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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने #SKILLTHENATION AI चैलेंज का शुभारंभ किया तथा ओडिशा के रायरांगपुर में इग्‍नू क्षेत्रीय केंद्र और कौशल केंद्र का उद्घाटन किया

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित एक समारोह में #SkilltheNation चैलेंज का शुभारंभ किया। उन्होंने इस अवसर पर वर्चुअली ओडिशा के रायरांगपुर में स्थित इग्नू क्षेत्रीय केंद्र और कौशल केंद्र का उद्घाटन भी किया।

उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) विश्वभर की अर्थव्यवस्थाओं और समाजों को नया आकार दे रही है। यह हमारे सीखने, काम करने, आधुनिक सेवाओं तक पहुँचने और मानवता की सबसे बड़ी चुनौतियों का सामना करने के तरीकों को बदल रही है। भारत जैसे युवा राष्ट्र के लिए एआई केवल एक प्रौद्योगिकी नहीं, बल्कि सकारात्मक बदलाव का एक विशाल अवसर है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत का दृष्टिकोण हमेशा से यही रहा है कि प्रौद्योगिकी लोगों को सशक्त बनाए, समावेशन को बढ़ावा दे और सभी के लिए अवसरों का विस्तार करे। कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग सामाजिक, आर्थिक और प्रौद्योगिकी विभाजनों को पाटने के उद्देश्य से किया जाना चाहिए। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि इसके लाभ सभी पृष्ठभूमि और आयु वर्ग के लोगों तक पहुंचें, विशेष रूप से वंचित समुदायों तक।

राष्ट्रपति ने यह देखकर प्रसन्नता व्यक्त की कि छात्र संभावनाओं और अवसरों से भरे भविष्य के लिए स्वयं को तैयार कर रहे हैं। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे सदैव स्‍मरण रखें कि प्रौद्योगिकी, ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज की सेवा, चुनौतियों का समाधान खोजने तथा दूसरों को सशक्त बनाने के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने एआई लर्निंग मॉड्यूल पूरा करने वाले सांसदों की सराहना की। उन्होंने कहा कि उभरती प्रौद्योगिकियों के बारे में स्वयं सीखकर उन्होंने सीखने के माध्यम से नेतृत्व का उदाहरण प्रस्तुत किया है।

राष्ट्रपति ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास के लिए एक महत्‍वपूर्ण चालक के रूप में उभर रही है। आने वाले दशक में एआई देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), रोजगार और समग्र उत्पादकता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। डेटा साइंस, एआई इंजीनियरिंग और डेटा एनालिटिक्स जैसे कौशल देश के एआई प्रतिभा भंडार के विकास में एक अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार विभिन्न संस्थानों, उद्योग भागीदारों और शिक्षाविदों के सहयोग से यह सुनिश्चित कर रही है कि भारत न केवल प्रौद्योगिकी को अपनाए, बल्कि इसके माध्यम से एक जिम्मेदार भविष्य का निर्माण भी करे। उन्होंने सभी से एक विकसित भारत के निर्माण के लिए प्रतिबद्धता के साथ मिलकर काम करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप भारत को एक ज्ञान महाशक्ति बनाने तथा एक प्रौद्योगिकी संचालित, समावेशी और समृद्ध भारत के निर्माण में हम सभी को योगदान देना चाहिए।

कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम भारत के कार्यबल को एआई-संचालित भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता का एक हिस्सा है।

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