदर्शनी भारत की समृद्ध बौद्ध विरासत को संरक्षित और बढ़ावा देने तथा दुनिया भर के बौद्ध समुदायों के साथ भारत के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को मजबूत करने की भारत सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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