देश का प्रत्यक्ष कर संग्रह 11 जनवरी तक आठ दशमलव आठ दो प्रतिशत की वृद्धि के साथ 18 लाख अड़तीस हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। यह वृद्धि आठ लाख 63 हजार करोड़ रुपये की कॉर्पोरेट कर प्राप्तियों और व्यक्तिगत करदाताओं के मजबूत योगदान के कारण संभव हुई है। इसी अवधि में टैक्स रिफंड में 17 प्रतिशत की गिरावट आई, जिससे कुल कर संग्रह में वृद्धि हुई। कुल मिलाकर, सकल प्रत्यक्ष कर में चार दशमलव एक चार प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो इस वित्त वर्ष में अब तक सकारात्मक वृद्धि दर्शाती है।
सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए, पिछले वर्ष की तुलना में प्रत्यक्ष कर संग्रह में 12 दशमलव सात प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान व्यक्त किया है। सरकार ने वित्त वर्ष 2026 में प्रतिभूति लेनदेन पर कर से 78 हजार करोड़ रुपये का लक्ष्य भी निर्धारित किया है।
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