राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज गुजरात के गांधीनगर में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह की शोभा बढ़ाई और उसे संबोधित किया। इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि आने वाले समय में सुरक्षा परिदृश्य और भी अधिक जटिल हो जाएगा। अभी कुछ वर्ष पहले तक हम ‘डिजिटल अरेस्ट’, ‘साइबर अपराध’ और ‘फिशिंग अटैक’ जैसे शब्दों से अपरिचित थे, किंतु आज ये हमारे समक्ष प्रमुख खतरों के रूप में खड़े हैं। ऐसे परिदृश्य में, राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों की महत्ता और उत्तरदायित्व में व्यापक वृद्धि हुई है। देश को ऐसे पुलिस अधिकारियों की आवश्यकता है जो साइबर धोखाधड़ी करने वाले अपराधियों को पकड़ने और उन्हें सजा दिलाने में तकनीकी रूप से सक्षम और निपुण हों। ऐसे फोरेंसिक विशेषज्ञों की जरूरत है जो अदालती जांच की कसौटी पर खरे उतरने वाले साक्ष्य प्रदान कर सकें और साथ ही, ऐसे सक्षम पेशेवरों की भी आवश्यकता है जो जियोपॉलिटिक्स की बारीकियों को समझ सकें और वैश्विक मंच पर आत्मविश्वास एवं स्पष्टता के साथ भारत का दृष्टिकोण प्रस्तुत कर सकें।
राष्ट्रपति ने इस बात को रेखांकित किया कि रणनीतिक अध्ययन अब केवल युद्ध और शांति के सिद्धांतों तक ही सीमित नहीं रह गया है। अब इसके दायरे में रक्षा निर्माण, उभरती प्रौद्योगिकियां, सप्लाई चेन और आत्मनिर्भर औद्योगिक क्षमताएं भी सम्मिलित हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा और सुरक्षा से जुड़े उद्योगों के साथ समन्वय स्थापित करना इन लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
राष्ट्रपति ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्र विश्व की दिशा और दशा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सरकार इस दिशा में गंभीर प्रयास कर रही है। ‘इंडिया एआई मिशन’ और ‘एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ जैसी पहलों के माध्यम से भारत वैश्विक एआई गवर्नेंस में एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में उभरा है। एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ को मिले व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन ने न केवल एक तकनीकी उपलब्धि को दर्शाया है, बल्कि यह भारत की नेतृत्व क्षमता का भी प्रमाण है।
राष्ट्रपति ने कहा कि साइबर सुरक्षा, आंतरिक सुरक्षा, वित्तीय स्थिरता और डिजिटल विश्वसनीयता का एक अभिन्न अंग है। भारत ने ‘इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर’ और ‘नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल’ जैसे सुदृढ़ संस्थागत तंत्र विकसित किए हैं, जो नागरिकों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रहे हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्र की शक्ति न केवल सैन्य कर्मियों और सुरक्षा बलों के साहस और पराक्रम पर निर्भर करती है, बल्कि सुरक्षा के लिए अनिवार्य हथियारों और शस्त्रों की गुणवत्ता, उत्पादन, प्रशिक्षण और तकनीकी आत्मनिर्भरता पर भी निर्भर है। सरकार इस दिशा में निरंतर प्रयासरत है। स्वदेशी क्षमताओं और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देकर रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम की जा रही है।
राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय सुरक्षा शिक्षा के क्षेत्र में एक उत्कृष्ट वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में निरंतर अग्रसर रहेगा और यहाँ से स्नातक होने वाले विद्यार्थी एक सुरक्षित, न्यायपूर्ण और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपना योगदान देंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों के माध्यम से भारत एक सुरक्षित, सशक्त और विकसित राष्ट्र के रूप में उभरेगा।
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