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पश्चिम एशिया में पैदा हुई राजनीतिक अस्थिरता की वजह से खरीफ सीजन से पहले भारत में उर्वरक की आपूर्ति के लिए सरकार ने प्रयास शुरू किया

पश्चिम एशिया में पैदा हुई राजनीतिक अस्थिरता की वजह से खरीफ सीजन से पहले भारत में उर्वरक की आपूर्ति के लिए सरकार ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। उर्वरक विभाग ने किसानों को आश्वस्त किया है कि समुद्री परिवहन विशेष तौर पर मालवाहक जहाजों की आवजाही प्रभावित होने के बावजूद फिलहाल भारत के पास पर्याप्त उर्वरक भंडार मौजूद है।

उर्वरक विभाग ने आंकड़ों के जरिए स्थिति को और साफ किया है ताकि किसानों के मन में किसी भी तरह का भ्रम ना रहे। कम खपत वाले फेज में अग्रिम भंडारण की आक्रामक रणनीति के साथ भारत सरकार ने उर्वरकों का एक बड़ा बफर स्टॉक तैयार किया है। इसी का परिणाम है कि खरीफ सीजन से पहले भारत का उर्वरक भंडार 177 लाख मीट्रिक टन पर पहुंच गया है।

किसानों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, उर्वरक विभाग ने बताया कि कुल उर्वरक भंडार में पिछले साल की तुलना में 36.5% की भारी बढोतरी दर्ज की गई है। यह भंडार 6 मार्च, 2025 के 129.85 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर आज 177.31 लाख मीट्रिक टन पर पहुंच गया है। इसमें महत्वपूर्ण मृदा पोषक तत्वों, विशेष रूप से DAP (25.13 लाख मीट्रिक टन) और NPKs भंडार (55.87 लाख मीट्रिक टन) में अभूतपूर्व वृद्धि का विशेष योगदान है।

इसके अलावा, देश में सर्वाधिक खपत वाले उर्वरक, यूरिया की उपलब्धता भी बढ़कर 59.30 लाख मीट्रित टन हो गई है। डेटा-आधारित यह मजबूत भंडार स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि भारत, आगामी खरीफ बुवाई के लिए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के झटकों से बच जाएगा। यह सुनिश्चित करता है कि अंतरराष्ट्रीय बाधाएं, घरेलू स्तर पर किसानों के लिए किल्लत का कारण न बनें।

अभूतपूर्व आयात रणनीति

सभी कैटेगरी के सब्सिडी वाले उर्वरकों की लगातार सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए, उर्वरक विभाग ने पहले ही जरूरी शिपमेंट्स का प्रबंध कर लिया है। भारत सरकार ने फरवरी 2026 तक 98 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का आयात किया है और अगले तीन महीनों के लिए 17 लाख मीट्रिक टन से अधिक का अतिरिक्त आयात पाइपलाइन में है। यह वैश्विक उथल-पुथल के बीच किसान समुदाय के हितों की रक्षा करने में सरकार के सक्रिय दृष्टिकोण का प्रमाण है।

इसके अलावा, अलग-अलग देशों में उर्वरक की कीमतों और सप्लाई की अस्थिरता से बचने के लिए, भारतीय कंपनियों ने प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय उत्पादकों के साथ P&K उर्वरकों के लिए दीर्घकालिक आपूर्ति समझौते सुनिश्चित किए हैं।

रणनीतिक तत्परता: उच्च स्तरीय हस्तक्षेप

LNG आपूर्ति के दबाव के बीच सरकार संसाधनों के सर्वोत्तम उपयोग के लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रही है। विभाग में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में, सरकार ने आश्वासन दिया कि उर्वरक क्षेत्र को गैस की आपूर्ति राष्ट्रीय प्राथमिकता बनी रहेगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसान, सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं और किसी भी परिस्थिति में उनके हितों से समझौता नहीं किया जाएगा। किसानों को प्रोत्साहित किया जाता है कि वे बिना किसी घबराहट के खरीफ फसलों के लिए अपनी तैयारी जारी रखें।

उर्वरकों के उत्पादन और उपलब्धता को लेकर अपनी रणनीति स्पष्ट करते विभाग ने बताया कि वर्तमान समय, लीन पीरियड होता है, जिसमें कंपनियां अपने संयंत्रों के रखरखाव और मरम्मत के लिए शटडाउन होती हैं। उर्वरक कंपनियों ने वैश्विक परिस्थितियों का फायदा उठाने के लिए अपने निर्धारित रखरखाव को पहले ही करने का फैसला लिया है।

उर्वरकों के आयात के लिए कई वैश्विक स्रोतों से भी संपर्क किया जा रहा है। उर्वरक विभाग, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के साथ समन्वय कर हालात को रियल टाइम में मॉनिटर कर रहा है, ताकि खाद आयातित खेपों की तुरंत निकासी सुनिश्चित की जा सके। दुनिया के ऊर्जा बाजार के बदलते स्वरूप के हिसाब से तुरंत प्रभावी कदम उठाने के लिए भी उर्वरक विभाग तैयारी कर रहा है।

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