भारतीय रिज़र्व बैंक ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन (वस्तु एवं सेवाओं का निर्यात और आयात) विनियम, 2026 अधिसूचित कर दिया है, जो 2015 के वस्तु एवं सेवा निर्यात विनियम का स्थान लेंगे। नए विनियम पहली अक्टूबर 2026 से प्रभावी होंगे।
विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 के तहत जारी किए गए इन विनियमों का उद्देश्य सॉफ्टवेयर सहित वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात तथा आयात से संबंधित प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित और विदेशी मुद्रा लेनदेन की निगरानी को मजबूत करना है।
नए ढांचे के अंतर्गत वस्तुओं और सेवाओं के निर्यातकों को निर्दिष्ट प्राधिकरण को निर्यात घोषणा पत्र-ईडीएफ जमा करना होगा। नये नियमों में निर्यात आय की प्राप्ति और प्रत्यावर्तन के लिए 15 महीने की समय सीमा निर्धारित की गई है, जिसे अधिकृत डीलर वैध कारणों के आधार पर बढ़ा सकते हैं। भारतीय रुपये में किए गए लेन-देन के लिए यह अवधि 18 महीने होगी। निर्यात प्राप्तियों को आयात के लिए देय राशियों के विरुद्ध समायोजित करने और उचित सत्यापन के बाद तृतीय-पक्ष भुगतान की अनुमति का भी प्रावधान किया गया है। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए अधिकृत डीलरों को निर्यात, आयात और व्यापारिक लेन-देन के प्रबंधन के लिए व्यापक आंतरिक नीतियां और मानक संचालन प्रक्रियाएं लागू करने का निर्देश दिया गया है।
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