भारत ने अपुष्ट आरोपों के आधार पर चुनिंदा देशों को निशाना बनाने के लिए मानवाधिकारों के राजनीतिक इस्तेमाल का विरोध किया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में भारत की प्रतिनिधि बरखा ताम्रकार ने कहा कि मानवाधिकारों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने या चुनिंदा देशों को निशाना बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
भारत अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं के साथ संवाद करता है, लेकिन निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ बातचीत, परामर्श और सहयोग के सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए। हम प्रतिनिधिमंडलों से अपील करते हैं कि रिपोर्ट का सही उल्लेख करें और मानवीय चिंता से जुड़े पत्र को अंतिम निर्णय के रूप में प्रस्तुत न करें।
भारत में उपलब्ध सुरक्षा उपायों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार की गारंटी देता है।
हमारे संविधान का अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है। स्वतंत्र न्यायपालिका को बंदी प्रत्यक्षीकरण की रिट जारी करने का अधिकार है। राष्ट्रीय और राज्य मानवाधिकार आयोग लोगों की शिकायतों के निवारण के लिए प्रभावी माध्यम हैं। सूचना का अधिकार अधिनियम, स्वतंत्र मीडिया और सक्रिय नागरिक समाज ने शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही को और मजबूत किया है।
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