भारत सरकार ने उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत वित्तीय सहायता के प्रावधान के माध्यम से विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाने, महत्वपूर्ण दवाओं के निर्माण के लिए उपयोग किए जाने वाले महत्वपूर्ण सक्रिय औषधि अवयवों (एपीआई) की आपूर्ति में व्यवधान को रोकने और चिकित्सा उपकरण उद्योग को बढ़ावा देने के लिए फार्मास्युटिकल क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की दिशा में व्यापक प्रयास किए हैं। इस योजना ने घरेलू विनिर्माण को मजबूत किया है, आयात निर्भरता को कम किया है और प्रौद्योगिकी अपनाने को प्रोत्साहित किया है। इससे फार्मा और मेडटेक क्षेत्र में विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण क्षमताओं को हासिल करने में मदद मिली है।
मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप, पीएलआई योजनाएं जैसे, ए) महत्वपूर्ण प्रारंभिक सामग्री (केएसएम)/ दवा बनाने के काम आने वाली मध्यवर्ती सामग्री (डीआई)/ सक्रिय औषधि अवयवों (एपीआई) के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए पीएलआई योजना, जिसे आमतौर पर बल्क ड्रग्स के लिए पीएलआई योजना के रूप में जाना जाता है; बी) फार्मास्यूटिकल्स के लिए पीएलआई योजना; ग) फार्मास्यूटिकल्स विभाग, रसायन और उर्वरक मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित चिकित्सा उपकरणों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए पीएलआई योजना महत्वपूर्ण फार्मास्युटिकल सामग्री, उच्च मूल्य वाली दवाओं और उन्नत चिकित्सा उपकरणों में विनिर्माण क्षमताओं के विस्तार का समर्थन कर रही है।
अ) बल्क ड्रग्स के लिए पीएलआई योजना: महत्वपूर्ण एपीआई में आत्मनिर्भरता को मजबूत करना
सरकार ने 2020 में 6,940 करोड़ रुपये के कुल वित्तीय परिव्यय के साथ बल्क ड्रग्स के लिए पीएलआई योजना को मंजूरी दी। यह योजना 41 चिन्हित महत्वपूर्ण उत्पादों के घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने और विशेष रूप से एपीआई और अन्य आवश्यक फार्मास्युटिकल निर्माण ब्लॉक्स के लिए आयात पर निर्भरता कम करने के लिए शुरू की गई थी।
यह योजना ग्रीनफील्ड विनिर्माण परियोजनाओं में बड़े निवेश को आकर्षित करने और भारत की आपूर्ति-श्रृंखला लचीलेपन को मजबूत करने के लिए डिज़ाइन की गई है। इस योजना के तहत 48 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। जून 2026 तक, 5,210.74 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है, जो 4,330 करोड़ रुपये के प्रतिबद्ध निवेश से अधिक है। 28 एपीआई/केएसएम के निर्माण के लिए 39 परियोजनाएं चालू की गई हैं।
इस योजना ने पेनिसिलिन-जी, क्लैवुलैनिक एसिड और रिफैम्पिसिन जैसे महत्वपूर्ण किण्वन-आधारित उत्पादों के घरेलू उत्पादन को भी सक्षम बनाया है, जो पहले काफी हद तक आयात पर निर्भर थे। जून 2026 तक, पीएलआई योजना के लाभार्थियों ने लगभग 560.16 करोड़ रुपये के निर्यात सहित 3,792.49 करोड़ रुपये की बिक्री हासिल की थी, जबकि लगभग 5,127 व्यक्तियों के लिए रोजगार के अवसर पैदा किए थे।
आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम, में परियोजनाओं सहित नई विनिर्माण इकाइयों की शुरुआत, महत्वपूर्ण फार्मास्युटिकल कच्चे माल के लिए घरेलू पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत कर रही है। लाइफियस फार्मा, किनवान प्राइवेट लिमिटेड, आंध्र ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (एओएल), मेघमणि एलएलपी, सेंट्रिएंट फार्मास्यूटिकल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियों ने पेनिसिलिन जी, क्लैवुलैनिक एसिड, सल्फाडियाज़िन, एटोरवास्टेटिन, पैरा एमिनो फिनोल (पीएपी) जैसे महत्वपूर्ण एपीआई/केएसएम/डीआई के घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने में योगदान दिया है।
ब) फार्मास्यूटिकल्स के लिए पीएलआई योजना: उच्च मूल्य वाले फार्मास्युटिकल विनिर्माण को बढ़ावा देना
फार्मास्यूटिकल्स के लिए पीएलआई योजना को 2021 में 15,000 करोड़ रुपये के कुल वित्तीय परिव्यय के साथ अनुमोदित किया गया था। यह योजना भारत की विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाने, निवेश और उत्पादन बढ़ाने और उच्च मूल्य वाले फार्मास्युटिकल उत्पादों की ओर बदलाव को प्रोत्साहित करने का प्रयास करती है।
