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भारत में नदी और मुहाना क्षेत्र में पाई जाने वाली डॉल्फ़िन के व्यापक क्षेत्र के आकलन का दूसरा अभियान बिजनौर से शुरू किया गया

पिछले वर्ष मार्च में गुजरात के गिर में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (एनबीडब्ल्यूएल) में प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा पहले दौर के गणना अनुमान के परिणाम जारी किए जाने के बाद अब देश में डॉल्फ़िन के संरक्षण को आगे बढ़ाने के लिए केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने आज उत्तर प्रदेश के बिजनौर से प्रोजेक्ट डॉल्फ़िन के तहत नदी एवं मुहाना क्षेत्र में पाई जाने वाली डॉल्फ़िन का दूसरा व्यापक अनुमान शुरू किया।

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने पिछले वन्यजीव सप्ताह के दौरान देहरादून में डॉल्फ़िन की अखिल भारतीय गणना और उसके गणना प्रोटोकॉल के दूसरे चरण का शुभारंभ किया था। इस कार्यक्रम का समन्वय भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई), देहरादून द्वारा राज्य वन विभागों और सहयोगी संरक्षण संगठनों डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया, आरण्यक और वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के सहयोग से किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के 13 जिलों के वन कर्मचारियों के लिए कल बिजनौर में एक क्षेत्रीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई थी। इसमें सर्वेक्षण की प्रगति के साथ-साथ मानकीकृत क्षेत्रीय क्षमता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक 10-15 जिलों के लिए समय-समय पर आगे प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा।

सर्वेक्षण की शुरुआत तीन नावों में सवार 26 शोधकर्ताओं के साथ हुई जिन्होंने पारिस्थितिक और पर्यावास संबंधी मापदंडों को रिकॉर्ड किया और जलमग्न ध्वनिक निगरानी के लिए हाइड्रोफोन जैसी तकनीकों का उपयोग किया। पहले चरण में सर्वेक्षण बिजनौर से गंगा सागर तक गंगा के मुख्य भाग और सिंधु नदी क्षेत्र में किया जाएगा। दूसरे चरण में यह ब्रह्मपुत्र, गंगा की सहायक नदियों, सुंदरबन और ओडिशा को समाहित करेगा।

गंगा नदी डॉल्फिन के अलावा सर्वेक्षण में सिंधु नदी डॉल्फिन और इरावदी नदी डॉल्फिन की स्थिति का आकलन किया जाएगा। इसके साथ ही उनके आवास की स्थिति खतरों और उनसे संबंधित संरक्षण-प्राथमिकता वाले जीवों का भी अध्ययन किया जाएगा। यह पहल भारत के नदी पारिस्थितिकी तंत्रों के लिए साक्ष्य-आधारित संरक्षण योजना और नीतिगत कार्रवाई का समर्थन करने के लिए ठोस वैज्ञानिक आंकड़े उत्पन्न करेगी।

पिछले राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण (2021-23) में भारत में लगभग 6,327 नदी डॉल्फ़िन की गणना कर उनकी संख्‍या दर्ज की गईं, जिनमें गंगा, यमुना, चंबल, गंडक, घाघरा, कोसी, महानंदा और ब्रह्मपुत्र नदियों में पाई जाने वाली गंगा नदी डॉल्फ़िन और ब्यास नदी में पाई जाने वाली सिंधु नदी डॉल्फ़िन की अपेक्षाकृत कम संख्‍या शामिल है। उत्तर प्रदेश और बिहार में इनकी संख्या सबसे अधिक थी, उसके बाद पश्चिम बंगाल और असम का स्थान था जो डॉल्फ़िन के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए गंगा बेसिन के महत्व को दर्शाता है।

वर्तमान सर्वेक्षण में पिछली बार की तरह ही मानकीकृत पद्धति का पालन किया जा रहा है लेकिन इसमें नए क्षेत्रों और परिचालन क्षेत्रों को भी शामिल किया जाएगा जिसमें सुंदरबन और ओडिशा में पाई जाने वाली एक नई प्रजाति, इरावदी डॉल्फिन का अनुमान लगाना भी शामिल है। यह विस्तारित भौगोलिक कवरेज इस प्रजाति की जनसंख्या के अनुमानों को अद्यतन करने, खतरों और आवास की स्थितियों का आकलन करने और प्रोजेक्ट डॉल्फिन के तहत बेहतर संरक्षण योजना बनाने में सहायक होगी।

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