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एनबीए ने किसानों, अनुसंधान संस्थानों और राज्य जैव विविधता बोर्डों को लाभ साझाकरण के रूप में 24 लाख रुपये से अधिक की राशि जारी की

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने हरियाणा के भैंस पालकों, 11 राज्यों के लाभार्थियों और तीन राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों सहित लाभ प्राप्त करने वालों को 24 लाख रुपये से अधिक की राशि जारी की है। यह राशि बहुमूल्य जैविक संसाधनों के संरक्षण के लिए जारी की गई, जिनका बाद में कंपनियों और अनुसंधान संगठनों द्वारा व्यावसायिक उपयोग किया गया। इससे यह सिद्ध होता है कि जैविक संसाधनों का संरक्षण करने वाले किसानों, पशुपालकों और संस्थानों को उनके जैविक संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग होने पर उचित और न्यायसंगत लाभ-साझाकरण प्राप्त हो सकता है।

चिन्हित लाभार्थियों के बीच लाभ-साझाकरण राशि का वितरण किया जा चुका है, जिनमें हरियाणा का एक पारिवारिक मुर्रा भैंस फार्म (4.30 लाख रुपये); आईसीएआर-राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (एनबीपीजीआर), नई दिल्ली (4.61 लाख रुपये); आईसीआरआईसैट, पाटनचेरु, हैदराबाद (5.36 लाख रुपये); आईसीएआर-राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (एनबीएफजीआर), लखनऊ (0.14 लाख रुपये) ; और महाराष्ट्र के राज्य जैव विविधता बोर्ड (3.22 लाख रु.), गुजरात (1.92 लाख रु.), तेलंगाना (1.52 लाख रु.), कर्नाटक (0.73 लाख रु.), राजस्थान (0.63 लाख रु.), आंध्र प्रदेश (0.54 लाख रु.), मध्य प्रदेश (0.46 लाख रु.), हरियाणा (0.44 लाख रु.), पंजाब (रु. 0.19 लाख), ओडिशा (0.17 लाख रुपये) और तमिलनाडु (0.13 लाख रुपये) शामिल हैं।

यह भुगतान मुर्रा भैंस की प्रजनन क्षमता तक पहुंच प्रदान करने से संबंधित है, जो भारत की सबसे अधिक व्यावसायिक दुग्ध उत्पादन वाली भैंसों की नस्लों में से एक है; इसमें चावल, सरसों, जंगली मूंग, मिर्च, टमाटर, खीरा, गाजर, भिंडी और अन्य फसलों सहित सैकड़ों फसल किस्में; बाजरे की 627 किस्में; वैज्ञानिक अनुसंधान में उपयोग की जाने वाली मक्का की 55 किस्में और मछली कोशिका संवर्धन तथा कपास की किस्में शामिल हैं।

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के एबीएस ढांचे के तहत, अनुमोदित नियमों के अनुसार लाभ-साझाकरण भुगतान वितरित किए जाते हैं। अनुसंधान संस्थानों को आवंटित राशि का उपयोग जैव विविधता संरक्षण और अनुसंधान कार्यकलापों के लिए किया जाएगा। कपास के आनुवंशिक संसाधनों तक पहुंच से प्राप्त एबीएस राशि 11 कपास उत्पादक राज्यों में वितरित की जाती है। किसानों और प्रजनकों जैसे व्यक्तिगत संरक्षकों के मामले में, लाभ-साझाकरण राशि का अधिकांश हिस्सा संबंधित राज्य जैव विविधता बोर्ड के माध्यम से लाभार्थियों को वितरित किया जाता है।

इस राशि के वितरण के साथ, एनबीए ने कुल मिलाकर लगभग 153 करोड़ रुपये की राशि एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग भुगतान के रूप में वितरित की है, जो संरक्षण को सुदृढ़ करने, जैविक संग्रहों को बनाए रखने, वैज्ञानिक अनुसंधान को समर्थन देने, वर्गीकरण संबंधी अध्ययनों में सुधार करने, जैव विविधता सर्वेक्षण करने और जैव विविधता संरक्षण के लिए क्षमता निर्माण करने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। इससे देश के जैविक संसाधनों का संरक्षण करने वालों को उनके उपयोग से प्राप्त लाभों का उचित हिस्सा मिलना सुनिश्चित होगा।

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