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टोल अनुपालन और डिजिटल प्रवर्तन को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम, 2026 में संशोधन किया गया

राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल अनुपालन को सुदृढ़ करने के लिए एक व्यापक और प्रौद्योगिकी-आधारित ढांचा प्रस्तुत करते हुए, भारत सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दरों का निर्धारण और संग्रह) (द्वितीय संशोधन) नियम, 2026 अधिसूचित किया है।

यह संशोधन बकाया उपयोगकर्ता शुल्क की वसूली के लिए एक संरचित तंत्र प्रदान करता है और टोल संग्रह के डिजिटल प्रवर्तन को सुदृढ़ करने के लिए, विशेष रूप से विकसित हो रही बाधा-मुक्त टोलिंग प्रणालियों के संदर्भ में, तथा राष्ट्रीय राजमार्गों पर उपयोगकर्ता शुल्क की कुशल और पारदर्शी वसूली सुनिश्चित करने के लिए प्रस्तुत किया गया है। ये नियम 17 मार्च 2026 से प्रभावी हो गए हैं।

इसमें नियमों में संशोधन करते हुए “बकाया उपयोगकर्ता शुल्क” की परिभाषा को भी शामिल किया गया है, जिसके अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह (ईटीसी) अवसंरचना द्वारा वाहन के गुजरने को दर्ज किया गया है, लेकिन लागू उपयोगकर्ता शुल्क प्राप्त नहीं हुआ है।

नियम 14 के तहत अधिसूचित, अवैतनिक उपयोगकर्ता शुल्क की वसूली के लिए संरचित तंत्र में एक प्रौद्योगिकी-आधारित इलेक्ट्रॉनिक सूचना (ई-सूचना) प्रणाली शामिल है, जिसके तहत पंजीकृत वाहन मालिकों को वाहन विवरण, यात्रा की तिथि और स्थान तथा देय राशि निर्दिष्ट करते हुए इलेक्ट्रॉनिक सूचनाएं जारी की जाएंगी। ये सूचनाएं एसएमएस, ईमेल, मोबाइल-आधारित एप्लिकेशन या अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से भेजी जा सकती हैं और एक निर्दिष्ट ऑनलाइन पोर्टल पर भी उपलब्ध होंगी।

नियमों में वाहनों की सुगम पहचान और बकाया शुल्क की वसूली के लिए राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली को वाहन डेटाबेस के साथ एकीकृत करने का प्रावधान भी किया गया है।

संशोधन के अनुसार, ई-नोटिस के जवाब में देय बकाया उपयोगकर्ता शुल्क लागू टोल राशि का दोगुना होगा। हालांकि, समय पर अनुपालन को प्रोत्साहित करने के लिए, यदि ई-नोटिस जारी होने के 72 घंटों के भीतर राशि का भुगतान कर दिया जाता है, तो बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के केवल मूल उपयोगकर्ता शुल्क ही देय होगा।

शिकायत निवारण का भी प्रावधान किया गया है। कोई भी पीड़ित वाहन मालिक या चालक ई-नोटिस जारी होने के 72 घंटों के भीतर निर्धारित पोर्टल के माध्यम से अभ्यावेदन प्रस्तुत कर सकता है। ऐसे अभ्यावेदन की जांच और निपटान पांच दिनों के भीतर किया जाना आवश्यक है, अन्यथा बकाया उपयोगकर्ता शुल्क का दावा निरस्त हो जाएगा।

यदि बकाया उपयोगकर्ता शुल्क 15 दिनों से अधिक समय तक बकाया रहता है और कोई अभ्यावेदन लंबित नहीं है, तो राशि वाहन प्रणाली में दर्ज की जाएगी और बकाया राशि का भुगतान होने तक वाहन संबंधी सेवाओं पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

इस संशोधन से टोल संचालन में पारदर्शिता और बढ़ेगी, निवेशकों का विश्वास मजबूत होगा और कानूनी एवं वित्तीय सुरक्षा प्रदान की जाएगी। यह संशोधन अनुपालन तंत्र को मजबूत करने और देश में आधुनिक, कुशल और बाधा-मुक्त टोल प्रणाली की ओर बदलाव को समर्थन देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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