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MOPSW ने डिजिटल उत्कृष्टता केन्द्र (डीसीओई) की स्थापना के लिए सीडैक के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री (एमओपीएसडब्लू) सर्बानंद सोनोवाल ने आज यहां एक प्रमुख समुद्री डिजिटल पहल में दक्षता और उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिए कई तकनीकी पहलों की शुरुआत की। सागर सेतु प्लेटफॉर्म के शुभारंभ के साथ-साथ डिजिटल उत्कृष्टता केंद्र (डीसीओई ) को विकसित करने और स्थापित करने के लिए सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक) के साथ एमओपीएसडब्ल्यू के समझौता ज्ञापन (एमओयू) से डिजिटल रूपांतरण के साथ-साथ टिकाऊ बुनियादी ढांचे के विकास में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।

डिजिटल उत्कृष्टता केंद्र (डी-सीओई)

एमओपीएसडब्ल्यू और सी-डैक ने समुद्री क्षेत्र के लिए डिजिटल उत्कृष्टता केंद्र (डीसीओई) स्थापित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। 26 जून 2025 को नई दिल्ली में घोषित इस ऐतिहासिक पहल का उद्देश्य भारत के समुद्री उद्योग में डिजिटल रूपांतरण को गति देना है। डीसीओई उन्नत आईटी समाधान प्रदान करेगा, नवोन्मेषण को बढ़ावा देगा और एआई, आईओटी और ब्लॉकचेन जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के माध्यम से बंदरगाह संचालन और शिपिंग लॉजिस्टिक्स के आधुनिकीकरण का मार्गदर्शन करेगा। राष्ट्रीय समुद्री लक्ष्यों की सहायता करते हुए, यह केंद्र समुद्री भारत विजन 2030 और अमृत काल विजन 2047 के साथ संयोजन करते हुए हरित और टिकाऊ प्रचालनों को भी प्राथमिकता देगा।

सागर सेतु: समुद्री और लॉजिस्टिक्स प्रचालनों में क्रांतिकारी बदलाव

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने भारत के लॉजिस्टिक्स और समुद्री इको-सिस्टम में एक नए युग की शुरुआत करते हुए सागर सेतु प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया। 26 जून 2025 को केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल द्वारा उद्घाटन की गई इस डिजिटल पहल का उद्देश्य प्रचालन दक्षता को बढ़ाना, उत्पादकता में वृद्धि करना और व्यापार करने में सुगमता (ईओडीबी) लाना है।

पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के साथ संयोजित सागर सेतु कई सेवा प्रदाताओं को एकीकृत करता है ताकि निर्बाध एक्जिम संबंधित सेवाएं प्रदान की जा सकें। इस प्लेटफ़ॉर्म को पोत और कार्गो दस्तावेज़ीकरण के लिए प्रसंस्करण समय को उल्लेखनीय रूप से कम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिससे तीव्र, कागज़ रहित लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा मिलता है। विशेष रूप से, यह प्लेटफ़ॉर्म 80 से अधिक बंदरगाहों और 40 प्रमुख हितधारकों को जोड़ता है, जो व्यापक उद्योग के अंगीकऱण को प्रतिबिंबित करता है।

दृष्टि (कार्यान्वयन में तेजी लाने और ट्रैकिंग के लिए डेटा आधारित निर्णय समर्थन समीक्षा संस्थागत सूचना प्रणाली)

‘ दृष्टि’ संरचना को समुद्री लक्ष्यों को तीव्र गति से अर्जित करने के लिए लॉन्च किया गया था, जो समुद्री भारत विजन 2030 और अमृत काल विजन 2047 के कार्यान्वयन में तेजी लाने के लिए एक व्यापक निगरानी ढांचा प्रदान करता है। प्रधानमंत्री के “सुधार, प्रदर्शन, रूपांतरण, सूचना” के आदर्श वाक्य से प्रेरित होकर , दृष्टि को चार रणनीतिक स्तंभों- केपीआई मॉनिटरिंग, उपलब्धियों की ट्रैकिंग, संगठनात्मक निगरानी और कार्यात्मक सेल ओवरसाइट- पर निर्मित किया गया है।

इस अवसर पर, केंद्रीय जलमार्ग मंत्री, सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, भारत का समुद्री क्षेत्र एक रूपांतरणकारी डिजिटल बदलाव के दौर से गुजर रहा है। सागर सेतु प्लेटफॉर्म और डिजिटल उतकृष्टता केन्द्र पहल के शुभारंभ के साथ, हम दक्षता, पारदर्शिता और स्थिरता लाने के लिए आधुनिक प्रद्यौगिकी का उपयोग करने की अपनी अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं। बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स प्रचालनों को आधुनिक बनाने के अतिरिक्त, यह एक हरित, बेहतर और आत्मनिर्भर समुद्री अर्थव्यवस्था की ओर हमारी यात्रा को गति देगा। मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 और अमृत काल विजन 2047 के लक्ष्यों के अनुरूप, ये प्रयास प्रधानमंत्री के विकसित भारत के विजन को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। एआई , आईओटी और ब्लॉकचेन जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाकर, हम भविष्य के लिए तैयार बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहे हैं जो हमारे बंदरगाहों को सशक्त बनाता है, व्यापार को सुव्यवस्थित करता है और वैश्विक रूप से अग्रणी समुद्री देश के रूप में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करता है।

