भारत

पीएम गतिशक्ति के तहत नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप की 92वीं बैठक में प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं का मूल्यांकन किया गया

सड़क और रेलवे क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं का मूल्यांकन करने के लिए आज नई दिल्ली में नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (एनपीजी) की 92वीं बैठक आयोजित की गई। बैठक में विचार-विमर्श के दौरान पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (पीएमजीएस एनएमपी) के अनुसार, मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी बढ़ाने और लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

एनपीजी ने चार प्रमुख प्रस्तावों का मूल्यांकन किया – एक सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) से और तीन रेल मंत्रालय (एमओआर) से। इन परियोजनाओं का मूल्यांकन पीएम गतिशक्ति के मूल सिद्धांतों के साथ उनके तालमेल के लिए किया गया, जिसमें एकीकृत मल्टीमॉडल बुनियादी ढांचा, अंतिम-छोर तक संपर्क और संपूर्ण-सरकार और संपूर्ण-क्षेत्र विकास का दृष्टिकोण शामिल है। इन पहलों की मदद से यात्रा का समय कम होने, माल ढुलाई में वृद्धि होने और क्षेत्रों में महत्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच)

  1. छह/चार लेन वाला एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे – ऋषिकेश बाईपास

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) ने एनएचएआई के ज़रिए ऋषिकेश के आसपास एक बाईपास का प्रस्ताव रखा है, ताकि शहर में भीड़भाड़ कम हो और एनएच-34 पर यातायात की आवाजाही में सुधार हो – जो दिल्ली, मेरठ, रुड़की, हरिद्वार और बद्रीनाथ को जोड़ने वाला एक प्रमुख मार्ग है। यह राजमार्ग हरिद्वार, देहरादून, बीएचईएल, एसआईडीसीयूएल और माना, नेलांग और नीति जैसे रणनीतिक सीमा बिंदुओं सहित प्रमुख धार्मिक और औद्योगिक नोड्स को जोड़ता है। इस परियोजना में 6/4-लेन का एलिवेटेड कॉरिडोर और एक अतिरिक्त 4-लेन की सड़क शामिल है, जो आने वाले समय में यातायात को प्रबंधित करने और समग्र क्षमता में सुधार करने के लिए वैकल्पिक मार्ग प्रदान करती है।

रेल मंत्रालय (एमओआर)

  1. बीना-इटारसी चौथी रेलवे लाइन (236.97 किमी)

एमओआर ने बीना और इटारसी के बीच चौथी रेलवे लाइन प्रस्तावित की है, जो नर्मदापुरम, रानी कमलापति, भोपाल, निशातपुरा और विदिशा जैसे प्रमुख स्टेशनों से होकर गुज़रेगी। इस लाइन में 32 स्टेशन शामिल हैं और इसका मकसद माल ढुलाई के संचालन में सुधार करना है। इस परियोजना से पारगमन समय में करीब 46 मिनट की कमी आने और सेक्शनल गति में 10 किमी/घंटा की बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है, जिससे तेज़ और अधिक कुशल रेल रसद में मदद मिलेगी।

  1. कसारा-मनमाड मल्टी-ट्रैकिंग लाइन (तीसरी और चौथी लाइन, 2×130.817 किमी)

इस परियोजना में दो खंडों में तीसरी और चौथी रेलवे लाइन का निर्माण शामिल है: पूर्वोत्तर घाट में कसारा-इगतपुरी और दक्कन पठार में इगतपुरी-मनमाड। इसका खास मकसद 100 में 1 का रूलिंग ग्रेडिएंट बनाए रखना है, जिससे बैंकिंग इंजन की ज़रुरत खत्म हो जाएगी और ऊर्जा दक्षता में भी सुधार होगा। यह लाइन कई स्टेशनों को बायपास करती है और लाहवित स्टेशन पर मौजूदा लाइन के साथ मिल जाती है, जिससे माल ढुलाई में आसानी होती है।

  1. भुसावल-वर्धा तीसरी और चौथी रेलवे लाइन (314 किमी)

भुसावल और वर्धा के बीच प्रस्तावित 314 किलोमीटर लंबी तीसरी और चौथी लाइन, महाराष्ट्र के पांच जिलों – जलगांव, बुलढाणा, अकोला, अमरावती और वर्धा से होकर गुजरती है। इस परियोजना में नए रेलवे ट्रैक, स्टेशन अपग्रेड, यार्ड रीकॉन्फ़िगरेशन और सिग्नलिंग सुधार शामिल हैं। मुंबई-हावड़ा हाई डेंसिटी कारिडोर (एचडीएन-2) के एक हिस्से के रूप में, यह मार्ग माल ढुलाई के यातायात को कम करने और मध्य रेलवे नेटवर्क को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है।

बैठक की अध्यक्षता उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के संयुक्त सचिव श्री पंकज कुमार ने की।

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