भारतीय रेल ने भविष्य के लिए तैयार, उच्च क्षमता वाला रेल नेटवर्क बनाने के परिवर्तनकारी प्रयास जारी रखते हुए, उत्तरी, दक्षिणी और पूर्वी रेलवे ज़ोन में कई रणनीतिक अवसंरचना परियोजनाओं को मंज़ूरी दी है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य कोचिंग रखरखाव पारिस्थितिकी को आधुनिक बनाना, उच्च घनत्व गलियारों पर भीड़ कम करना, परिचालन रुकावटों को खत्म करना और यात्री एवं माल ढुलाई क्षमता को काफी बढ़ाना है।
श्री गंगानगर स्टेशन (फेज-I), उत्तर पूर्वी रेलवे में कोच रखरखाव सुविधा का विकास: ₹174.2644 करोड़
भारतीय रेल ने राजस्थान के श्री गंगानगर स्टेशन पर फेज-I के तहत ₹174.2644 करोड़ की लागत से कोच रखरखाव सुविधा के विकास को मंजूरी दी है। यह परियोजना एलएचबी और वंदे भारत रेलगाड़ियों सहित आधुनिक रोलिंग स्टॉक के लिए रखरखाव अवसंरचना को उन्नत और विकसित करने की बड़ी पहल का हिस्सा है।
अभी, मौजूदा फैसिलिटी वर्तमान परिचालन ज़रूरतों को पूरा करती हैं, लेकिन आधुनिक रेक और नई सेवा के आने से, बेहतर अवसंरचना ज़रूरी हो गई है। स्वीकृत कार्यों में 600-मीटर लंबी दो वॉशिंग लाइन, 650-मीटर स्टेबलिंग तीन लाइन, दो पिट लाइन, व्हील लेथ लाइन एक और 650-मीटर इंजन एस्केप की एक लाइन बनाना शामिल है। 120 मीटर गुणा 24 मीटर का सिक लाइन शेड भी बनाया जाएगा। इसके अलावा, वॉशिंग लाइन के ऊपर कन्वेंशनल ओवर हेड इक्विपमेंट (ओएचई) के साथ आधुनिक मशीनरी और प्लांट जैसे सिंक्रोनाइज़्ड जैक, फोर्कलिफ्ट, इलेक्ट्रिक ओवरहेड ट्रैवलिंग (ईओटी) क्रेन और ऑटोमैटिक कोच वॉशिंग प्लांट लगाए जाएंगे।
शुरू होने पर, इस परियोजना से हर दिन औसत रखरखाव क्षमता में छह और रेक की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इससे परिचालन दक्षता में सुधार होगा, रेक मूवमेंट में आसानी होगी और इस इलाके में और रेल सेवा शुरू करने में मदद मिलेगी।
लालगढ़ (फेज-II), उत्तर पूर्वी रेल में कोचिंग रखरखाव सुविधाओं को बढ़ाना: ₹139.6820 करोड़
बीकानेर इलाके में वंदे भारत और एलएचबी सेवाओं के विस्तार से बढ़ती रखरखाव ज़रूरतों को पूरा करने के लिए, भारतीय रेल ने फेज-II के तहत ₹139.6820 करोड़ की लागत से राजस्थान के लालगढ़ में कोचिंग रखरखाव सुविधाओं को बढ़ाने को मंज़ूरी दी है।
बीकानेर में और विस्तार की कम गुंजाइश को देखते हुए, लालगढ़ को आधुनिक, पूरी तरह से सुसज्जित कोचिंग रखरखाव डिपो के तौर पर विकसित किया जा रहा है जो एडवांस्ड ट्रेनसेट को हैंडल करने में सक्षम है। स्वीकृत कार्यों में 600 मीटर की वॉशिंग लाइन बनाना, चार वॉशिंग लाइनों के ऊपर एक कवर्ड शेड बनाना, सिक लाइन को 120 मीटर गुणा 16 मीटर बढ़ाना, और 1000 वर्ग मीटर की सर्विस बिल्डिंग बनाना शामिल है। इस परियोजना में वॉशिंग लाइन नंबर चार के ऊपर रिट्रैक्टेबल ओएचई लगाना, दो सिंक्रोनाइज़्ड कोच लिफ्टिंग सिस्टम, दो ऑटोमैटिक कोच वॉशिंग प्लांट और दो 25-टन ईओटी क्रेन लगाना भी शामिल है।
