राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने उस मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया है जिसमें बताया गया है कि एक बेसहारा मरीज़ के बच्चे की सरकारी मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (आईएचबीएएस) के शौचालय में प्रसव के बाद सुविधाओं के अभाव में मृत्यु हो गई। उसे न्यायालय के आदेश के बाद 7 सितंबर, 2025 को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बताया जा रहा है कि अस्पताल के कर्मचारियों को गर्भनाल काटने के लिए क्लैंप लगाने में भी काफ़ी समय लगा। उसके बाद उन्हें एम्बुलेंस से नजदीक के स्वामी दयानंद अस्पताल ले जाया गया। लेकिन, बच्चे की जान नहीं बचाई जा सकी।
आयोग ने पाया है कि मीडिया रिपोर्ट में दी गई जानकारी यदि सत्य है तो यह मानवाधिकार उल्लंघन का गंभीर मुद्दा है। इसलिए आयोग ने दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी करके दो सप्ताह में इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट देने के लिए कहा है।
10 सितंबर, 2025 को प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल के कर्मचारी ने पुष्टि की है कि आईएचबीएएस में प्रसव के लिए आवश्यक सुविधाओं के अभाव के बावजूद गर्भवती महिला को वहां भर्ती कराया गया था। बताया जा रहा है कि अब उसका उपचार दूसरे सरकारी अस्पताल में चल रहा है।
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