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भारतीय फार्माकोपिया आयोग ने बिहार, महाराष्ट्र और मिज़ोरम की राज्य फार्मेसी परिषदों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए

देश भर में औषधि सुरक्षा को मजबूत करने और औषधियों के तर्कसंगत उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था, भारतीय फार्माकोपिया आयोग (आईपीसी), गाजियाबाद ने आज आईपीसी, गाजियाबाद में बिहार राज्य फार्मेसी परिषद, महाराष्ट्र राज्य फार्मेसी परिषद और मिजोरम राज्य फार्मेसी परिषद के साथ तीन समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।

आईपीसी के सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक डॉ. वी. कलैसेल्वन, बिहार राज्य फार्मेसी परिषद के अध्यक्ष डॉ. प्रकाश सिन्हा, मिजोरम राज्य फार्मेसी परिषद के उपाध्यक्ष डॉ. एच. लालहलेनमाविया और महाराष्ट्र राज्य फार्मेसी परिषद के अध्यक्ष अतुल अहिरे ने वरिष्ठ अधिकारियों और भाग लेने वाले संगठनों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए।

इन एमओयू का उद्देश्य आईपीसी और राज्य फार्मेसी परिषदों के बीच सहयोग के प्रयासों को मज़बूत करना है, ताकि संबंधित राज्यों में दवाओं के तर्कसंगत उपयोग को बढ़ावा दिया जा सके, फार्माकोविजिलेंस गतिविधियों को बढ़ाया जा सके और मरीज़ों की सुरक्षा से जुड़ी पहलों को आगे बढ़ाया जा सके।

इस सहयोग के अंतर्गत, साझेदार पंजीकृत फार्मासिस्टों के बीच भारत की राष्ट्रीय दवा सूची (एनएफआई) के व्यापक प्रसार और उपयोग को बढ़ावा देने के लिए काम करेंगे ताकि दवाओं का सुरक्षित, प्रभावी और साक्ष्य-आधारित उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। साथ ही, राज्य भर के स्वास्थ्य केंद्रों में स्थित अस्पतालों की फार्मेसियों में एनएफआई को एक अनिवार्य संदर्भ दस्तावेज के रूप में स्थापित करने के प्रयास भी किए जाएंगे।

यह सहयोग, प्रतिकूल दवा प्रतिक्रिया (एडीआर) रिपोर्टिंग तंत्र को बढ़ावा देकर और पीवीपी के समन्वय से एडीआर निगरानी केंद्रों (एएमसी) की स्थापना को सुगम बनाकर, भारत के फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम (पीवीपी) को और अधिक मजबूत करेगा। इससे दवा सुरक्षा निगरानी प्रणालियों को सुदृढ़ करने और फार्माकोविजिलेंस गतिविधियों में फार्मासिस्टों और स्वास्थ्य पेशेवरों की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करने की उम्मीद है।

इसके अतिरिक्त, आईपीसी और राज्य फार्मेसी परिषदें संयुक्त रूप से फार्मासिस्टों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं और सतत शिक्षा पहल आयोजित करेंगी ताकि दवाओं के तर्कसंगत उपयोग, फार्माकोविजिलेंस और फार्माकोपियल मानकों में व्यावसायिक दक्षता को बढ़ाया जा सके। यह साझेदारी दवा सुरक्षा, नियामक मानकों और तर्कसंगत फार्माकोथेरेपी के क्षेत्रों में अनुसंधान और व्यावसायिक सहयोग को भी बढ़ावा देगी।

समझौता ज्ञापनों में लक्षित जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से औषधि सुरक्षा, औषध संहिता मानकों और रोगी सुरक्षा के प्रति जन और पेशेवर जागरूकता को मजबूत करने की परिकल्पना भी की गई है। आईपीसी तकनीकी मार्गदर्शन, वैज्ञानिक सहायता और विशेषज्ञता प्रदान करेगा, जबकि राज्य फार्मेसी परिषदें पहलों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए फार्मासिस्टों, अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित करने में सहायता करेंगी।

यह सहयोग स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों को मजबूत करने और देश भर में सुदृढ़ फार्माकोविजिलेंस प्रथाओं और उन्नत पेशेवर क्षमता के माध्यम से दवाओं के सुरक्षित और अधिक प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करने की दिशा में साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

इस अवसर पर भारत सरकार के नीति आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. वी.के. पॉल, उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री के सलाहकार डॉ. जी.एन. सिंह और एम्स कल्याणी के अध्यक्ष प्रो. वाई.के. गुप्ता भी उपस्थित थे।

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