विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने एआई की संभावनाओं का उपयोग करने के साथ-साथ इसके संभावित प्रभावों का अनुमान लगाने और जोखिमों को कम करने की आवश्यकता पर बल दिया है। वे आज ग्रीस के विदेश मंत्री जॉर्ज गेरापेट्रिटिस के साथ अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के संदर्भ में एआई, विशेष रूप से समुद्री सुरक्षा विषय पर आयोजित कार्यक्रम की सह-अध्यक्षता कर रहे थे।
डॉ. जयशंकर ने कहा कि एआई और समुद्री सुरक्षा संयुक्त राष्ट्र में भारत की महत्वपूर्ण प्राथमिकताएं हैं। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली घोषणा में एआई संसाधनों तक लोकतांत्रिक पहुंच, सुरक्षित और भरोसेमंद प्रणालियों के निर्माण, मानव क्षमता में निवेश तथा आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण के लिए एआई के उपयोग पर जोर दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि समुद्री क्षेत्र में एआई से समुद्री गतिविधियों की निगरानी, खोज और बचाव, आपदा प्रबंधन तथा संदिग्ध गतिविधियों की पहचान में मदद मिल सकती है। एआई का उपयोग जहाजों, संचार नेटवर्क और समुद्र के भीतर महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने वाले साइबर अभियानों के लिए भी किया जा सकता है।
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