भारत ने जम्मू-कश्मीर में किशनगंगा और रातले पनबिजली परियोजनाओं पर तथाकथित मध्यस्थता न्यायालय के फैसले को खारिज कर दिया है। मंत्रालय ने कहा कि भारत ने इस मध्यस्थता न्यायालय की कानूनी वैधता को कभी मान्यता नहीं दी है और इसका गठन सिंधु जल संधि का गंभीर उल्लंघन है।
मंत्रालय ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल-संधि को स्थगित कर दिया है और भारत अब संधि के अंतर्गत कोई भी दायित्व को निभाने के लिए बाध्य नहीं है। मंत्रालय ने कहा कि किसी भी मध्यस्थता न्यायालय को भारत के संप्रभु निर्णय पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं है।
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