भारत

एनबीए ने भारत के 24 जिलों में जैविक संसाधनों के संरक्षण के लिए एबीएस वितरण के माध्यम से ₹10.40 लाख की राशि जारी की

जैव-विविधता के संरक्षण को मजबूती प्रदान करने और स्थानीय समुदायों का समर्थन करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, राष्ट्रीय जैव-विविधता प्राधिकरण(एनबीए) ने देशभर के लाभार्थियों को पहुंच और लाभ साझाकरण (एबीएस) ढांचे के तहत 10.40 लाख रूपए की राशि जारी की है। एबीएस ढांचा यह सुनिश्चित करता है कि जैविक संसाधनों के संरक्षण में लगे समुदायों को उनके व्यावसायिक उपयोग से होने वाले लाभ का न्यायसंगत हिस्सा प्राप्त हो, और यह भारत की राष्ट्रीय और वैश्विक प्रतिबद्धताओं को सुदृढ़ करता है।

वर्तमान एबीएस वितरण से महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, पुदुच्चेरी, मेघालय, गुजरात, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और हरियाणा सहित नौ-राज्यों और एक-केंद्र शासित प्रदेश के 24 जिलों के जैव-विविधता प्रबंधन समितियों (बीएमसी) को लाभ मिलेगा। ये बीएमसी ग्रामीण गांवों, तटीय क्षेत्रों और शहरी स्थानीय निकायों सहित विविध पारिस्थितिक परिदृश्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जहां स्थानीय समुदाय जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके अलावा, हरियाणा में डेयरी फार्म चलाने वाले किसान को भारत की प्रसिद्ध मुर्रा नस्ल के भैंस प्रदान करने के लिए एबीएस राशि दी गई, जिससे देशी जानवरों के महत्व को मान्यता मिली।

एबीएस निधि कई जैविक संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग से बनाई गई थी, जो भारत के बायो-आर्थिक क्षेत्र के विकास में मदद करती हैं। इनमें जैव-प्रौद्योगिकी और दवाईयों में उपयोग किए जाने वाले सूक्ष्मजीव जैसे लाभकारी बैक्टीरिया, पौष्टिक-औषधीय पदार्थों और टिकाऊ जैव-उत्पादों में लगाए जाने वाले समुद्री सूक्ष्म शैवाल एवं कृषि, प्रसाधन सामग्री और खाद्य उद्योगों में इस्तेमाल किए जाने वाले सीवीड शामिल हैं।

प्राप्त जैविक संसाधनों में तुलसी के पत्ते, सहजन (मोरिंगा) के बीज, नीम के बीज, रीठा के बीज, रोज़मेरी के पत्ते, अश्वगंधा की जड़ें, मशरूम से प्राप्त कीटोसैन, और पैसिफिक व्हाइट श्रिम्प शामिल हैं। ये उदाहरण दिखलाते हैं कि जैव विविधता न सिर्फ पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन में योगदान देता है, बल्कि वैज्ञानिक नवाचार, उद्योगों के विकास और ग्रामीण आजीविका में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

एबीएस तंत्र के माध्यम से, जैविक संसाधनों का उपयोग करने वाले उपयोगकर्ताओं द्वारा होने वाले लाभ का एक हिस्सा उन स्थानीय समुदायों के साथ साझा किया जाता है, जो इन जैविक संसाधनों का संरक्षण करते हैं। यह प्रणाली संरक्षण के लिए प्रत्यक्ष आर्थिक प्रोत्साहन प्रदान करता है और साथ ही प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग को भी बढ़ावा देता है।

राष्ट्रीय स्तर पर एबीएस वितरण का संचयी मूल्य ₹145 करोड़ (लगभग 16 मिलियन अमेरिकी डॉलर) को पार कर चुका है, जो भारत के जैव-विविधता शासन ढांचे के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है। राष्ट्रीय जैव-विविधता प्राधिकरण (एनबीए) भारत की पहुंच और लाभ साझाकरण (एबीएस) के लिए जैव-विविधता पर सम्मेलन और नागोया प्रोटोकॉल के तहत प्रतिबद्धताओं को लागू करने में केंद्रीय भूमिका निभाता है, साथ ही राष्ट्रीय जैव-विविधता लक्ष्यों और कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचा में भी योगदान दे रहा है।

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