इस बढ़ोतरी से और वंदे भारत ट्रेनसेट और दूसरे रोलिंग स्टॉक के रखरखाव की तैयारी काफी बेहतर होगी। इससे इस इलाके में बेहतर भरोसा, तेज़ टर्नअराउंड टाइम और बेहतर यात्री सेवा परिणाम सुनिश्चित होंगे।
तुरावुर–मरारीकुलम डबलिंग (21.10 km), दक्षिणी रेलवे: ₹450.59 करोड़
केरल में क्षमता बढ़ाने की बड़ी पहल में, भारतीय रेल ने दक्षिणी रेलवे के 21.10 किलोमीटर लंबे तुरावुर–मरारीकुलम खंड को ₹450.59 करोड़ की लागत से डबल लाइन करने की मंज़ूरी दी है। यह खंड रणनीतिक रूप से ज़रूरी एर्णाकुलम–अलपुझा–कायांकुलम गलियारे पर है। यह गलियारा बंदरगाह से जुड़े कार्गो सहित काफी यात्री और माल ढुलाई का यातायात संभालता है।
डबलिंग प्रोजेक्ट से हर दिशा में हर दिन नौ और पैसेंजर ट्रेनें चल सकेंगी और हर साल लगभग 2.88 मिलियन टन माल ढुलाई बढ़ सकेगी। इससे मालगाड़ियों के रुकने का समय भी 17 से 19 मिनट तक और पैसेंजर ट्रेनों के रुकने का समय लगभग 12 से 15 मिनट तक कम हो जाएगा, जिससे समय की भी काफी बचत होगी। यह खंड अभी क्षमता उपयोग के उच्च स्तर पर चल रहा है, और डबलिंग से भीड़ कम होगी, समय की पाबंदी बढ़ेगी और पूरे गलियारे की दक्षता मजबूत होगी।
यह परियोजना कोचीन बंदरगाह से जुड़ी माल ढुलाई कनेक्टिविटी को भी समर्थन देगी। इसससे लॉजिस्टिक्स ऑपरेशन आसान होंगे और इलाके का आर्थिक विकास होगा।
कालीपहाड़ी बाईपास लाइन (4.75 km), पूर्वी रेलवे: ₹107.10 करोड़
भारतीय रेल ने आसनसोल इलाके में परिचालन समस्याओं को दूर करने के लिए पश्चिम बंगाल में पूर्वी रेलवे के तहत ₹107.10 करोड़ की लागत से 4.75 किमी लंबी कालीपहाड़ी बाईपास लाइन बनाने की भी मंज़ूरी दी है।
अभी, दक्षिण पूर्वी रेलवे और पूर्वी रेलवे के बीच चलने वाली ट्रेनों को इंजन रिवर्सल के लिए आसनसोल यार्ड में जाना पड़ता है, जिससे जाम लगता है। ऐसी दिक्कतें होती हैं जिनसे बचा जा सकता है औरअवसंरचना का सही इस्तेमाल नहीं हो पाता है। प्रस्तावित बाईपास लाइन दोनों ज़ोन के बीच सीधी कनेक्टिविटी देगी, जिससे यार्ड में इंजन रिवर्सल की ज़रूरत खत्म हो जाएगी।
इस परियोजना से हर दिन लगभग नौ मालगाड़ियों के लिए लगभग 90 मिनट और आठ कोचिंग ट्रेनों के लिए लगभग 30 मिनट का समय बचने की उम्मीद है। यार्ड में जाम कम करके और परिचालन आसानी में सुधार करके, यह बाईपास लाइन की क्षमता बढ़ाएगी, टर्नअराउंड टाइम कम करेगी और पूर्वी भारत के सबसे व्यस्त रेलवे क्षेत्रों में से एक में दक्षता में काफी सुधार करेगी।
इन परियोजनाओं की मंज़ूरी के साथ, भारतीय रेल आधुनिक, कुशल और उच्च क्षमता वाले रेल नेटवर्क के अपने विज़न को आगे बढ़ा रही है। रखरखाव सेवा को आधुनिक बनाने, कॉरिडोर डबलिंग और परिचालन में भीड़ कम करने लक्ष्य पर आधारित निवेश के ज़रिए, नेशनल परिवहन सेवा यात्रियों और उद्योग दोनों के लिए तेज़, सुरक्षित और ज़्यादा भरोसेमंद सेवा देने की प्रतिबद्धता को मज़बूत कर रही है। इसके साथ ही रेलवे भारत की आर्थिक वृद्धि की रीढ़ को भी मज़बूत कर रही है।
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