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भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार (NAI) ने अभिलेख पटल से दस्तावेज डाउनलोड करने के लिए उपयोगकर्ता शुल्क कम किया

भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार (एनएआई) ने अपने 135वें स्थापना दिवस के अवसर पर अभिलेखों तक पहुंच को आसान बनाने के लिए अभिलेख पटल (https://www.abhilekh-patal.in/jspui/) से दस्तावेज़ डाउनलोड करने के लिए उपयोगकर्ता शुल्क कम कर दिया है। डिजिटल छवियों (डिजिटाइज़ ऑन डिमांड सहित) की आपूर्ति के लिए, शुल्क में निम्नलिखित कमी की गयी हैः

भारतीय विद्वानों के लिए पहले 20 पेजों को डाउनलोड करना निःशुल्क होगा। विस्तृत स्लॉट नीचे देखे जा सकते हैं:

  1. 0-20 छवियां- निःशुल्क
  2. 20-50 चित्र- 2/- रुपये प्रति चित्र
  3. 50-100 चित्र- 3/- रुपये प्रति चित्र
  4. 100 से अधिक – 5/- रुपये प्रति चित्र

विदेशी विद्वानों के लिए पहले 20 पेजों को डाउनलोड करना निःशुल्क होगा। विस्तृत स्लॉट नीचे देखे जा सकते हैं:

  1. 0-20 पृष्ठ- निःशुल्क
  2. 20-50 पृष्ठ- 5/- रुपये प्रति पृष्ठ
  3. 50-100 पृष्ठ – 10/- रुपये प्रति पृष्ठ
  4. 100 से अधिक – 15/- रुपये प्रति पृष्ठ

यदि छवियों की संख्या अगले स्लॉट में आती है, तो उस स्लॉट की दर सभी पृष्ठों के लिए ली जाएगी। भारतीय और विदेशी विद्वानों दोनों को ओवरसाइज़ और बड़े आकार के मानचित्रों/दस्तावेजों की स्कैन की गई छवियां (ए-0 आकार तक) उपलब्ध कराने की दरें 20 रुपये से घटाकर 15 रुपये प्रति छवि (300 डीपीआई) कर दी गई हैं। न्यूनतम शुल्क हटा दिए गए हैं।

भारतीय विद्वानों के लिए रिप्रोग्राफी सेवा दरें (अर्थात भौतिक प्रिंटआउट) 5 रुपये से घटाकर 2 रुपये प्रति पृष्ठ कर दी गई हैं, तथा विदेशी विद्वानों के लिए 10 रुपये से घटाकर 4 रुपये प्रति पृष्ठ कर दी गई हैं। इसी प्रकार, भारतीय विद्वानों के लिए रंगीन पृष्ठों की फोटोकॉपी के लिए शुल्क 20 रुपये से घटाकर 8 रुपये प्रति पृष्ठ कर दिया गया है, तथा विदेशी विद्वानों के लिए 40 रुपये से घटाकर 16 रुपये प्रति पृष्ठ कर दिया गया है।

एनएआई हमारी ऐतिहासिक विरासत तक पहुंच को आसान बनाने के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध है और भविष्य में इस उद्देश्य के लिए कागजी कार्रवाई और फॉर्म भरने की प्रक्रिया को पूरी तरह से खत्म करने का प्रयास करेगा। इसने अपने सभी अभिलेखों को डिजिटल बनाने के लिए एक अत्यंत महत्वाकांक्षी कार्यक्रम का शुभारंभ किया है, जिसके परिणामस्वरूप अभिलेख पटल पर लगभग 8.81 करोड़ पृष्ठ होस्ट किए जा चुके हैं। एनएआई का प्रयास है कि अगले दो वर्षों में अपने अभिलेखों को पूरी तरह से डिजिटल बनाया जाए ताकि व्यापक पहुंच और किसी भी समय, कहीं भी अपनी होल्डिंग्स तक आसान पहुंच की सुविधा मिल सके।

भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार (एनएआई) भारत सरकार के अप्रचलित अभिलेखों का संरक्षक है तथा अभिलेख निर्माताओं और उपयोगकर्ताओं के उपयोग के लिए उन्हें ट्रस्ट के रूप में रखता है। एनएआई अपने अभिलेखों तक पहुंच को बढ़ाने और सरल बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को ध्यान में रखते हुए हाल ही में अभिलेखों तक पहुंच की वर्तमान नीति की समीक्षा की गई। यह पाया गया कि दुनिया भर के प्रमुख अभिलेखीय भण्डारों द्वारा अभिलेखों और अभिलेखीय होल्डिंग्स के लिए जारी डिजिटलीकरण ने लोगों द्वारा अभिलेखों तक पहुंचने के तरीके को बदल दिया है। एनएआई का ऑनलाइन एक्सेस पोर्टल- अभिलेख-पटल का 11 मार्च 2015 को शुभारंभ किया गया था और तब से यह अभिलेखागार के उपयोगकर्ताओं के बीच बेहद लोकप्रिय हो गया है। आज की तारीख में इसके 200 से अधिक देशों के लगभग तीस हज़ार पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं और अब तक 20 लाख से अधिक हिट दर्ज किए जा चुके हैं।

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