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Sales of Khadi and Village Industry products have crossed ₹1.87 lakh crore, with artisans remuneration increasing by up to 275%.
भारत

खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री 1.87 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंची, कारीगरों के पारिश्रमिक में 275% तक की वृद्धि हुई

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र ने विगत 12 वर्षों में विकास और परिवर्तन की असाधारण यात्रा तय की है। वित्त वर्ष 2025-26 में खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री 1,87,105 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई जो अब तक सर्वाधिक है और ग्रामीण भारत की बढ़ती उद्यमशीलता, आत्मनिर्भरता तथा आर्थिक सशक्तिकरण का सशक्त प्रमाण है। ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ जैसे राष्ट्रीय अभियानों से प्रेरित होकर खादी अब केवल पारंपरिक उत्पाद नहीं रह गई है बल्कि यह ‘नए भारत’ की आत्मनिर्भरता, स्वदेशी गौरव और ग्रामीण समृद्धि का जीवंत प्रतीक बन गई है। खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र ने उत्पादन, विपणन और रोजगार सृजन में नए मानदंड स्थापित करते हुए देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा का संचार किया और उसे दिशा दी है।

केवीआईसी ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अनंतिम आंकड़े जारी किए

नई दिल्ली में राजघाट के गांधी दर्शन पर स्थित केवीआईसी के कार्यालय में वित्त वर्ष 2025-26 के अनंतिम आंकड़े जारी करते हुए इसके अध्यक्ष मनोज कुमार ने कहा कि आयोग ने उत्पादन, बिक्री और रोजगार सृजन के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013-14 की तुलना में विगत 12 वर्षों में खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री में 501 प्रतिशत, उत्पादन में 380 प्रतिशत और रोजगार सृजन में 56 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने विगत वर्षों में हुई वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2013-14 की तुलना में वर्ष 2024-25 में बिक्री में 447 प्रतिशत और उत्पादन में 347 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसी प्रकार, वित्त वर्ष 2013-14 की तुलना में वर्ष 2023-24 में बिक्री में 400 प्रतिशत और उत्पादन में 315 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री 1.87 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गई है

अध्यक्ष मनोज कुमार ने कहा कि केवीआईसी का यह उल्लेखनीय प्रदर्शन न केवल ‘विकसित भारत@2047’ के संकल्प को गति प्रदान कर रहा है बल्कि भारत को विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में स्थान दिलाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रभावशाली मार्गदर्शन, महात्मा गांधी से मिली प्रेरणा और देश के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत लाखों कारीगरों की कड़ी मेहनत को इस उपलब्धि का श्रेय दिया। केवीआईसी के अध्यक्ष ने यह भी बताया कि जहां वित्त वर्ष 2013-14 में खादी और ग्राम उद्योग उत्पादों का उत्पादन 26,109 करोड़ रुपये का था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में इसमें लगभग पांच गुना वृद्धि हुई जो 380 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 1,25,296 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। वित्त वर्ष 2013-14 में बिक्री जहां 31,154 करोड़ रुपये थी वहीं इसमें लगभग छह गुना वृद्धि दर्ज की गई जो 501 प्रतिशत की अभूतपूर्व बढ़ोतरी के साथ वित्त वर्ष 2025-26 में 1,87,105 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। यह अब तक बिक्री का उच्चतम आंकड़ा है।

खादी वस्त्रों के उत्पादन और बिक्री में अभूतपूर्व वृद्धि

खादी के वस्त्रों के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति देखी गई है। इनका उत्पादन वर्ष 2013-14 में 811 करोड़ रुपये का था जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 3,974 करोड़ रुपये हो गया। यह लगभग 390 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। साथ ही, खादी वस्त्रों की बिक्री 1,081 करोड़ रुपये से बढ़कर 7,869 करोड़ रुपये हो गई है जो इसमें लगभग 628 प्रतिशत की वृद्धि है। खादी के प्रति प्रधानमंत्री के निरंतर प्रोत्साहन और इसके प्रचार का सकारात्मक प्रभाव इस क्षेत्र की बढ़ती स्वीकार्यता और बाजार के विस्तार में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है।

ग्रामोद्योग क्षेत्र में उत्पादन और बिक्री के नए कीर्तिमान

ग्रामोद्योग क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति देखी गई है। वर्ष 2013-14 में ग्रामोद्योग सामग्रियों का उत्पादन जहां 25,298 करोड़ रुपये था वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 1,21,322 करोड़ रुपये हो गया है जो इसमें लगभग 380 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। इसी प्रकार, उनकी बिक्री 30,073 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,79,236 करोड़ रुपये हो गई जो लगभग 496 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है। ग्रामोद्योग क्षेत्र ने रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वर्ष 2013-14 में जहां इस क्षेत्र में 1.19 करोड़ लोग कार्यरत थे वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 1.99 करोड़ हो गया जो ग्रामीण आजीविका सृजन में इस क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को उजागर करता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘घर-घर स्वदेशी’ जैसे अभियानों के प्रभाव से प्रेरित होकर ग्रामोद्योग उत्पादों की मांग में लगातार वृद्धि देखी गई है। परिणामस्वरूप, यह क्षेत्र ग्रामीण उद्योगों के विस्तार, बाजार को मजबूत करने और रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में उभरा है।

