नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने 5वें ई-फास्ट इंडिया शिखर सम्मेलन 2026 में उद्घाटन भाषण दिया। इस अवसर पर उन्होंने भारत की स्वच्छ परिवहन यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में ‘प्लेटफॉर्म फॉर एग्रीगेटिंग क्लीन ट्रांसपोर्ट (पीएसीटी)’ और ‘जीरो एमिशन ट्रक (ज़ेडईटी)’ मार्केटप्लेस का शुभारंभ किया।
अपने संबोधन में राजीव गौबा ने कहा कि ई-फास्ट चार वर्षों में संवाद के मंच से विकसित होकर समन्वित कार्रवाई के माध्यम के रूप में उभरा है। यह भारत में स्वच्छ परिवहन से संबंधित विमर्श में इरादे से क्रियान्वयन की ओर हुए बदलाव को दर्शाता है। राजीव गौबा ने जोर देकर कहा कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर संक्रमण आर्थिक, पर्यावरणीय और रणनीतिक दृष्टि से अनिवार्य है। यह वर्ष 2070 तक नेट जीरो के वैश्विक संकल्प को पूरा करने और 2047 तक विकसित भारत के विजन को साकार करने के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाना देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए महत्वपूर्ण है।
उन्होंने सरकार की विभिन्न पहलों के माध्यम से हुई प्रगति का उल्लेख किया। इनमें ऑटोमोबाइल और एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाएं, तेल विपणन कंपनियों द्वारा किए गए निवेश के कारण सार्वजनिक चार्जिंग अवसरंचना का विस्तार तथा एफएएमई, पीएम ई-ड्राइव (डीआरआईवीई), परिवर्तन और पीएम ई-बस सेवा जैसी मांग-पक्षीय योजनाएं शामिल हैं1 इन पहलों से इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में वृद्धि को समर्थन मिला है।
भारी वाणिज्यिक वाहन क्षेत्र को संबोधित करते हुए राजीव गौबा ने कहा कि भारी ट्रक वाहन बेड़े का केवल 3-4 प्रतिशत हैं, लेकिन परिवहन क्षेत्र से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में एक-तिहाई से अधिक के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि लॉजिस्टिक्स ऑपरेटरों के बीच संरचनात्मक विखंडन, वित्तपोषण की उच्च लागत और समन्वित कॉरिडोर योजना का अभाव बाजार के विकास में प्रमुख बाधाएं हैं। उन्होंने कहा कि ‘पीएसीटी’ और ‘जे़ईटी’ मार्केटप्लेस को ठीक इसी कमी को दूर करने के लिए तैयार किया गया है। इसके माध्यम से मांग एकत्रीकरण, वित्तपोषण संबंधी नवाचार और कॉरिडोर-आधारित परियोजना निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में लगभग 800 भारी इलेक्ट्रिक ट्रकों की बिक्री हुई। ये इस बात को रेखांकित करता है कि प्रमुख माल ढुलाई कॉरिडोरों का रणनीतिक विद्युतीकरण आवश्यक है, क्योंकि भारत में 70 प्रतिशत माल ढुलाई सड़क मार्ग से होती है। उन्होंने मिश्रित वित्तपोषण तंत्र, लीजि़ंग मॉडल और अधिक मजबूत डेटा प्रणालियों का आह्वान किया, ताकि इलेक्ट्रिक ट्रकों के लिए पूंजी की लागत को डीजल से चलने वाले समकक्ष ट्रकों के करीब लाया जा सके।
राजीव गौबा ने लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाताओं, वाहन निर्माताओं, चार्जिंग प्वाइंट ऑपरेटरों और वित्तपोषकों से प्लेटफॉर्म के साथ जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इन सभी हितधारकों की भागीदारी से ऐसे कॉरिडोर वित्तपोषण साधन और वाणिज्यिक मॉडल तैयार करने में मदद मिलेगी, जो भारत में इलेक्ट्रिक माल ढुलाई का भविष्य निर्धारित करेंगे।
उन्होंने कहा कि यह शिखर सम्मेलन माल ढुलाई क्षेत्र से कहीं आगे तक लागू होने वाले व्यापक संस्थागत सबक को दर्शाता है। जटिल और अधिक पूंजी की आवश्यकता वाले क्षेत्रों में सरकार तब सबसे अधिक प्रभावी होती है, जब वह सीधे परिणाम निर्धारित करने के बजाय ऐसी प्रणालियां तैयार करती है, जो बाजार को स्वयं उपयुक्त समाधान खोजने में सक्षम बनाती हैं। उन्होंने ‘पीएसीटी’ को इसी प्रकार के एक सक्षमकारी तंत्र के रूप में वर्णित किया।
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