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भारत ने मंगोलिया के उलानबटार में आयोजित UNCCD COP17 में सूखे से निपटने की क्षमता विकसित करने का आह्वान किया

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने आज सूखे से निपटने के लिए सक्रिय, प्रौद्योगिकी-आधारित क्षमता विकसित करने का आह्वान किया – मंगोलिया के उलानबटार में आयोजित यूएनसीसीडी सीओपी17 में ‘सूखे से निपटने की क्षमता में तेजी लाना विषय पर उन्होंने कहा कि सूखा अब “कोई आकस्मिक घटना नहीं, बल्कि एक निर्णायक चुनौती” है, जो जल सुरक्षा, खाद्य प्रणालियों, जैव विविधता और आर्थिक स्थिरता को प्रभावित करती है।

भूपेंद्र यादव ने भारत के समन्वित, बहु-संस्थागत दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला, जिसमें प्रारंभिक चेतावनी, शमन, राहत और सामुदायिक सुदृढ़ता वर्षा की निगरानी और उपग्रह आधारित सूखा आकलन अंतर-मंत्रालयी और राज्य स्तर पर तैयारियों को बढ़ावा देते हैं और यह सुनिश्चित होता है कि सूखा संकट में तब्दील न हो। भूपेंद्र यादव ने भूमि और जल के बीच महत्वपूर्ण संबंध पर जोर देते हुए कहा, “प्रवाह से पहले वनों का पुनर्स्थापन करें”, जो कटाव को कम करने, जल संचयन में सुधार करने के लिए जलग्रहण और नदी-क्षेत्रीय वानिकी पर भारत के प्रयासों को रेखांकित करता है। नदियों का पुनर्जीवन और पारंपरिक जल निकायों का पुनरुद्धार और जल सुरक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में सूखे से निपटने की क्षमता को और मजबूत करता है।

भूपेंद्र यादव ने भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में झरनों और पुनर्भरण क्षेत्रों के सामुदायिक नेतृत्व में किए जा रहे जीर्णोद्धार पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मैदानी क्षेत्रों में एक अखिल भारतीय जलसंभर कार्यक्रम के माध्यम से पहाड़ी से घाटी तक वर्षा से भूमि क्षरण रोकने करने के सामुदायिक संस्थाओं के सहयोग और ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमों के तहत प्रयास किए जा रहे हैं। पेयजल कार्यक्रम संकट के समय घरेलू स्तर पर, विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित करने का प्रयास करते हैं, जिसमें सुनिश्चित सेवा स्तर, स्थानीय गुणवत्ता परीक्षण और संवेदनशील क्षेत्रों को प्राथमिकता देना शामिल है। उन्होंने फसल बीमा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह किसानों को फसल चक्र के दौरान सूखे और अन्य नुकसानों से बचाता है, जिसमें रियायती प्रीमियम को प्रौद्योगिकी आधारित मूल्यांकन के साथ मिलाकर शीघ्र और पारदर्शी दावा निपटान सुनिश्चित किया जाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सामुदायिक स्वामित्व, क्षमता विकास और आजीविका विविधीकरण प्रतिक्रियात्मक राहत से सक्रिय, प्रौद्योगिकी-सक्षम सामर्थ्य के लिए केंद्रीय महत्व रखते हैं।

भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत का यह विश्वास है कि “सूखे को एक पूर्वानुमानित, रोकथाम योग्य जोखिम के रूप में प्रबंधित किया जाना चाहिए, न कि एक आवर्ती आपदा के रूप में जिसके लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया की आवश्यकता हो”। उन्होंने जलसंभर विकास, जल संचयन, वनीकरण, भूजल पुनर्भरण और जलवायु के अनुकूल फसलों सहित रोकथाम उपायों, आपदा संबंधी निधियों, रोजगार गारंटी, चारा सहायता और आवश्यकता पड़ने पर आपातकालीन जल आपूर्ति का भी उल्लेख किया। भूपेंद्र यादव ने मजबूत वैश्विक कार्रवाई का आह्वान करते हुए, इकोसिस्टम की पुनः बहाली में अधिक निवेश, मजबूत प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों और समन्वित कार्रवाई पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य प्रतिक्रिया के बजाय तैयारी, संकट प्रबंधन के बजाय रोकथाम और पुनर्बहाली के बजाय सूखे से निपटने की क्षमता बढ़ाना होना चाहिए।” उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे कमजोर लोगों के लिए सूखे से निपटना उनके अस्तित्व का प्रश्न है। भूपेंद्र यादव ने सभी के लिए सूखे की रोकथाम सुनिश्चित करने के लिए प्रारंभिक चेतावनी सहित अपने ज्ञान और क्षमताओं को साझा करने की भारत की तत्परता की पुष्टि की।

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