रोजगार सृजन में केवीआईसी की ऐतिहासिक उपलब्धि

केवीआईसी ने रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय उपलब्धि प्राप्त की है। खादी और ग्रामोद्योग से संबंधित गतिविधियों में वर्ष 2013-14 में क्रमिक रूप से वृद्धि के साथ रोजगार 1.30 करोड़ था जो इस क्षेत्र में 56 प्रतिशत की वृद्धि के साथ वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 2.04 करोड़ हो गया। इससे ग्रामीण आजीविका सृजन में केवीआईसी की महत्वपूर्ण भूमिका उजागर होती है।

पीएमईजीपी ने स्वरोजगार और उद्यमिता को नई गति प्रदान की है

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के अंतर्गत वित्त वर्ष 2025-26 में 66,494 नई इकाइयां स्थापित की गईं और इन इकाइयों के लिए 7,375 करोड़ रुपये के ऋण के बदले सरकारी खर्च पर 2,457 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी वित्तीय सहायता वितरित की गई। इन इकाइयों के माध्यम से 7,31,434 लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान किए गए। योजना की शुरूआत से अब तक कुल 10,84,679 इकाइयां स्थापित की जा चुकी हैं जिनके लिए 80,705 करोड़ रुपये के ऋण के बदले 29,623 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी वित्तीय सहायता वितरित की गई है। इस पहल के माध्यम से अब तक लगभग 97.95 लाख लोगों को रोजगार प्रदान किया गया है।

ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत टूल-किट के वितरण के माध्यम से कारीगरों का सशक्तीकरण

ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत अब तक 51,230 इलेक्ट्रिक पॉटरी व्हील, 2,46,099 मधुमक्खी पालन के लिए बक्से और मधुमक्खियों के छत्ते, 2,674 स्वचालित और पैडल से चलने वाली अगरबत्ती बनाने की मशीनें, 7,669 जूते बनाने और मरम्मत करने के टूल-किट, 836 पेपर प्लेट और दोना बनाने की मशीनें, एसी मरम्मत, मोबाइल मरम्मत, सिलाई, इलेक्ट्रीशियन और प्लंबर के लिए 7,571 टूल-किट, काष्ठ शिल्प, बेकार लकड़ी से बने सामान और लकड़ी के खिलौने बनाने के लिए 5,138 मशीनें और ताड़ के गुड़, तेल घानी निकालने और इमली प्रसंस्करण के लिए 1,789 मशीनें वितरित की जा चुकी हैं। इस योजना के अंतर्गत वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 37,769 मशीनें, टूल-किट और उपकरण वितरित किए जा चुके हैं। विगत चार वर्षों की समीक्षा से संकेत मिलता है कि 2022-23 में 21,874, 2023-24 में 29,540, 2024-25 में 38,904 और 2025-26 में 37,769 मशीनें और उपकरण वितरित किए गए। इस प्रकार, ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत केवीआईसी ने अब तक कुल 3,23,006 मशीनें, टूल-किट और उपकरण वितरित किए हैं और इस प्रकार ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

केवीआईसी के प्रयासों के माध्यम से महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा

केवीआईसी ने महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान केवीआईसी के विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों के अंतर्गत 79,682 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण प्राप्त हुआ। इनमें से 47,382 प्रशिक्षु महिलाएं थीं जो कुल संख्या का लगभग 59 प्रतिशत हैं। इसके अतिरिक्त, पीएमईजीपी योजना के अंतर्गत 2025-26 के दौरान 28,180 महिला उद्यमियों ने व्यावसायिक इकाइयां स्थापित कीं जिससे 3,09,980 महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित हुए। यह आंकड़ा महिला उद्यमशीलता को बढ़ावा देने में इस योजना की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है। खादी क्षेत्र में लगभग 5,00,000 कारीगरों में से 80 प्रतिशत से अधिक महिलाओं के साथ यह क्षेत्र महिला नेतृत्व वाले आर्थिक सशक्तीकरण के लिए प्रभावी माध्यम के रूप में कार्य कर रहा है।

कारीगरों के पारिश्रमिक में 275% तक की वृद्धि

कारीगरों को दिए जाने वाले पारिश्रमिक में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो 2013-14 में 4 रुपये प्रति गट्ठर से बढ़कर वर्तमान में 15 रुपये प्रति गट्ठर हो गया है। यह पारिश्रमिक में लगभग 275 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

सरकारी खरीद, प्रदर्शनी में बिक्री और राष्ट्रीय ध्वजों की मांग में वृद्धि

इसके साथ ही, खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की सरकारी खरीद बढ़कर 92.08 करोड़ रुपये हो गई है जो इस क्षेत्र की बढ़ती स्वीकार्यता और संस्थागत मांग में वृद्धि को दर्शाती है। इसी प्रकार, खादी उत्पादों की प्रदर्शनियों और विपणन की पहलों के माध्यम से 30.83 करोड़ रुपये की बिक्री हुई जिससे बाजार विस्तार और उपभोक्ताओं की सहभागिता को मजबूती मिली है। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय ध्वजों की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है जो 2013-14 में 0.87 करोड़ रुपये थी वह वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 2.35 करोड़ रुपये हो गई है। यह वृद्धि देश में ‘हर घर तिरंगा’ जैसे जन अभियानों के प्रभाव और खादी के उपयोग के प्रति जनता में बढ़ती लोकप्रियता को रेखांकित करती है।

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