प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि हमारा लक्ष्य भारत को दुनिया के शीर्ष रक्षा निर्यातकों में से एक बनाना है। उन्होंने कहा कि भारत अब घरेलू स्तर पर ही अपने अधिकांश रक्षा उपकरणों का उत्पादन करता है जिसमें औसतन हर 40 दिन में नौसेना के बेड़े में एक नया युद्धपोत या पनडुब्बी जुड़ जाती है। भारतीय सशस्त्र बलों के साथ दीपावली मनाने की अपनी वार्षिक परंपरा जारी रखते हुए प्रधानमंत्री ने कल गोवा और कारवार तट पर भारत के पहले स्वदेश में निर्मित विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत पर नौसेना कर्मियों के साथ प्रकाश पर्व मनाया।
हमारा लक्ष्य है कि भारत पूरी दुनिया के टॉप डिफेंस एक्सपोर्टर देशों में शामिल हो। पिछले एक दशक में हमारा डिफेंस एक्सपोर्ट 30 गुना से अधिक बढ़ गया है और सफलता के पीछे हमारी बहुत बड़ी भूमिका डिफेंस स्टार्टअप की स्वदेशी डिफेंस इकाइयों की है। आज हमारा स्टार्टअप भी दम दिखा रहा है।
प्रधानमत्री ने कहा कि भारत अब रक्षा उपकरणों के निर्यात की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
हमारी ब्रह्मोस और आकाश जैसी मिसाइलों ने ऑपरेशन सिंदूर में भी अपनी क्षमता साबित की है। अब दुनिया के कई देश इन मिसाइलों को खरीदना चाहते हैं। भारत तीनों ही सेनाओं के लिए हथियार और उपकरण एक्सपोर्ट करने की क्षमता बिल्ड कर रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में हमारे सुरक्षा बलों की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है और हिमालय से लेकर सागर की लहरों तक सैनिकों का जज़्बा भारत का जयघोष करता है।
आज भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। हम 140 करोड़ देशवासियों के सपनों को पूरा कर रहे हैं। जमीन से लेकर अंतरिक्ष तक पहले जो कल्पना से भी परे था आज वो सफलताएं, वो उपलब्धियां हम अपने सामने देख रहे हैं। ये गति, ये प्रगति, यह परिवर्तन देश का विश्वास और विश्वास की कोख से पैदा हुआ विकास का मंत्र राष्ट्र निर्माण के इस महान कार्य में हमारे सैन्य बलों की बहुत बड़ी भूमिका है।
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