प्रमुख बंदरगाहों के दरों के परिमाण (एसओआर)

पारदर्शिता और व्यापार करने में सुगमता बढ़ाने के लिए सभी प्रमुख बंदरगाहों के लिए एक मानकीकृत दर स्केल (एसओआर) टेम्पलेट जारी किया गया। इस नए एसओआर का उद्देश्य बंदरगाह शुल्कों के लिए एक समान संरचना प्रदान करके विसंगतियों और व्याख्या के मुद्दों पर ध्यान देना करना है। व्यापक परामर्श और विद्यमान एसओआर और टैरिफ दिशानिर्देशों की व्यापक समीक्षा के बाद विकसित टेम्पलेट में दर अनुप्रयोगों के लिए मानकीकृत परिभाषाएं और पारदर्शी शर्तें शामिल हैं। बंदरगाहों को स्थानीय परिस्थितियों का अंगीकरण करने के लिए लचीलापन प्रदान करते हुए, एसओआर टेम्पलेट डिजिटल एकीकरण की सहायता करता है, जिससे बेहतर टैरिफ तुलना और स्पष्ट सेवा की सुविधा प्राप्त होती है। इस पहल का उद्देश्य व्यापार दक्षता में सुधार करना और बंदरगाह सेवाओं को उभरते बाजार की गतिशीलता के साथ संयोजित करना है।

लॉन्च के अवसर पर, केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन से प्रेरित होकर, हम अपने बंदरगाहों को अधिक पारदर्शी, कुशल और व्यापार के अनुकूल बनाने के लिए प्रक्रियाओं को मानकीकृत और प्रणालियों का डिजिटलीकरण कर रहे हैं। नए दरों के पैमाने और सागर सेतु जैसे तकनीक-आधारित प्लेटफ़ॉर्म व्यापार को सुव्यवस्थित करेंगे, निवेशकों का विश्वास बढ़ाएंगे और हमारे समुद्री इको-सिस्टम को वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के साथ संयोजित करेंगे।”

हरित क्षेत्र का प्रवेशद्वार: भारत के बंदरगाह हाइड्रोजन केन्द्रों में रूपांतरित हो रहे हैं

स्थिरता की दिशा में एक समानांतर लेकिन रणनीतिक रूप से संयोजित कदम के रूप में, ग्रीन हाइड्रोजन में वैश्विक रूप से अग्रणी देश बनने की भारत की महत्वाकांक्षा को ” गेटवे टू ग्रीन: असेसिंग पोर्ट रेडिनेस फॉर ग्रीन हाइड्रोजन ट्रांजिशन इन इंडिया” के प्रकाशन से बल मिला है। भारतीय बंदरगाह संघ (आईपीए) के सहयोग से तैयार की गई यह महत्वपूर्ण रिपोर्ट भारतीय बंदरगाहों को ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण और निर्यात के केंद्रों में बदलने के लिए एक रोडमैप की रूपरेखा प्रस्तुत करती है।

रिपोर्ट में हरित हाइड्रोजन उत्पादन के लिए भूमि सुविधा, मांग को प्रोत्साहित करना, साझा बुनियादी ढांचे में निवेश करना, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना और सक्रिय निवेश भूमिकाएं अपनाना जैसे रणनीतिक कार्रवाई क्षेत्रों की पहचान की गई है। वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट, पारादीप पोर्ट, दीनदयाल पोर्ट, जवाहरलाल नेहरू पोर्ट, मुंबई और कोचीन जैसे भारतीय बंदरगाह पूर्वी एशिया और यूरोपीय संघ की स्वच्छ ऊर्जा मांगों को पूरा करने के लिए विशेष रूप से अच्छी स्थिति में हैं।

अपने समापन भाषण में सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “भारत के बंदरगाह हरित हाइड्रोजन क्रांति के उत्प्रेरक के रूप में विकसित हो रहे हैं, जो कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का 2030 तक 5 मिलियन टन हरित हाइड्रोजन उत्पादन का विजन है। यह रोडमैप प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की परिकल्पना के अनुसार स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। अपने बंदरगाहों की क्षमता को सामने लाने के जरिए, हमारा लक्ष्य भारत को हरित हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण और निर्यात के लिए एक प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना है, जिससे भारत के जीवंत समुद्री इको-सिस्टम को प्राकृतिक लाभों का अवसर प्राप्त होगा।”

इन पहलों का शुभारंभ डिजिटल सशक्तिकरण और स्वच्छ ऊर्जा नेतृत्व के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। जैसा कि सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, इस बात पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है कि बंदरगाह व्यापार के पारंपरिक प्रवेश द्वार से विकसित होकर सतत विकास के उत्प्रेरक बन जाएं।

ये उद्यम न केवल वैश्विक लॉजिस्टिक्स परिदृश्य में भारत की स्थिति को मजबूत करते हैं, बल्कि डिजिटल रूप से सशक्त, आत्मनिर्भर और पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ भारत की कल्पना करते हुए राष्ट्रीय आर्थिक विकास में भी सार्थक योगदान देते हैं। इस कार्यक्रम में एमओपीएसडब्ल्यू के सचिव टीआर रामचंद्रन और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।

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