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NCSC ने तरनतारन मामले में आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी के लिए पाँच दिनों में कार्रवाई और रिपोर्ट की सिफारिश की

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC), के अध्यक्ष किशोर मकवाना की अध्यक्षता में आज तरनतारन, पंजाब में चुनावी अभियान के दौरान पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा द्वारा पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री स्व. बूटा सिंह के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी से संबंधित प्राथमिकी पर सुनवाई की।

प्रत्युत्तर देने वाले प्राधिकरणों की ओर से पंजाब पुलिस के हरप्रीत सिंह, डीएसपी और गुलज़ार सिंह, डीएसपी, ई ओ एवं साइबर क्राइम, उपस्थित थे। याचिकाकर्ता, सरबजोत सिंह, पुत्र स्व. बूटा सिंह भी सुनवाई के दौरान उपस्थित थे।

पक्षों की सुनवाई करने और अभिलेखों की समीक्षा के बाद आयोग ने जांच पूरी करने, आरोपियों की गिरफ्तारी करने तथा कार्रवाई की रिपोर्ट (Action Taken Report) प्रस्तुत करने में हुई देरी पर गम्भीर चिंता व्यक्त की, जबकि पिछली सुनवाई के दौरान इस बाबत विशेष सिफारिशें की जा चुकी थीं।

5 मई 2026 को हुई सुनवाई में आयोग ने लागू नियमों के अनुसार निर्धारित अवधि के भीतर जांच पूरी करने की सिफारिश की थी।

याचिकाकर्ता की तरफ से दी गई यह शिकायत कि वह कथित आरोपियों से धमकी भरे फोन प्राप्त कर रहे हैं, को ध्यान में रखते हुए आयोग ने याचिकाकर्ता और उनके आश्रितों को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 15A के तहत आवश्यक सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश भी दिया था। आयोग ने कार्रवाई की रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर प्रस्तुत करने की मांग की थी। तथापि आयोग ने नोट किया कि अपेक्षित रिपोर्ट अभी तक प्राप्त नहीं हुई है।

इस देरी को गंभीरता से लेते हुए आयोग ने संबंधित प्राधिकारियों को विधि के अनुसार आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई शुरू करने और पाँच दिनों के भीतर आयोग को कार्रवाई की स्थिति (status of the action taken) प्रस्तुत करने की सिफारिश की।

अभियोगकर्ता के अनुसार, आयोग ने यह आग्रह किया कि जांच शीघ्रता से पूरी की जाए और बिना किसी और विलम्ब के योग्य न्यायालय के समक्ष चार्जशीट दाखिल की जाए। आयोग ने यह भी कहा कि जांच व गिरफ्तारी में हुई देरी की जिम्मेदारी का परीक्षण संबंधित प्राधिकारी द्वारा किया जाना चाहिए।

यदि जांच अधिकारी/अधिकारियों द्वारा जानबूझकर कोई लापरवाही सिद्ध होती है तो कानून के अनुसार उपयुक्त विभागीय कार्रवाई सहित एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 4 के तहत कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है। आयोग ने अपनी सिफारिशों पर 30 दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है।

आयोग ने याचिकाकर्ता की सुरक्षा को विशेष गंभीरता से लिया। सरबजोत सिंह के कथित सतत् धमकियों को देखते हुए आयोग ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 15A के अनुसार याचिकाकर्ता एवं उनके आश्रितों के लिए दिल्ली व पंजाब दोनों में तत्काल और पर्याप्त पुलिस सुरक्षा की सिफारिश की है।

आयोग ने दोहराया कि पीड़ितों, शिकायतकर्ताओं, गवाहों तथा उनके आश्रितों की सुरक्षा एक महत्वपूर्ण वैधानिक सुरक्षा है। संबंधित प्राधिकारियों को सुनिश्चित करना चाहिए कि याचिकाकर्ता बिना किसी भय, दमन या धमकी की जांच कर सके।

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