कोयला मंत्रालय ने राष्ट्रीय कर्मयोगी कार्यक्रम के अंतर्गत व्यापक स्तर पर हस्तक्षेप (एलएसआई) के चरण 1 को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य निदेशक स्तर तक के अधिकारियों में सेवा भाव की भावना को और सबल बनाने के लिए प्रोत्साहन देना है। सार्वजनिक सेवा और राष्ट्र निर्माण के लिए अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करने के लिए तैयार किए गए चार परस्पर वार्तालाप प्रशिक्षण सत्रों में 120 से अधिक अधिकारियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
कोयला मंत्रालय के संयुक्त सचिव और सीबीयू प्रमुख बी. पी. पति ने कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए देश के भविष्य को आकार देने में सार्वजनिक सेवा की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि सार्वजनिक सेवा एक प्रगतिशील राष्ट्र की आधारशिला है। यह पहल कौशल संवर्धन से कहीं आगे बढ़ते हुए सार्थक परिवर्तन लाने और नागरिकों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालने के हमारे दायित्व की पुष्टि है। देश की प्रगति को आगे बढ़ाने में हर अधिकारी की अहम भूमिका होती है।
इन प्रशिक्षण सत्रों का आयोजन 27-28 फरवरी और 11-12 मार्च को सिविल सेवा अधिकारी संस्थान, नई दिल्ली में किया गया। आकर्षक और संवादात्मक प्रारूप में तैयार किए गए इन सत्रों ने प्रतिभागियों को अत्यधिक प्रभावित किया और नीति निर्माण, सेवा वितरण एवं नागरिक-केंद्रित शासन के बारे में बहुमूल्य जानकारी प्रदान की। अधिकारियों ने राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ अपनी भूमिकाओं को निभाने के बारे में व्यापक दृष्टिकोण प्राप्त किया। इन सत्रों का नेतृत्व मास्टर ट्रेनर सुधीर बाबू मोटाना और कोयला मंत्रालय के उप सचिव राम कुमार ने किया और उजैर सिमनानी (कार्यक्रम समन्वयक, क्षमता निर्माण आयोग) ने इसका संचालन किया।
समापन सत्र के दौरान कोयला मंत्रालय के उप-सचिव बिजॉय सामंत ने अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी और उत्साह की सराहना की। उन्होंने पेशेवर विकास के प्रति उनके समर्पण को स्वीकार करते हुए इस बात पर बल दिया कि इस कार्यक्रम ने सार्वजनिक सेवा और सुशासन के प्रति जिम्मेदारी की गहरी भावना जगाई है।
चरण-1 के सफलतापूर्वक समापन के साथ कोयला मंत्रालय इस पहल को आगे बढ़ाने तथा अपने अधिकारियों को राष्ट्र की प्रभावी सेवा के लिए आवश्यक कौशल, दक्षता और निष्ठा से परिपूर्ण करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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