प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने आज संयुक्त रूप से कैडारैचे में अंतर्राष्ट्रीय थर्मोन्यूक्लियर प्रायोगिक रिएक्टर संयंत्र (आईटीईआर) का दौरा किया। आईटीईआर के महानिदेशक ने दोनों नेताओं का संयंत्र में स्वागत किया। यह किसी भी राष्ट्राध्यक्ष या सरकार के प्रमुख द्वारा आईटीईआर का पहला दौरा है, जो आज दुनिया की सबसे महत्वाकांक्षी संलयन ऊर्जा परियोजनाओं में से एक है।
इस दौरान दोनों नेताओं ने आईटीईआर की प्रगति की सराहना की, जिसमें दुनिया के सबसे बड़े टोकामाक की असेंबली भी शामिल है, जहां प्लाज्मा को बनाकर, नियंत्रित करके और अंततः जलाकर 500 मेगावाट संलयन ऊर्जा का उत्पादन किया जाएगा। दोनों नेताओं ने परियोजना पर काम कर रहे आईटीईआर इंजीनियरों और वैज्ञानिकों के समर्पण की भी सराहना की।
भारत पिछले दो दशकों से इस परियोजना में योगदान देने वाले सात आईटीईआर सदस्यों में से एक है। लगभग 200 भारतीय वैज्ञानिक और सहयोगी, एलएंडटी, आईनॉक्स इंडिया, टीसीएस, टीसीई, एचसीएल टेक्नोलॉजीज जैसी उल्लेखनीय उद्योग कंपनियां आईटीईआर परियोजना में लगी हुई हैं।
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