यह योजना बायोफार्मास्यूटिकल्स, कॉम्प्लेक्स जेनरिक, पेटेंट और ऑफ-पेटेंट दवाओं, दुलर्भ बीमारियों के इलाज, रोकथाम या निदान के लिए विशेष रूप से विकसित दवाओं, ऑटो-इम्यून दवाओं और अन्य उच्च मूल्य वाले फार्मास्युटिकल उत्पादों के साथ-साथ थोक औषधि पीएलआई योजना के तहत कवर नहीं किए गए निर्दिष्ट एपीआई, डीआई और केएसएम सहित श्रेणियों में विनिर्माण का समर्थन करती है।
इस योजना के तहत 20 एमएसएमई सहित कुल 55 आवेदकों का चयन किया गया है। जून 2026 तक, इस योजना ने वास्तविक निवेश में 46,744 करोड़ रुपये आकर्षित किए हैं, जो 17,275 करोड़ रुपये के लक्षित निवेश से काफी अधिक है।
इस योजना ने जून 2026 तक 1,21,294 रोजगारों के सृजन के साथ रोजगार के अवसर पैदा करने में भी योगदान दिया है। लाभार्थी कंपनियों ने वित्त वर्ष 2022-23 में प्रदर्शन अवधि की शुरुआत से जून 2026 तक 2,57,370 करोड़ रुपये के निर्यात सहित 4,02,869 करोड़ रुपये की संचयी बिक्री हासिल की है।
सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज लिमिटेड, अरबिंदो फार्मा लिमिटेड, डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज लिमिटेड, ल्यूपिन लिमिटेड, सिप्ला लिमिटेड, इंटास फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड, टोरेंट फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड जैसी कंपनियों ने जटिल जेनेरिक, बायोसिमिलर, ऑटो-इम्यून दवाओं और अन्य उच्च मूल्य वाली फार्मास्यूटिकल्स के निर्माण के लिए अपनी क्षमताओं का विस्तार किया है
स) चिकित्सा उपकरणों के लिए पीएलआई योजना: उच्चस्तरीय चिकित्सा प्रौद्योगिकी के स्वदेशी विनिर्माण को आगे बढ़ाना
चिकित्सा उपकरणों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए पीएलआई योजना को 2020 में 3,420 करोड़ रुपये के कुल वित्तीय परिव्यय के साथ मंजूरी दी गई थी। यह योजना घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और चिकित्सा उपकरण क्षेत्र में बड़े निवेश को आकर्षित करने के लिए शुरू की गई थी, खासकर उन क्षेत्रों में जहां भारत की महत्वपूर्ण आयात निर्भरता थी।
यह योजना पांच साल की अवधि के लिए भारत में निर्मित पात्र चिकित्सा उपकरणों की वृद्धिशील बिक्री पर 5 प्रतिशत प्रोत्साहन प्रदान करती है। इसमें चार व्यापक खंड शामिल हैं, कैंसर देखभाल/रेडियोथेरेपी चिकित्सा उपकरण; रेडियोलॉजी और इमेजिंग उपकरण; एनेस्थीसिया, कार्डियो-रेस्पिरेटरी और रीनल केयर डिवाइस; और इम्प्लांटेबल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों सहित प्रत्यारोपण।
इस योजना ने उच्चस्तरीय चिकित्सा उपकरणों की एक श्रृंखला के लिए घरेलू विनिर्माण क्षमताओं की स्थापना की सुविधा प्रदान की है जो पहले मुख्य रूप से आयात किए जाते थे। इस योजना के तहत 57 विशिष्ट चिकित्सा उपकरणों का उत्पादन शुरू हो गया है, जिसमें एमआरआई मशीन, सीटी स्कैनर, कैथ लैब्स, लीनियर एक्सेलेरेटर, सी-आर्म्स, मैमोग्राफी मशीन, अल्ट्रासाउंड सिस्टम, एनेस्थीसिया मशीन और हार्ट वाल्व शामिल हैं।
इस पहल ने प्रमुख वैश्विक निर्माताओं को भी आकर्षित किया है और भारत में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और उन्नत विनिर्माण क्षमताओं को प्रोत्साहित किया है। जीई हेल्थकेयर, सीमेंस, फिलिप्स, वेरेक्स, निप्रो और ओमरोन जैसी कंपनियों ने देश में विनिर्माण संचालन स्थापित या विस्तारित किया है, जबकि कई भाग लेने वाली कंपनियों ने वैश्विक भागीदारों के साथ प्रौद्योगिकी-हस्तांतरण व्यवस्था में प्रवेश किया है। घरेलू निर्माताओं ने इम्प्लांट क्षेत्र में क्षमताओं का भी विस्तार किया है, जिससे घरेलू उत्पादन और निर्यात क्षमता में वृद्धि हुई है।
तीन पीएलआई योजनाएं महत्वपूर्ण कच्चे माल और एपीआई से लेकर उच्च मूल्य वाली दवाओं और उन्नत चिकित्सा प्रौद्योगिकियों तक भारत के फार्मास्युटिकल और चिकित्सा उपकरण विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाती हैं।
वास्तविक उत्पादन और बिक्री के साथ प्रोत्साहनों को जोड़कर, पीएलआई ढांचा मेक इन इंडिया परिकल्पना को जमीनी स्तर पर विनिर्माण क्षमता में बदलने में मदद कर रहा है, जबकि अधिक आपूर्ति-श्रृंखला लचीलापन में योगदान दे रहा है और फार्मास्यूटिकल्स और चिकित्सा उपकरणों के लिए एक विश्वसनीय विनिर्माण केंद्र के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत कर रहा है।
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