भारत

NHAI ने पानीपत-जालंधर राजमार्ग परियोजना विवाद में मध्यस्थता दावों का सफलतापूर्वक बचाव किया

राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में सार्वजनिक धन बचाते हुए, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण-एनएचएआई ने राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के पानीपत-जालंधर खंड से संबंधित दो प्रमुख मध्यस्थता मामलों में अपने पक्ष का सफलतापूर्वक बचाव किया है। इन विवादों में रियायतधारकों के राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के निष्पादन और संचालन से संबंधित एनएचएआई के विरुद्ध उच्च मूल्य दावे शामिल थे। दोनों मध्यस्थता मामलों में कथित सेवा समाप्ति भुगतान, टोल राजस्व हानि मुआवजा, परियोजना विस्तार लागत, मूल्य वृद्धि, रियायत अवधि विस्तार, परियोजना में देरी से हुई हानि और अन्य वित्तीय दावों सहित 8,375 करोड़ रुपये से अधिक के दावे किए गए थे।

व्यापक सुनवाई और संविदा प्रावधानों, तकनीकी रिकॉर्ड, साक्ष्यों और विशेषज्ञों की राय पर विस्तृत रुप से गौर करने के बाद, माननीय मध्यस्थ न्यायाधिकरण ने एनएचएआई की कई महत्वपूर्ण दलीलों को सही ठहराते हुए उसके पक्ष में अंतिम निर्णय दिया।

पहली मध्यस्थता कार्यवाही में, रियायत समझौते के तहत टोल वसूली में कथित नुकसान, अवसर हानि, सेवा समाप्ति भुगतान और कार्यक्षेत्र में बदलाव संबंधी विवादों में 5,443 करोड़ रुपये से अधिक के क्षतिपूर्ति दावे किए गए थे। एनएचएआई ने इन दावों का जोरदार खंडन करते हुए कहा कि संविदात्मक की समाप्ति वैध थी और यह रियायतधारक की चूक और कमियों के कारण हुई।

विस्तृत अधिनिर्णय के बाद, माननीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने एनएचएआई के विरुद्ध मौद्रिक दावे खारिज कर दिए। न्यायाधिकरण ने अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन, परियोजना दायित्वों और व्यय देनदारियों से संबंधित एनएचएआई के कई प्रतिदावों और बचाव को भी स्वीकार किया। दावों और प्रतिदावों पर सुनवाई के बाद, न्यायाधिकरण ने अपने अंतिम निर्णय में एनएचएआई के पक्ष में ब्याज सहित लगभग 115.73 करोड़ रुपये का फैसला सुनाया।

दूसरे मध्यस्थता मामले में 2,931.79 करोड़ रुपये से अधिक के दावे में दावेदार ने परियोजना निष्पादन के दौरान कथित देरी से हुए नुकसान, लागत में बढ़ोतरी, परियोजना लंबा खींचने से संबंधित खर्च, निष्क्रियता लागत और अन्य वित्तीय प्रभावों के लिए मुआवजे की मांग की। एनएचएआई ने संविदात्मक अधिकार न होने, सहायक साक्ष्य अपर्याप्त होने, वजह बताने में विफल रहने और संविदात्मक प्रक्रियाओं तथा दस्तावेजी आवश्यकताओं के अनुपालन न करने का तर्क देते हुए इन दावों का पूरी तरह विरोध किया।

मामले पर विचार के बाद, माननीय न्यायाधिकरण ने एनएचएआई के विरुद्ध दावों को काफी हद तक खारिज कर दिया और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के प्रमुख प्रतिदावों को बरकरार रखा। राशि समायोजन और भरपाई के बाद, न्यायाधिकरण ने एनएचएआई के पक्ष में लगभग 704.23 करोड़ रुपये की राशि प्रदान करने का निर्णय दिया।

इससे पहले, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने गुजरात में एनएच-48 के कामरेज-चलथान खंड के छह लेन के निर्माण से संबंधित एक अन्य मध्यस्थता मामले का सफलतापूर्वक बचाव किया था, जिससे सार्वजनिक धन की काफी बचत हुई थी। ठेकेदार के लगभग 174.49 करोड़ रुपये के दावों पर मध्यस्थ न्यायाधिकरण ने मामले के निपटान के लिए केवल 54 लाख रुपये का मुआवजा दिया था।

राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना निष्पादन संबंधी मध्यस्थता मामलों में मिली सफलताओं से सार्वजनिक धन की सुरक्षा, संविदा दायित्वों का सख्त अनुपालन और एनएचएआई का सुसंगत दृष्टिकोण सुदृढ़ होता है।

Editor

Recent Posts

PoK में पाकिस्तानी सेना की हिंसक कार्रवाई में 50 से ज़्यादा लोग मारे गए, सैकड़ों घायल हुए

पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर में अशांति बढ़ती जा रही है। पिछले चार दिनों में,…

3 घंटे ago

जम्मू-कश्मीर में, कुलगाम जिले में कल हुए आतंकी हमले में घायल, दूसरे मजदूर की मौत

जम्मू-कश्मीर के कुलगाम ज़िले के केलम में आतंकी हमले में घायल दूसरे श्रमिक की आज…

3 घंटे ago

GST संग्रह 2 लाख 11 हजार 205 करोड़ रुपये तक पहुंचा

वस्तु और सेवा कर-जी.एस.टी. संग्रह में पिछले महीने उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई और यह…

3 घंटे ago

19 किलोग्राम के वाणिज्यिक एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत लगभग 200 रुपये कम हुईं

तेल विपणन कंपनियों ने आज 19 किलोग्राम वाले वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर की कीमतें लगभग दो…

3 घंटे ago

गृह मंत्री अमित शाह ने मानसून 2026 में बाढ़ प्रभावित राज्यों को SDRF के तहत ₹2,117.85 करोड़ की अग्रिम केंद्रीय सहायता को मंजूरी दी

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस वर्ष मानसून के दौरान बाढ़ से प्रभावित राज्यों…

3 घंटे ago