भारत में इस वर्ष जनवरी से अप्रैल के बीच चिकित्सा प्रयोजनों के लिए एक लाख 31 हजार से अधिक विदेशी पर्यटकों का आगमन -एफ. टी. ए. दर्ज किया गया है। यह इस अवधि के दौरान कुल एफ. टी. ए. का लगभग चार दशमलव एक प्रतिशत है। केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने राज्यसभा में यह जानकारी दी।
पिछले पांच वर्षों में, बांग्लादेश चिकित्सा पर्यटकों के क्षेत्र में शीर्ष केंद्र के रूप में उभरा है, इसके बाद इराक, सोमालिया, ओमान और उज्बेकिस्तान का स्थान है। पिछले वर्ष चिकित्सा प्रयोजनों के लिए 6 लाख 44 हज़ार 387 लोग भारत आए थे, जो 2020 के एक लाख 82 हजार से अधिक की तुलना में बहुत ज्यादा है। पर्यटन मंत्रालय के अनुसार चिकित्सा पर्यटन का विकास और संवर्धन मुख्य रूप से राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन द्वारा किया जाता है।
केंद्र सरकार विभिन्न योजनाओं तथा पहलों के माध्यम से इन प्रयासों को आगे बढ़ा रही है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय भी हील इन इंडिया अभियान को बढ़ावा दे रहा है और चिकित्सा पर्यटन तंत्र को बढ़ाने के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र भागीदारी को बढ़ावा भी दे रहा है। इसमें अस्पताल, होटल, एयरलाइंस और नियामक एजेंसियां शामिल हैं। उपचार के लिए विदेशों से आने वालों की सुविधा के लिए भारत सरकार ने 171 देशों के नागरिकों के लिए ई-मेडिकल वीज़ा और ई-मेडिकल अटेंडेंट वीज़ा सुविधाओं का विस्तार किया है। गुजरात सरकार राज्य में पर्यटन विभाग की वेबसाइट पर आवेदन आमंत्रित करके चिकित्सा पर्यटन को बढ़ावा दे रही है।
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